बागेश्वरी गुमटी: आरओबी के लिए सड़क से लेकर संसद तक उठी थी आवाज, जानें अबतक क्या-क्या हुआ, कौन-2 आगे आए

Deobarat Mandal

देवब्रत मंडल

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बागेश्वरी रेलवे फाटक

किसी भी बड़ी परियोजना की नींव स्थानीय स्तर पर डाली जाती है। जन आकांक्षाओं के मर्म की समझ सबसे पहले स्थानीय स्तर के सामाजिक कार्यकर्ता रखते हैं, इसके बाद सतत प्रयास से ये दूर तक जाती है। गया जी शहर के उत्तरी भाग में गया-मानपुर जंक्शन के बीच बागेश्वरी गुमटी(LC/71A) के पास गुजरती ग्रैंड कॉर्ड रेल लाइन पर एक पुल की आवश्यकता उस वक्त कम महसूस की जाती रही होगी जब शहर के उत्तरी हिस्से में घनी आबादी नहीं थी। या कहें बसावट वाले क्षेत्र कम थे।

समय के साथ बढ़ती गई आबादी, बस गए कई नए मोहल्ले

समय के साथ आबादी बढ़ी और इधर बसावट वाले नहीं बल्कि कृषि क्षेत्र हुआ करते थे, जो कालक्रम में बदलते गए। गया जी शहर के उत्तरी हिस्से में पहले कंडी नवादा, बाद में छोटकी नवादा, बागेश्वरी मंदिर(पौराणिक मोहल्ला), लोको कॉलोनी(अंग्रेजी शासनकाल), गया कॉटन एंड जूट मिल(1937में स्थापित) एवं कर्मचारियों के आवास( जैसे मोहल्ले और टोले हुआ करते थे। बाद में छोटकी नवादा में कई और नए बसावट वाले क्षेत्रों में परिवर्तित हुए। संजय गांधी की मृत्यु उपरांत संजय नगर पूर्व विधायक स्व जय कुमार पालित के कार्यकाल में बसाया गया। उन्हीं के कार्यकाल में न्यू कॉलोनी बागेश्वरी नगर निगम(तत्कालीन गया क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण) की भूमि पर बसाया गया। इसके साथ ही कई और क्षेत्र में घनी आबादी बस गई।

अधिकांश समय तक बंद रहता है रेल फाटक

बागेश्वरी गुमटी पर जो फाटक हुआ करता था वो पुराने मॉडल का हुआ करता था। ट्रेनें भी इस लाइन पर काफी कम की संख्या में चला करते थे लेकिन जैसे जैसे देश और राज्य के साथ गया जी विकास की ओर अग्रसर होता गया। वैसे वैसे सड़क मार्ग आबादी और वाहनों के साथ रेल पटरियों पर ट्रेनों का दवाब बढ़ता ही गया। एक समय था कि बागेश्वरी गुमटी(फाटक) अधिकांश समय तक खुला रहता था लेकिन अब परिस्थिति बिल्कुल उल्टा हो गई। अब अधिकांश समय तक बंद ही रहता है।

लोगों में सामाजिक चेतना जागृत हुई

मौतों का सिलसिला जारी रहा। समय से अस्पताल, स्कूल-कॉलेज पहुंचना, कार्यालय पहुंचना, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, हवाई अड्डा तक समय से पहुंचने के लिए रेल पटरियों को पार करने की जल्दबाजी में अनगिनत लोगों की अकाल मौत ट्रेन की चपेट में आने से होती रही। पीड़ित परिवार, समाज का रोना बिलखना, करुण क्रंदन ने सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आमजन को झकझोर कर रख दिया। इसके बाद इस विषम परिस्थितियों से उबारने के लिए समाज के लोगों में चेतना जागृत हुई।

लगातार होती रही मौत ने पुल का होना जरूरी समझा

समाज में, सामाजिक कार्यकर्ताओं में, अकाल मृत्यु को प्राप्त होते जा रहे व्यक्तियों के पीड़ित परिवार के लोगों में बागेश्वरी गुमटी के पास एक पुल के होने की चर्चाओं ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया। लोग एकजुट हुए। धीरे धीरे यह इच्छा(जरूरत) आवश्यकता में बदल गई। विभिन्न मोर्चे और मंच पर मांग जोर पकड़ने लगी। तब और अब के मीडिया हाउस में बागेश्वरी गुमटी पर आरओबी की जरूरत को मुद्दा बन गया। बात जनप्रतिनिधियों से लेकर सरकार तक पहुंचने लगी।

सरकार ने जन आकांक्षाओं का रखा मान सम्मान

सरकार ने जनाकांक्षाओं का आदर और सम्मान किया। विकास के लिए बागेश्वरी गुमटी पर आरओबी का होना जरूरी समझा गया। यह और जरूरी हो गया जब सरकार ने हाई स्पीड ट्रेन चलाने की योजना बनाई। जिसके तहत अब देश के किसी हिस्से में रेलवे फाटक को खत्म कर सड़क यातायात को सुगम और सुरक्षित करने के लिए रोड ओवर ब्रिज, फ्लाई ओवर ब्रिज, रोड अंडर ब्रिज बनाने लगी। अब तो मेट्रो रेल लाइन बिछाई जा रही है। मालगाड़ियों के लिए अलग से फ्रेट कॉरिडोर बन रहा है गया जी में। बागेश्वरी गुमटी, माडनपुर बायपास और मुफस्सिल(मानपुर) में फ्लाई ओवर ब्रिज बनाया जा रहा है।

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रेलवे द्वारा पूर्व पार्षद को प्रेषित पत्र

पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने की थी पहल

बागेश्वरी गुमटी पर पुल बनाने की मांग आज नई नहीं है। जब बिहार के मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी हुआ करते थे तो उन्होंने इसके लिए पहल की थी। तत्कालीन वार्ड पार्षद(वार्ड नं 04) बताते हैं कि उन्होंने इसके लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री मांझी से मिले थे। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री मांझी ने यहां (बागेश्वरी गुमटी) के पास आरओबी बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखा था। श्री मंडल ने एक पत्र का हवाला देते हुए बताया कि उस वक्त गया के तत्कालीन जिला पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त और सदर एसडीओ (वर्तमान में एडीएम राजस्व परितोष कुमार) आदि ने इस जगह पर आरओबी बनाने के लिए विभागीय स्तर पर संबंधित अधिकारियों के साथ पत्राचार किए थे।

पूर्व सांसद ने लोकसभा में उठाई थी आवाज

पूर्व सांसद विजय कुमार मांझी ने लोकसभा में सदन के पटल पर बागेश्वरी गुमटी के पास आरओबी बनाने की मांग को रखा था। श्री मंडल ने बताया कि 2021 में बागेश्वरी गुमटी पर रेल लाइन पार करते समय पॉवरगंज मोहल्ले के रहने वाले अशोक प्रजापत के इकलौते बेटे सातवीं कक्षा के छात्र क्रिस कुमार की मौत भुनेश्वर-नई दिल्ली दुरंतो एक्सप्रेस की चपेट में आने से हो गई थी। इस हृदयविदारक घटना ने मानवता को झकझोर कर रख दिया था। पावरगंज, बैरागी, पहसी, बागेश्वरी, संजय नगर, छोटकी नवादा, न्यू कॉलोनी बागेश्वरी, लोको कॉलोनी, गोविंदपुर, कंडी नवादा, खरखुरा, बमबाबा, गांधी मोड़, गौतम कुष्ठ आश्रम आदि समेत कई मोहल्ले के लोग एकजुट होकर यहां पुल बनाने के लिए आंदोलन को तेज किया।

विस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री के समक्ष रखे थे प्रस्ताव

इसके बाद गया शहर के विधायक सह विधानसभा अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार ने बागेश्वरी गुमटी के पास आरओबी निर्माण के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास प्रस्ताव रखा। इसके उपरांत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी प्रगति यात्रा के क्रम में जब गया आए तो उन्होंने न केवल इस आरओबी को बनाने की घोषणा ही की, बल्कि जाम से समस्याओं से सदा के लिए मुक्ति दिलाने के लिए इस महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी प्रदान करते हुए करीब एक सौ करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति भी दे दी। इसके बाद यहां अब आरओबी बनने की दिशा में कार्य काफी आगे बढ़ चुका है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया करीब 65-70% पूरी हो गई है। पुल बनाने जा रहे विभाग(बिहार राज्य पुल निर्माण निगम) के अधिकारी निरंतर स्थलों पर पहुंच रहे हैं। निर्माण कार्य करने वाली एजेंसी के बेस कैम्प भी तैयार हो रहे हैं।

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निरीक्षण करते पुल निर्माण निगम के अभियंता

भूमि पूजन को आएंगे विधानसभा अध्यक्ष

रिपोर्ट लिखे जाने तक जो जानकारी प्राप्त हुई है, उसके अनुसार 21 फरवरी 2026 को बागेश्वरी गुमटी के पास बनने वाले आरओबी के लिए शुभ मुहूर्त में भूमि पूजन में बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार आने वाले हैं। इसके लिए गुरुवार को पुल निर्माण निगम के एसडीईओ आकाश दीप और कनीय अभियंता प्रवीण कुमार स्थल का जायजा लेने आए थे। इधर, निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर संजय कुमार वर्मा ने बताया कि 21 फरवरी को भूमि पूजन के लिए तैयारी की जा रही है। इधर, सूत्रों की मानें तो संभावना है कि मार्च महीने में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समृद्धि यात्रा में गया आएंगे लेकिन इस बात की पुष्टि नहीं हुई है।

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