विशेष रिपोर्ट: डिजिटल इंडिया में ‘अंगूठे’ की सेंधमारी? बिना घर से निकले 8 साल की बच्ची ने 8 किमी दूर ‘निकाला’ राशन

Deepak Kumar
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मोहनपुर: बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा मामला गया जिले के मोहनपुर प्रखंड का है, जहाँ तकनीक और सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर गरीबों के निवाले पर डाका डाला जा रहा है। मामला इतना पेचीदा है कि एक 8 साल की बच्ची, जो घर से बाहर तक नहीं गई, उसने 8 किलोमीटर दूर जाकर पॉस (PoS) मशीन पर अंगूठा लगाकर राशन उठा लिया—कम से कम सरकारी रिकॉर्ड तो यही कह रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

फतेहपुर प्रखंड के रघवाचक गांव की निवासी मुन्नी देवी (राशन कार्ड संख्या: 10340220139006110015) पिछले कई सालों से अपने गांव के डीलर से राशन ले रही थीं। जनवरी माह में जब वह राशन लेने पहुँचीं, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। डीलर ने बताया कि उनका राशन पहले ही उठाया जा चुका है।
जब मामले की पड़ताल की गई तो चौकाने वाले तथ्य सामने आए:

screenshot 2026 02 13 21 08 31 11 40deb401b9ffe8e1df2f1cc5ba480b121265783735660691376 विशेष रिपोर्ट: डिजिटल इंडिया में 'अंगूठे' की सेंधमारी? बिना घर से निकले 8 साल की बच्ची ने 8 किमी दूर 'निकाला' राशन
जनवरी माह के राशन उठाव का विवरण
  • रिकॉर्ड के अनुसार: राशन का उठाव मशीन संख्या 123800200152 से हुआ है।
  • सत्यापन: परिवार की सदस्य स्वीटी कुमारी (आधार के अंतिम चार अंक: 2730) के अंगूठे के निशान से ट्रांजेक्शन सफल दिखाया गया है।
  • लोकेशन: यह मशीन गया जिले के ही मोहनपुर प्रखंड के अमकोला गांव के डीलर सुरेंद्र यादव की है, जो मुन्नी देवी के घर से करीब 8 किलोमीटर दूर है।

“मेरी बेटी स्वीटी मात्र 8-11 साल की है। वह कभी घर से बाहर अकेले नहीं जाती, तो 8 किलोमीटर दूर जाकर अंगूठा कैसे लगा सकती है? यह सरासर धोखाधड़ी है।”
— मुन्नी देवी, पीड़ित लाभुक

img 20260213 2201442483789574600161517 विशेष रिपोर्ट: डिजिटल इंडिया में 'अंगूठे' की सेंधमारी? बिना घर से निकले 8 साल की बच्ची ने 8 किमी दूर 'निकाला' राशन
POS मशीन पर स्वीटी कुमारी के आधार संख्या और पारिवारिक सदस्यों का विवरण

बड़े घोटाले की आहट?

यह कोई अकेला मामला नहीं है। पिछले कुछ समय में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ:

  • लाभुक दूसरे राज्य में नौकरी कर रहा है, पर बिहार में उसका राशन ‘अंगूठा लगकर’ उठ गया।
  • इंसान मर चुका है, लेकिन सिस्टम में उसका अंगूठा ‘सजीव’ होकर राशन निकाल रहा है।
  • मशीन कहीं और है और लाभुक कहीं और, फिर भी सत्यापन सफल हो रहा है।

सवाल जो जवाब मांगते हैं:

  • क्या बिना बायोमेट्रिक क्लोनिंग या सिस्टम हैकिंग के यह संभव है?
  • क्या कुछ डीलरों और विभागीय मिलीभगत से ‘रिमोट एक्सेस’ के जरिए फर्जी उठाव हो रहा है?
  • अगर गरीब की शिकायत पर अधिकारी जांच के बजाय पल्ला झाड़ रहे हैं, तो जवाबदेही किसकी है?

सिस्टम की चुप्पी और अधिकारियों की बेरुखी

हैरानी की बात यह है कि मुन्नी देवी न्याय के लिए कई अधिकारियों के पास गई , लेकिन उन्हें कहीं से मदद नहीं मिली। जब हमारे संवाददाता ने इस मामले पर मोहनपुर की प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) सुलेखा कुमारी से संपर्क किया, तो उनका जवाब टालमटोल वाला रहा।
उन्होंने पहले तो सिरे से नकार दिया कि बिना अंगूठा लगाए राशन का उठाव संभव है। लेकिन जब उन्हें याद दिलाया गया कि गया के ही बेलागंज और अन्य इलाकों में ऐसे सैकड़ों मामले (जहाँ मृत या प्रदेश में रहने वाले लोगों के नाम पर राशन उठा लिया गया) सामने आए हैं, तो उन्होंने “मैं देखती हूँ” कहकर फोन काट दिया।

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