गया जंक्शन: एक साहेब कानफाड़ू “शोर” से हैं परेशान, आसपास रहने वाले लोगों में भी “बहरेपन” का सता रहा डर

Deobarat Mandal

देवब्रत मंडल

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भारतीय रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा के लिए उदघोषणा प्रणाली लगाए गए हैं। इस सिस्टम का उद्देश्य यात्रियों के ट्रेनों के आगमन व प्रस्थान की जानकारी दिए जाने से है। साथ ही ट्रेनों के कोच की स्थितियों से यात्रियों को अवगत कराए जाते हैं। समय समय पर ट्रेनों में एसीपी(वैक्यूम) हो जाने की सूचना प्रसारित की जाती है। कई बार किसी रेलकर्मी या सफाई कर्मचारियों को कार्यालय में बुलाए जाने के लिए भी ध्वनि विस्तारक यंत्र(लाउडस्पीकर) का उपयोग करते हुए सुने जाते हैं। कभी कभी तो ट्रेन को स्टार्ट करने के ट्रेन के पायलट और ट्रेन मैनेजर(गार्ड) को डिप्टी एसएस कार्यालय से सूचना दी जाती है कि- “गार्ड एंड ड्राइवर आपकी ट्रेन का सिग्नल(पीली) लोअर है, जल्द ट्रेन को खोलें।”
इन सभी प्रकार की उद्घोषणा प्लेटफॉर्म पर लगे साउंड सिस्टम से एकसाथ प्रसारित किए जाते हैं। जो ट्रेन परिचालन विभाग के कार्यों का हिस्सा होता है। यह नियम भी है। जिसका अनुपालन पूछताछ कार्यालय और डिप्टी एसएस कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा किए जाते हैं।
लेकिन कभी किसी पदाधिकारी को यह देखने की कोशिश करते हुए पाया है कि कितने डेसिबल में ध्वनि का प्रसारण किया जा रहा है? शायद किए भी जाते होंगे लेकिन तय मानक का निरीक्षण न तो एसआईजी ग्रुप द्वारा किया जाता है और शायद न तो इसकी जरूरत महसूस की जा रही है। जिसके परिणाम हैं कि स्टेशन के आसपास बने सरकारी भवनों में रहने वाले पदाधिकारी से लेकर आसपास के मोहल्ले वालों इन दिनों इस कानफाड़ू उद्घोषणा से परेशान हैं।
गया जंक्शन पर कार्यरत खाकी वर्दी वाले पदाधिकारी तो इसके शोर से इतने परेशान हैं कि रात में सो नहीं पाते और दिन में कार्य करने में इस शोर की वजह से असहज महसूस करते हैं।
स्टेशन के आसपास कई मोहल्ले हैं। जहां रहने वाले लोगों का कहना है विकल्प नहीं कि घर छोड़कर दूसरी जगह चले जाएं। कानफाड़ू शोर की वजह से बहरेपन की शिकायत आने लगी है। लोग कहते हैं कि ध्वनि प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। जिसका प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। लोगों का कहना है कि ध्वनि का सुरक्षित स्तर या मानक तय किया गया है। जिसके अनुसार:-

  1. 70-75 dB से कम सुरक्षित स्तर होता है।
  2. 85 dB से अधिक सुनने की क्षमता को स्थायी नुकसान पहुंचता है।
  3. 85 dB (8 घंटे की शिफ्ट) कार्यस्थलों पर ध्वनि की सीमा
    55 dB (दिन)/45 dB (रात) भारतीय आवासीय क्षेत्रों में अनुमेय स्तर है।
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