देवब्रत मंडल

गया रेल थाना के बहुचर्चित सोना लूटकांड मामले में न्यायिक हिरासत में रहे मोहित अग्रवाल को गया व्यवहार न्यायालय से 19 मार्च को जमानत मिल गई थी लेकिन न्यायालय में जमानत पत्र नहीं जमा किया था। एक जानकारी के मुताबिक सोमवार को न्यायालय में जमानत पत्र जमा किया गया, जिसके बाद इसे न्यायिक हिरासत से बाहर आ आने की उम्मीद है। मोहित अग्रवाल गया बुलियन एसोसिएशन का कोषाध्यक्ष है।
बेल बांड का कानूनी महत्व
बता दें कि जमानत पत्र (Bail Bond) एक कानूनी दस्तावेज़ है, जो किसी आरोपी को जेल से अस्थायी रूप से रिहा करने के लिए अदालत में पेश किया जाता है। यह एक वचन होता है कि आरोपी भविष्य की सुनवाइयों में हाजिर होगा। इसके लिए जमानतदार को संपत्ति या नकद राशि जमा करनी पड़ती है, जो नियम तोड़ने पर जब्त हो सकती है।

मोहित ने पूछताछ में पुलिस को ये बात बताई है
मोहित अग्रवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई पिछले दिनों 21 फरवरी को भी हुई थी। बताते चलें कि छापामारी के दौरान इसी साल जनवरी महीने में मोहित को गिरफ्तार किया गया था। जमानत याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक सिंधु भूषण ओझा ने जमानत का विरोध किया था। सुनवाई प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में हुई थी। इसके घर के कमरा में रखे एक आलमीरा से 41.75 ग्राम सोना बरामद किया गया था। शेष सोना 98 ग्राम के संबंध में उसने पुलिस को बताया था कि सोने से आभूषण तैयार कर ग्राहकों को विक्रय कर दिया था। जिसकी कीमत ₹11,28,000/- (ग्यारह लाख अठाईस हजार रू) का भुगतान प्राप्त किया था। इसी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मोहित अग्रवाल को इस कांड में अप्राथमिकी अभियुक्त पाते हुए गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

न्यायालय से रिमांड पर देने की अपील
इधर, कई दिनों से रेल पुलिस सोना लूटकांड मामले में एक अन्य आरोपी परवेज आलम से पूछताछ के लिए रेल पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। बता दें कि आरोपी परवेज आलम गिरफ्तारी के डर से न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया था। रेल पुलिस के एक वरीय अधिकारी ने बताया कि परवेज आलम और मोहित अग्रवाल दोनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने के लिए न्यायालय से रिमांड पर देने की अपील की गई थी लेकिन इसी बीच मोहित अग्रवाल को न्यायालय से जमानत मिल गई। इसके बाद रेल पुलिस परवेज आलम को रिमांड पर लेने के लिए अपील की है।
आरोपी सभी चार सिपाही उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया
इस कांड में आरोपी बनाए गए गया रेल थाना के सिपाही रहे सभी चारों आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। बता दें कि आरोपी बनाए गए सभी चारो सिपाहियों की भी अग्रिम जमानत याचिका कुछ समय पहले ही खारिज की जा चुकी है। सूत्र बताते हैं कि ये सभी चारों सिपाही इसके बाद हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की गई है।
मामला गया रेल थाना 334/25 से जुड़ा, एक किग्रा सोने की हुई थी लूट
बता दें कि यह मामला गया रेल थाना कांड संख्या 334/25 से जुड़ा हुआ है। जिसमें एक यात्री धनञ्जय शास्वत से करीब एक किलोग्राम सोना लूट लिए जाने से संबंधित है। घटना 21 नंवबर 2025 को हावड़ा-बीकानेर एक्सप्रेस में गया जंक्शन से पहले गया रेल थाना क्षेत्र में हुई थी। इसी मामले में सबसे पहले तत्कालीन रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया था। जिनकी गिरफ्तारी 31 दिसंबर 2025 को हुई थी। जिन्हें 24 जनवरी 2026 को गया व्यवहार न्यायालय से जमानत मिल गई थी।
