संडे स्पेशल:सशक्त स्थायी समिति के सदस्य के पदों के लिए अब वार्ड पार्षद करेंगे मतदान, धर्मेंद्र कुमार ने कहा-बिहार के 850 पार्षदों की हुई जीत, पढ़ें पूरी खबर

Deobarat Mandal

देवब्रत मंडल

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बिहार सरकार ने बिहार गजट (असाधारण), 12 मार्च 2026 के जरिए बिहार नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम, 2026 पारित कर दिया है। बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 (बिहार अधिनियम 11, 2007) में संशोधन करने के लिए अधिनियम। (बिहार अधिनियम सं०-03, 2026)

भारत के संविधान में 74वें संशोधन द्वारा स्थानीय नगर निकायों को शहरी क्षेत्र में स्थानीय प्रशासन के रूप में मान्यता दी गई है। जबकि संविधान में निर्वाचित स्थानीय नगर निकायों को कतिपय कार्य एवं उत्तरदायित्व सौंपा जाने का उपबंध किया गया है।
जबकि 74वें संशोधन के अनुरूप बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 अधिनियमित किया गया है, जिसमें अन्य बातों के होते हुए यह भी उपबंधित है कि संबंधित स्थानीय क्षेत्रों में पंजीकृत मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचन के आधार पर महापौर/उप-महापौर/अध्यक्ष का निर्वाचन किया जाएगा।

जबकि निर्वाचित निकायों द्वारा कार्यों के सुचारू रूप से संचालन हेतु स्थानीय नगर निकायों की सशक्त स्थायी समिति का गठन किया जाना आवश्यक है। जबकि वर्तमान अधिनियम के अधीन सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों को निर्वाचित महापौर/अध्यक्ष द्वारा नामित किया जाता रहा है।
सरकार ने माना कि यह देखा गया है कि वर्तमान अधिनियम के अनुरूप सशक्त स्थायी समिति के गठन के दौरान अनेक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। जैसे कि पक्षपात के आरोप, निर्वाचित पदाधिकारियों में से किसी एक अथवा कुछ व्यक्तियों में अधिकारों का संकेन्द्रण, जिसके परिणामस्वरूप अप्रत्यक्ष रूप से शक्ति एवं उत्तरदायित्व का केन्द्रीकरण होता है, जो कि संविधान द्वारा अभिप्रेत विकेन्द्रीकरण की भावना के प्रतिकूल है।
सरकार ने कहा है कि जबकि यह उपयुक्त एवं आवश्यक प्रतीत होता है कि सशक्त स्थायी समिति के गठन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं न्यायसंगत बनाया जाए तथा इसके लिए उपबंध किया जाए। जबकि कुछ वर्ग के सदस्यों को बैठकों में सम्मिलित होने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है, अतः ऐसे
सदस्यों के संबंध में उपयुक्त उपबंध किया जाना आवश्यक है। जबकि ऐसी आकस्मिक परिस्थितियों के निराकरण हेतु तत्काल उपबंध करना आवश्यक है।
सरकार ने बताया कि अतः अब, 77वें गणतंत्र वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप से अधिनियमित हो।

संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ।

(1) यह विधेयक बिहार नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम, 2026 कहा जा सकेगा।

(2) यह सम्पूर्ण बिहार राज्य में लागू होगा।

(3) यह राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगा।

धारा 12 के उपधारा (3) का संशोधन।

उक्त अधिनियम की धारा 12 की उपधारा (3) में परन्तुक को जोड़ा जाएगा
लोक सभा/राज्य सभा/विधान सभा/विधान परिषद के वैसे सदस्य जो इस नगरपालिका क्षेत्र के स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए हो उन्हें नगरपालिका का सदस्य माना गया है, परन्तु लोक सभा/राज्य सभा/विधान सभा/विधान परिषद के सदस्यों की सत्रावधि में नगरपालिका की बैठक में भाग लेने से छूट प्राप्त होगी। साथ ही नगरपालिका की बैठक में भाग लेने हेतु केन्द्रीय मंत्री एवं केन्द्रीय राज्य मंत्री/राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री/राज्य मंत्री तथा लोक सभा/राज्य सभा/विधान सभा/विधान परिषद के सदस्यों को अपनी व्यस्तता की स्थिति में अपने प्रतिनिधि के रूप में किसी व्यक्ति (अपने निकट संबंधी को छोड़कर) के मनोनयन की भी छूट होगी, परन्तु ऐसे मनोनीत व्यक्ति को मतदान में हिस्सा लेने का अधिकार प्राप्त नहीं होगा।

धारा 21 की उप धारा (3) का संशोधन

धारा-21 की उपधारा (3) के वर्तमान प्रावधान को नयी उपधारा (3) द्वारा निम्न रुप से प्रतिस्थापित किया जाएगा।

नगर निकाय के सशक्त स्थाई समिति के सदस्यों का चयन संबंधित पार्षदों के गुप्त मतदान के द्वारा बहुमत के आधार पर जिला पदाधिकारी के पर्यवेक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण में किया जाएगा, परन्तु इस अधिनियम के प्रवृत्त होने के उपरान्त अधिकतम छः माह की अवधि के भीतर सशक्त स्थायी समिति के गठन हेतु निर्वाचन कराया जाएगा।

विभाग समय-समय पर मतदान की कार्रवाई से संबंधित प्रक्रिया के संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर सकेगा।

धारा 23 के उप धारा (3) का संशोधन। धारा-23 की उपधारा (3) निम्न रूप से प्रतिस्थापित किया जाएगा

यदि सशक्त स्थाई समिति के सदस्यों के पद में कोई आकस्मिक रिक्ति होती है तो ऐसी रिक्ति धारा 21(3) में वर्णित विहित प्रक्रिया के अनुसार चयन किया जाएगा एवं ऐसा पार्षद अपने पूर्वाधिकारी के बचे हुए कार्यकाल तक पद धारण करेगा।

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इस संशोधन पर गया नगर निगम के पूर्व सशक्त स्थायी समिति के सदस्य वार्ड पार्षद धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि इस अधिनियम के प्रभाव में आने से बिहार के सभी नगर निकायों के 850 वार्ड पार्षदों की जीत हुई है। इसके लिए उन्होंने बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री सह उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, पूर्व नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री जीवेश मिश्रा के प्रति आभार व्यक्त किया है।
उन्होंने बताया कि इस संशोधन के लिए लंबी लड़ाई उन्होंने लड़ी, तब जाकर बिहार नगरपालिका अधिनियम में संशोधन विधेयक पारित हुआ है। उन्होंने बताया कि धारा 23 के उप धारा (3) का संशोधन किया गया। जिसे धारा-23 की उपधारा (3) निम्न रूप से प्रतिस्थापित किया गया है।
उन्होंने बताया इसके लिए उन्होंने पूरे भारत के नगर निकायों के अधिनियमों का अध्ययन एवं सर्वेक्षण किया। इसके बाद बिहार सरकार के तत्कालीन नगर विकास एवं आवास मंत्री जीवेश मिश्रा ने इसे विधानसभा के सदन में प्रस्ताव रखा और कैबिनेट की बैठक में पारित किया गया, लेकिन संशोधित प्रस्ताव पर आधिकारिक तौर पर गजट प्रकाशित नहीं हो सका था। इसके बाद वे और पटना नगर निगम के पूर्व डिप्टी मेयर विनय कुमार उर्फ पप्पू तथा वार्ड पार्षद सुनील यादव को साथ लेकर इस लड़ाई को आगे बढ़ाया। बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार के समक्ष इस मुद्दे पर वार्ता के लिए पटना में मिले। उन्हें सारी बातें बताई गई तो उन्होंने इस संशोधन को आवश्यक समझा और इस संशोधन विधेयक को लेकर पहल करते हुए इस मुकाम तक पहुंचाए। वार्ड पार्षद धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि चले तो अकेले और आज बिहार के 850 वार्ड पार्षदों की जीत हुई है।

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