जीवित मां की मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वाले बेटे के विरुद्ध एफआईआर दर्ज, दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास तक की सजा

Deobarat Mandal

देवब्रत मंडल

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आरोपी पुत्र दिलीप कुमार

गया जी शहर के रहने वाले एक पुत्र फर्जी तरीके से अपनी जीवित मां का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर संपत्ति हड़पने की साजिश रची थी। अब साजिश रचने वाले पुत्र के विरुद्ध पुलिस थाना में कांड दर्ज कर लिया गया है। भारतीय न्याय संहिता की जिन जिन सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है। यदि पुलिस द्वारा जांच में दिलीप के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल कर दी जाती है और न्यायालय से सजा देने के लिए गुजारिश की जाती है तो न्यायालय आरोपित पुत्र को आजीवन कारावास तक की सजा सुना सकती है।

बेटे का इसी मकान पर थी बुरी नजर

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आरोपी की मां के नाम से दर्ज मकान

यह मामला पिछले कई दिनों से मीडिया में सुर्खियों में है। गया जी शहर के गुरुद्वारा रोड गोसाईबाग मोहल्ला निवासी दिलीप कुमार नामक शख्स अपनी मां मीणा देवी के जीवित रहते हुए उनका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में कामयाब हो गया था। इसकी बुरी नजर अपनी मां के नाम से जमीन पर बने मकान पर थी।

पिछले दिनों मीडिया के सामने आई थीं मीणा देवी

दिलीप कुमार की मां मीणा देवी जीवित है और वो रांची में रह रही थी। जो अपने एक और बेटे के साथ पिछले दिनों मीडिया के सामने आई और अपने पुत्र दिलीप के द्वारा रची गई साजिश का खुलासा कर दी। मीडिया के समक्ष मीणा देवी ने कहा था कि वो जिंदा है और उनका बेटा दिलीप फर्जी तरीके से उनका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया है और मकान हड़पने की कोशिश में है।

नगर निगम कार्यालय पहुंचा था मामला

इसके बाद यह मामला गया जी नगर निगम के जन्म-मृत्यु कार्यालय पहुंचा। फर्जी तरीके से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वाला पुत्र निगम में हाजिर हुआ था। उसने अपनी गलती स्वीकार कर ली थी। फिर फ़ाइल की जांच हुई। जांच में यह मामला सामने आया कि सूचक दिलीप कुमार(मीणा देवी का पुत्र)इस साजिश में अपने ससुर, पड़ोसी और वार्ड पार्षद को भी येन केन प्रकारेण शामिल कर लिया। बता दें कि वार्ड नं 17 की पार्षद(अधिसूचक) ने भी लिख कर दे दीं कि मीना देवी का निधन 28.02.2024 को हो चुकी है। जबकि वो जीवित हैं।

गवाह से लेकर वार्ड पार्षद ने झूठी गवाही दी है

गया नगर निगम का कर्मचारी धीरेंद्र कुमार ने दिलीप कुमार द्वारा बताए गए दो गवाह और वार्ड पार्षद(अधिसूचक) के बयानात के आधार पर अपनी रिपोर्ट प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी को सौंपी। एक गवाह शंकर प्रसाद आरोपी के पिता/ससुर ही बताए जा रहे हैं। जबकि बाबू लाल पड़ोसी हैं। इन्हीं सभी की गवाही पर बीएसओ ने प्रमाण पत्र निर्गत करने की अनुशंसा की। इसके बाद गया नगर निगम के जन्म मृत्यु शाखा कार्यालय से जीवित मीणा देवी का मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया गया।

नगर आयुक्त ने एफआईआर दर्ज करवाने का दिए थे निर्देश

जब मामला मीडिया में उछलने लगा तो इस मामले में समय से कांड दर्ज नहीं होने पर नगर आयुक्त कुमार अनुराग ने संबंधित पदाधिकारी व कर्मचारी को इस मामले में कांड दर्ज कराने का निर्देश दिया। जैसा कि चर्चा में है कि नगर आयुक्त जब अवकाश पर से लौटे थे कांड दर्ज करवाने की बात कही। जिसके बाद सिविल लाइन थाना में 03.12.2025 को कांड संख्या 513/25 भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत दर्ज हुआ।

कुछ धाराएं ऐसे हैं जिसमें आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है

BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 319(2)

BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 319(2) किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण करके धोखाधड़ी करने के अपराध से संबंधित है, जिसमें अधिकतम पांच साल तक की जेल और/या जुर्माने का प्रावधान है। इस धारा के तहत अपराध तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत होकर या खुद को कोई और बताकर छल करता है, और यह अपराध उस व्यक्ति के वास्तविक या काल्पनिक होने पर भी लागू होता है।

बीएनएस की धारा 338 (भारतीय न्याय संहिता)

बीएनएस की धारा 338 (भारतीय न्याय संहिता) मूल्यवान प्रतिभूतियों, वसीयत आदि की जालसाजी से संबंधित है। इसमें जानबूझकर धोखाधड़ी के उद्देश्य से जाली दस्तावेज़ बनाने, जैसे शेयर, बॉन्ड, या वसीयतनामा, के लिए सज़ा का प्रावधान है। इस अपराध के लिए आजीवन कारावास या 10 साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है।

निष्पक्ष जांच हुई तो और भी कई आ सकते हैं जद में

…और भी कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जिसके अनुसंधान की जिम्मेदारी उप निरीक्षक अजय कुमार सिंह को दी गई है। फिलहाल आरोपी दिलीप कुमार फरार चल रहा है। वहीं कुछ गवाह भी भागे चल रहे हैं। जानकर बताते हैं कि यदि इसकी निष्पक्ष जांच हुई तो कई और भी इस जांच के जद में आ सकते हैं।

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