देवब्रत मंडल

खबरें केवल वो नहीं होती है जो अधिकारी कहते हैं या बताते हैं। खबरें वो भी होती है जिसके पीछे छिपी हकीकत दिखाई देती है। जो कुछ और बयां करती है। आइए आज ‘मगध लाइव’ कुछ ऐसे ही खबर का पोस्टमार्टम रिपोर्ट आपके सामने रखने की कोशिश कर रहा है। पिछले दिनों डिजिटल इंडिया में ‘मुर्दों ने अंगूठा…’ रिपोर्ट के माध्यम से सच्चाई को सामने रखना चाहा। जो राशन वितरण प्रणाली से जुडी हुई है। इस एक रिपोर्ट के माध्यम से सच सबके सामने लाने की कोशिश की है। अब रेलवे से एक रिपोर्ट आई है जो रेलवे की रिपोर्ट का पोस्टमार्टम रिपोर्ट कहा जा सकता है।

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई
दिनांक 16 फरवरी। साल 2026 और दिन सोमवार। रेलवे के कुछ विभाग के स्थानीय पदाधिकारियों ने अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की। कार्रवाई की तारीफ करनी चाहिए क्योंकि ये काबिले तारीफ़ है। करोड़ों रुपए की रेलवे की जमीन पर से दुकानें, अस्थायी झोपड़ियों और ठेले(चलंत दुकान) हटाए(रिमूव) गए।
रिपोर्ट पर इन सभी के संयुक्त हस्ताक्षर
संयुक्त रिपोर्ट तैयार की गई। इस कार्रवाई में शामिल स्थानीय रेल प्रशासन स्टेशन प्रबंधक, वाणिज्य पर्यवेक्षक (सामान्य), वरीय अनुभाग अभियंता(कार्य) और निरीक्षक प्रभारी आरपीएफ पोस्ट, गया ने अपने अपने विभाग के वरीय अधिकारियों को रिपोर्ट से अवगत कराया। कहें तो ईमानदारी की सबूत पेश करने जैसी बात है। जो लग रहा है कि सीना चौड़ा कर बताया कि हम लोगों ने मिलकर बहुत बड़ा काम कर दिखाया है।

मामला डेल्हा साइड एक नंबर गुमटी से जुड़ा
मामला पूर्व मध्य रेल के डीडीयू मंडल के गया जंक्शन का है। साइड डेल्हा का बताया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि 32 झोपड़ी, 15 दुकानें एवं 11 ठेला को यहां से हटाकर जमीन को अतिक्रमण से मुक्त किया गया। जमीन जितनी मुक्त कराई गई उसका रकबा दो हजार वर्ग मीटर है और इसकी कीमत 5 करोड़ रुपए बताई गई है।
06 जून 2025 को 42 दुकानें हटाई गई थी
कार्रवाई की कागजी रिपोर्ट पर खुश होने वाले स्थानीय प्रशासन को याद करने या रखने की जरूरत है। अब यदि उन्हें याद नहीं है तो ‘मगध लाइव’ याद दिलाने की कोशिश कर रहा है। शायद इससे याद आ जाए। 16 फरवरी 2026 के पहले 06 जून 2025 को इसी जगह पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई थी। उस वक्त जो संयुक्त रिपोर्ट ऊपर तक भेजी गई थी, उसमें मछली, मुर्गा, मीट, सब्जी, फल, चाट, चाय की 42 दुकानें/ठेला हटा दिए जाने की बात कही गई थी।
आठ महीने तक फिर कैसे दुकानें चलती रही
पूर्व की रिपोर्ट भी स्पष्ट रूप से चिल्ला चिल्ला कर कहती है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी और 16 फरवरी की भी रिपोर्ट कह रही है कि अतिक्रमण मुक्त कर दिया गया है। अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि पूर्व की रिपोर्ट में जब दुकानें हटा दिए जाने के दावे किए गए थे तो आखिर फिर आठ महीने तक दुकानें फिर कैसे चलती रही? जबकि 06 जून 2025 की हुई कार्रवाई और 16 फरवरी 2026 को हुई कार्रवाई के बीच उनमें से किसी पदाधिकारी का न तो तबादला हुआ और न दायित्व बदले गए।
क्या आठ महीने में एक बार भी किसी ने विजिट नहीं किया
आठ महीने तक क्या इनमें से कोई एक भी पदाधिकारी डेल्हा साइड गुमटी नंबर एक की तरफ नहीं विजिट किया? यदि नहीं किया गया तो क्यों? और जब किया गया तो दुकानें कैसे चलती रही? यह ताजी कार्रवाई फिर क्यों करने की आवश्यकता पड़ गई? यदि सभी अपने अपने दायित्व तथा कर्तव्यों का निर्वहन ‘ईमानदारी पूर्वक’ नहीं किए होंगे तभी तो फिर से इस जगह पर दुकानें सज धज कर तैयार हो गई होगी।
डीआरएम विजिट के दौरान खुद देख चुके थे तो…
दरअसल, जो अंदर तहखाने से जो खबर आई है कि पिछले दिनों डीडीयू के डीआरएम गया जंक्शन का विजिट करते वक्त ये काले कारनामे को समझ गए थे। दुकानें सजी दिखाई पड़ गई थी और बातें दूर तक चली गई। इसके बाद 16 फरवरी 2026 को एक बार फिर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई मजबूरी बन गई थी।
…और अंत में
मगध लाइव की इस रिपोर्ट पर आपकी क्या राय है, अपनी प्रतिक्रियाओं से अवगत कराते रहेंगे ताकि हमारी टीम आप तक सच से रूबरू करवाते रहें।
