देवब्रत मंडल

स्वयं को कानून की चंगुल में फंसते देख दिलीप कुमार अब कह रहा है कि मेरी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। तनावग्रस्त होने के कारण हमने अपनी मां का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया हूं। मेरी मां जीवित है। जो मृत्यु प्रमाण पत्र हमने बनवाया है कि मेरी मां मीणा देवी की मृत्यु हो चुकी है, उसे रद्द कर दिया जाए।
वार्ड पार्षद समेत अन्य की भूमिका संदेह के घेरे में
इस फर्जीवाड़े के खेल में सहयोगी बने वार्ड पार्षद की भूमिका भी संदेह के घेरे में नजर आ रहा है। जिन्होंने इस फर्जीवाड़े के खेल में कभी लिख कर दे चुकी थीं कि गोसाईबाग, गुरुद्वारा रोड के रहने वाले दिलीप कुमार की मां की मृत्यु 28.02.2024 को उनके घर पर(गोसाईबाग स्थित आवास) में हो गई थी। जिसे मैं वर्षों से जानती और पहचानता हूं। वार्ड पार्षद अधिसूचक होते हैं तो इन्होंने कैसे प्रमाणित कर दिया था कि मीणा देवी की मृत्यु हो चुकी है।
मामला उलझा कर अब बेटा सुलझाने के लिए आगे आया
दिलीप कुमार ने साजिश रची थी कि मां के नाम से गुरुद्वारा रोड, गोसाईबाग मोहल्ला स्थित मां मीणा देवी के नाम से मकान को अपने नाम करा लूं ताकि इस संपत्ति का वह मालिक बन जाए। इस साजिश रचने के पीछे और अंजाम तक पहुंचाने में कई लोगों ने दिलीप कुमार को मदद पहुंचाई। पहले तो खुद दिलीप ने कार्यपालक दंडाधिकारी के समक्ष झूठी शपथ ली कि मेरी माँ की मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद उसने नगर निगम के रजिस्ट्रार से मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए अनुरोध पत्र लिखा। इसके बाद मामला प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी के पास पहुंचा। जिन्होंने कर्मचारी धीरेंद्र के रिपोर्ट पर मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने की अनुशंसा की।
इस फर्जीवाड़े में दिलीप का ससुर भी है शामिल

हद तो यहां पार कर दिया दिलीप ने की अपनी जीवित मां को मृत घोषित करने के लिए दो लोगों की गवाही दिलवाई। जिसमें एक गवाह शंकर प्रसाद बने, दूसरे गवाह बाबूलाल। गवाही देने वाले शंकर प्रसाद के बारे में जब magadhlive की टीम ने पड़ताल की तो ये बात सामने आई कि शंकर प्रसाद दिलीप कुमार की पत्नी के पिता हैं। यानी इस साजिश में दिलीप की पत्नी और ससुर भी शामिल थे। और जब वार्ड पार्षद जो कि जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने के अधिसूचक की हैसियत(दायित्व/कर्तव्य) रखते हैं तो इन्होंने भी बगैर पड़ताल किए दिलीप कुमार का आंख बंद कर साथ दिए और लिखकर दे दीं कि दिलीप कुमार की मां की मृत्यु हो चुकी है।
मीणा देवी झारखंड में रहती हैं, कभी कभार ही गया जी आती है

मीणा देवी जो कि इस फर्जीवाड़े की शिकार हुई हैं। वो झारखंड के रांची धुर्वा में रहती हैं। कभी कभार ही गयाजी के गुरुद्वारा रोड स्थित गोसाईबाग मोहल्ले के अपने आवास पर रहने के लिए आया जाया करती हैं। जब इन्हें पता चला कि उनके नाम घर को उनके बेटे दिलीप कुमार अपने नाम से कराने के लिए मुझे मृत घोषित कर दिया है तो कुछ दिन पहले गया जी आईं और इस सारे फर्जीवाड़े की बात लोक सूचना अधिकारी के पास लिखित रूप में दीं। तब यह मामला मीडिया की सुर्खियों में आ गया। इसके बाद इस फर्जीवाड़े में शामिल सारे लोगों के हाथ पांव फूलने लगे।
कई दिनों से भागे फिर रहा दिलीप पत्नी के संग हाजिर हुआ
घर में ताला लगाकर दिलीप पूरे परिवार के साथ इधर उधर भागा फिर रहा था। सूचना है कि पुलिस भी गोसाईबाग स्थित मीणा देवी के घर पर दिलीप को खोजने गई थी। उस दिन वार्ड पार्षद के प्रतिनिधि(पति) के एक कोई भाई पुलिस के सामने उपस्थित हुआ था। जिससे और आसपास के लोगों से दिलीप के बारे में पता लगाने के लिए कहा था। इसके बाद दिलीप कुमार पर वार्ड पार्षद के प्रतिनिधि ने दवाब बनाया तब बुधवार को उप नगर आयुक्त शशिकांत के समक्ष दिलीप कुमार, उनकी पत्नी और वार्ड पार्षद के प्रतिनिधि उपस्थित हुए।
उपनगर आयुक्त ने कहा-प्रमाणपत्र रद्द किया जाएगा
उप नगर आयुक्त शशिकांत ने बताया कि बुधवार को दिलीप कुमार, उनकी पत्नी और वार्ड नं 17 के प्रतिनिधि उनके पास आए। उन्होंने बताया कि पार्षद प्रतिनिधि के प्रयास किया तब दिलीप कुमार और उनकी पत्नी उनके समक्ष पेश हुए। उपनगर आयुक्त शशिकांत ने बताया कि दिलीप की पत्नी ने बताया कि पति की मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं है। कुछ दवा और चिकित्सक के पुर्जे दिखाईं है। कहा है मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं होने के कारण मां मीणा देवी का गलत तरीके से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया। जिसे रद्द(कैंसिल) करने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि निगम कार्यालय में या किसी पदाधिकारी को मीणा देवी के द्वारा किसी तरह का आवेदन पत्र नहीं दिया है। उन्होंने बताया कि दिलीप कुमार ने अपने द्वारा की गई गलती के लिए माफीनामा कबूल कर लिया है तो मीणा देवी का मृत्यु प्रमाण पत्र निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
… और अंत में
क्या इस गुनाह को कबूल करने के बाद केवल मृत्यु प्रमाण पत्र ही रद्द किया जाएगा। जिन जिन लोगों ने दिलीप कुमार को इस फर्जीवाड़े में में खुलकर साथ दिया, उसके लिए नगर निगम के पदाधिकारी या प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी के पास कोई अधिकार नहीं कि इस मामले में कोई कानूनी प्रक्रिया अपनाएं। ताकि भविष्य में कोई और ऐसी गलती करने से पहले सोचे कि ऐसा करने पर क़ानूनन सजा मिल सकती है।

सरकारी दस्तावेज में फर्जीवाड़ा करना अपराध है इसमे निगम के अधिकारियों को एफआईआर करना है