देवब्रत मंडल

बहुचर्चित सोना लूट कांड मामले में न्यायिक हिरासत में रहे पूर्व गया रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह की जमानत याचिका पर शनिवार को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मदन किशोर कौशिक की अदालत में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद प्रधान जिला जज ने जमानत दे दी। इस मामले में 20 जनवरी को जमानत याचिका पर हुई सुनवाई में केस डायरी प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया था और अगली सुनवाई की तिथि 24 जनवरी निर्धारित की गई थी। सुनवाई के दौरान निलंबित रेल थानाध्यक्ष की ओर से बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने जमानत के पक्ष में दलीलें रखीं। वहीं लोक अभियोजक अंबुज कुमार सिन्हा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत का विरोध किया। लोक अभियोजक अंबुज कुमार सिन्हा ने बताया कि उन्होंने अदालत में जमानत का विरोध करते हुए कई बिंदुओं पर विरोध करते हुए कई दलीलें दीं। उन्होंने न्यायालय को बताया कि इस कांड के जांच की पर्यवेक्षण रिपोर्ट में राजेश कुमार सिंह की संलिप्तता की बात सामने आई है। वहीं मनोज सोनी, धनञ्जय शाश्वत आदि के बयानों आदि डिजिटल एविडेंस को आधार बनाते हुए न्यायालय से जमानत नहीं देने की अपील की। गौरतलब है कि इससे पूर्व निलंबित रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह की जमानत याचिका 05 जनवरी को अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत से खारिज की जा चुकी थी। इसके बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में 15 जनवरी को जमानत याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर सुनवाई के लिए 17 जनवरी की तिथि निर्धारित की गई थी, किंतु कतिपय कारणों से नहीं हो पाई थी तो 20 जनवरी की तिथि निर्धारित की गई थी। बता दें कि निलंबित रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह 31 दिसंबर से न्यायिक हिरासत में गया केंद्रीय कारा में बंद हैं।
इस मामले में उनके अलावा रेल थाना के चार सिपाही तथा दो अन्य लोग मोहम्मद परवेज और सीताराम उर्फ अमन शर्मा को नामजद आरोपी बनाया गया है। इन सभी के खिलाफ न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी का वारंट जारी किया जा चुका है।
उल्लेखनीय है कि 21 नवंबर को हावड़ा-जोधपुर एक्सप्रेस में एक यात्री धनंजय शाश्वत जो मनोज सोनी का स्टाफ है से एक किलोग्राम सोना छीन लिया गया था। इसके साथ मारपीट करने और धमकी देने का भी आरोप है। इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। पटना रेल मुख्यालय के डीएसपी भास्कर रंजन इस टीम को लीड कर रहे हैं।
