देवब्रत मंडल

गया जंक्शन के सर्कुलेटिंग एरिया में वाहनों के पार्किंग स्थल निर्धारित गए हैं। कार कहां लगना है, ऑटो रिक्शा कहां लगना है, बाइक कहां लगना है। इन सभी के लिए स्थान और सीमित एरिया भी निर्धारित किया गया है। लेकिन यहां ये सभी बातें केवल कागज पर ही सही दिखाई देती है, वास्तविकता कुछ और ही है।
गया जंक्शन के डेल्हा साइड में हाल ही में ऑटो रिक्शा का ठेका हुआ। वो भी तीन साल के लिए। जिस व्यक्ति को ऑटो स्टैंड का यहां ठेका रेलवे ने दिया है, उन्हें निर्धारित स्थल और क्षेत्रफल भी निर्धारित किया गया है।
परंतु यहां तो प्लेटफॉर्म पर यात्रियों के आने जाने वाले मार्ग पर कहें या फिर स्टेशन बिल्डिंग के प्रवेश और निकास द्वार पर ऑटो रिक्शा लगाए जा रहे हैं। जिसे देखने वाला मानो कोई नहीं है।

जबकि नो पार्किंग जोन में लगे वाहन चालकों के विरुद्ध कार्रवाई का प्राविधान किया गया है। ऐसा किया भी जाता है। लेकिन ये तस्वीर शुक्रवार को दोपहर बाद की है। यहां से वाणिज्य पर्यवेक्षक और रेलवे सुरक्षा बल के पदाधिकारियों का भी आना जाना होता है लेकिन क्या मजाल कि ऑटो चालक यहां से टस से मस हो जाएं। मानों इनमें कानून नाम का डर ही नहीं। हालांकि यहां लगे ऑटो रिक्शा चालक से जब पूछा गया तो साफ शब्दों में कहा कि 40 रुपये किस बात का ठीकेदार का आदमी लेता है। जबकि इसके पहले तीस रुपये ही लिया जा रहा था। अब जब नए ठीकेदार आए हैं तो 40 रुपये लिया जा रहा है।
बहरहाल, ये ठीकेदार और चालक के बीच का मामला है लेकिन बेतरतीब और नो पार्किंग जोन में वाहन लगने से रोकने की जिम्मेदारी जिनकी है, उन्हें तो यात्री सुविधाओं का भी ख्याल रखना चाहिए।
