देवब्रत मंडल

गया जी की पावन धरा पर 06 सितंबर से पितृपक्ष महासंगम 2025 के प्रारंभ होने में कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। जिला प्रशासन द्वारा पितृपक्ष मेला 2025 को लेकर तीन महीने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी गई है। इस बार पिछले साल की तुलना में अधिक तीर्थयात्रियों के आने का अनुमान लगाया गया है। जिसे आधार मानकर तैयारियों को अब अंतिम रूप दिया जा रहा है। मेला अवधि में गया जी में आ रहे एक भी तीर्थयात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
जिला प्रशासन और रेल प्रशासन दोनों कटिबद्ध है कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा में कहीं से कोई चूक नहीं हो। रेल प्रशासन गयाजी जंक्शन पर आने वाले और गया जी से पिंडदान का कर्मकांड कर वापस लौटने वाले तीर्थयात्रियों और सामान्य यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा बलों की तैनाती का प्लान तैयार कर लिया है। ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

एक नजर में गया जी जंक्शन
गया जंक्शन पर प्लेटफॉर्म की संख्या 11 हैं। प्लेटफॉर्म नंबर 1, 1 ए, 1 बी और 1 सी। प्लेटफॉर्म नंबर 2, 3, 4, 5, 6, 7 एवं एक नया प्लेटफॉर्म संख्या 08 है।
एक नजर में फुट ओवर ब्रिज

एक हावड़ा छोर, दूसरा मिडिल तथा तीसरा दिल्ली छोर का फुट ओवर ब्रिज। हावड़ा छोर के फुट ओवर ब्रिज से वर्तमान में सीधे स्टेशन के बाहर आने या बाहर से सीधे विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म पर जाने की सुविधा नहीं है।
निकास व प्रवेश द्वार की कमी

गया जंक्शन पर निकास और प्रवेश द्वार की बात करें तो पूरब दिशा में बाहर से दिल्ली छोर वाले एफओबी को जोड़ती है। एक रास्ता रेल पुलिस इंस्पेक्टर कार्यालय के बगल से है। जिससे आज की तिथि में सर्वाधिक यात्री आना जाना किया करते हैं। इसके अलावा प्लेटफॉर्म संख्या 1/सी के पास आरपीएफ बैरक-सह-सहायक आयुक्त, निरीक्षक कार्यालय के सामने से यात्रियों का आना जाना होता है। जहां रास्ते पर अवैध तरीके से ऑटो रिक्शा और ई रिक्शा चालकों का कब्जा देखने को मिलता है। डेल्हा साइड की बात करें तो इंट्री और एग्जिट गेट है लेकिन यहां पर भी किराए के वाहन चालकों द्वारा अतिक्रमण कर लिया जाता है।
होल्डिंग एरिया के लिए चल रही तैयारी

सबसे बड़ी समस्या इस बार होल्डिंग एरिया को लेकर सामने आ रही है। कारण स्टेशन बिल्डिंग को नए सिरे से निर्माण किया जा रहा है। पिछले दिनों(28 अगस्त) को आए डीएम एवं डीआरएम ने गया जंक्शन का सघन निरीक्षण किया था। होल्डिंग एरिया को लेकर दोनों के बीच चर्चा भी हुई थी। इसके बाद जीआरपी थाने के बगल में बन रहे भवन के तीन बड़े कमरों को होल्डिंग एरिया के लिए चिन्हित किया गया है को बेहतर बनाने का निर्देश केसीपीएल को दिया गया। इसके अलावा पिलग्रिमेज बिल्डिंग में भी यात्रियों के ठहरने के लिए तैयार करने की बात हुई थी। दोनों जगहों पर कार्य तेजी से चल रहा है। इनके लिए प्री-टिकट, पोस्ट-टिकट वाले यात्रियों के लिए जांच के अलावा प्रतीक्षा करने वाले यात्रियों को भी पर्याप्त जगह की जरूरत होगी। प्लेटफॉर्म से बाहर निकलने और बाहर से अंदर आने वाले यात्रियों को भी सुरक्षित पास कराना होगा।
प्रतिदिन 80-90 हजार यात्रियों के आने का अनुमान
एक अनुमान लगाया गया है कि आमतौर पर करीब 45-50 हजार यात्री रेलमार्ग से सफर करने के लिए गया जंक्शन पर आते हैं और मेला अवधि में यह संख्या 80-90 हजार तक रहने का अनुमान लगाया गया है। विशेषकर लंबी दूरी की और स्पेशल ट्रेनों के गया जंक्शन पर आने का समय रात 9 बजे से सुबह 05 बजे तक है। ऐसे में यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करना, उन्हें सुरक्षा प्रदान करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। हालांकि महाकुंभ स्नान के वक्त भीड़ प्रबंधन का अनुभव यहां के रेल प्रशासन को रहा है, जिसका लाभ इस बार के पीपी मेला के दौरान मिल सकता है।
यात्रियों के आवाजाही के कुछ मार्ग पर नजर रखना होगा
गया जंक्शन पर रेलवे ट्रैक को पार कर एक से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने वाले यात्रियों पर कड़ी नजर रखनी पड़ेगी। ट्रेन के अचानक प्लेटफॉर्म बदले जाने की स्थितियों पर नियंत्रण रखना होगा। पूरब दिशा से प्लेटफॉर्म पर आने जाने के लिए फिलहाल बंद किए गए वैकल्पिक मार्ग को चालू करने के साथ पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ेगी। कई जगहों से अनाधिकृत रास्ते भी बना दिया गया है। उसे भी बंद करने होंगे।
कॉन्कोर्स एरिया,प्लेटफॉर्म और खुले क्षेत्रों पर पैनी नजर रखने की जरूरत

गया जंक्शन के पूरब दिशा में और पश्चिम दिशा में(डेल्हा साइड) में कई क्षेत्र या जगह ऐसे हैं, जहां से लोग रेल लाइन पार कर या बगैर जांच के प्लेटफार्म पर पहुंच जाते हैं। कारण की रेलवे स्टेशन पर निर्माण कार्य जारी हैं। वहीं मुख्य प्रवेश द्वार की ओर दिनरात काम किया जा रहा है। यत्र तत्र निर्माण कार्य से संबंधित सामग्रियां पड़ी हुई थी तो उसे भी सुरक्षा घेरे में संरक्षित करने की दिशा में कार्य हो रहा है। प्लेटफॉर्म पर भी नजरें रखने की जरूरत है क्योंकि भीड़ को आज तक परिभाषित नहीं किया जा सका है। कब क्या और किस दिशा में रुख अपना ले कहा नहीं जा सकता है।