देवब्रत मंडल

बिहार एवं गया जिले के कुष्ठ रोगियों के एकमात्र अस्पताल गौतम बुद्ध कुष्ठ आश्रम, छोटकी नवादा में “दीदी की रसोई” से यहां भर्ती मरीजों को नाश्ता नहीं दिया जा रहा है। वहीं जो भोजन मिल रहे हैं उसकी भी गुणवत्ता अच्छी नहीं है। अस्पताल भवन की हालत जर्जर है। दीदी की रसोई में काम करने वाली महिलाओं को पिछले सात महीने से मानदेय नहीं मिल रहा है। इन्हीं सब समस्याओं को लेकर बिहार राज्य कुष्ठ कल्याण समिति ने बुधवार को अस्पताल परिसर में एकदिवसीय सांकेतिक धरना दिया। धरना स्थल से बिहार राज्य कुष्ठ कल्याण समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व वार्ड पार्षद डॉ विनोद कुमार मंडल ने घोषणा की है कि यदि दो दिनों के अंदर यहां के मरीजों को नाश्ता नहीं दिया जाता है और गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिलता है तो जिलापदधिकारी के समक्ष कुष्ठ रोगियों एवं उनके आश्रितों को लेकर धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
डॉ मंडल ने कहा कि समाज के सबसे निचले पायदान पर रहने वाले कुष्ठ रोगियों के साथ भी सरकार न्याय नहीं कर रही है। भोजन में जो दाल दिया जाता है वो केवल पानी रहता है, दाल के अंश नाम मात्र होते हैं। नाश्ता बंद हो जाने से मरीजों को सुबह से भूखे रहने पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि इस अस्पताल में चिकित्सक की स्थायी प्रतिनियुक्ति नहीं किया जाना कुष्ठ रोगियों के साथ सौतेला व्यवहार के माफिक है। अस्पताल के भवन जर्जर हालत में है।
इन सारी समस्याओं पर जिला प्रशासन और सरकार का ध्यान बार बार आकृष्ट कराया गया है लेकिन न तो प्रशासन और न तो सरकार ही कुष्ठ मरीजों के प्रति दया का भाव रखती है।
यहां संचालित दीदी की रसोई में कार्य कर रही महिलाओं ने बताया कि सात महीने से वेतन(मानदेय) नहीं मिल रहा है। आर्थिक तंगी से परिवार गुजर रहा है। अब तो किराना दुकान और दूध उपलब्ध कराने वाले उधार देना भी बंद कर दिया है। अपने अपने घरों से अस्पताल तक आने जाने के लिए किराया के पैसे भी कर्ज के रूप में लेते हैं। बताया गया कि आवंटन के अभाव में दीदी की रसोई भी प्रभावित होने लगा है। धरना को वार्ड पार्षद अनुपमा कुमारी, कल्याण समिति के महामंत्री परमानंद सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप कुमार मंडल आदि ने भी संबोधित करते हुए सरकार एवं जिलापदधिकारी से इन समस्याओं के शीघ्र निदान के लिए सकारात्मक पहल करने की मांग की।
