क्या बांटने के लिए लूटे गए ‘सोने के बार’ की कटिंग कराई गई? बिनोद बरनवाल का इकबालिया बयान न्यायालय में दर्ज

Deobarat Mandal

देवब्रत मंडल

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22307 हावड़ा-बीकानेर जोधपुर एक्सप्रेस में राजकीय रेल पुलिस के जवानों द्वारा कथित सोना लूटकांड मामले में गया जी के सर्राफा व्यवसायी बिनोद बरनवाल का बयान 09 जनवरी 2026 को गया व्यवहार न्यायालय के प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट आकाश कुमार के समक्ष पुलिस ने दर्ज कराया है। इसके बाद पटना से आई एसआईटी की टीम उसे अपने साथ ले कर चली गई। बिनोद बरनवाल को एसआईटी की टीम तीन दिन पहले ही हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही थी।  सोना लेकर सफर कर रहे एक यात्री धनञ्जय शाश्वत से 21 नवंबर 2025 को सोना लूट लिया गया था। बिनोद बरनवाल के बयान के बाद इस लूटकांड का मामला अब एक और नया मोड़ ले लिया है।

मोहित अग्रवाल उर्फ गोलू भागा फिर रहा

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मनोज सोनी स्वर्ण व्यवसायी का कूरियर धनंजय शाश्वत के 164 के बयान दर्ज कर लिए जाने के बाद 07 जनवरी को एसआईटी की टीम गया जी के सराफा मंडी से बिनोद बरनवाल नामक एक स्वर्ण कारोबारी को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई थी। जिसकी निशानदेही पर 08 जनवरी को एक बार फिर एसआईटी ने गया रेल थाना और कोतवाली थाना की पुलिस के साथ गया जी के टावर चौक के समीप सराफा मंडी में ‘गोल्ड हाउस’ के मालिक के पुत्र मोहित अग्रवाल उर्फ गोलू को पकड़ने के लिए पहुंची लेकिन गोलू फरार होने में सफल रहा।

शहर से बाहर ले जाकर सोने के बार की कटिंग हुई

बिनोद बरनवाल द्वारा न्यायालय में दर्ज कराए गए बयान के बाद इस बात की चर्चाएं तेज हो गई है कि उसे इस काम के लिए 15 सौ रुपए ही मिले थे। ‘सोने के बार’ की कटिंग गया जी शहर से बाहर ले जाकर कराई गई थी। प्राप्त हो रही सूचना के अनुसार बेलागंज थाना क्षेत्र में इसकी कटिंग हुई। कितने टुकड़े कराए गए इसका खुलासा नहीं हो सका है।

किसके किसके बीच कितना-2 बंटवारा ?

बताया जा रहा है कि ‘सोने के बार’ के कई टुकड़े करवाए गए थे। इसके बाद उन टुकड़ों को कई लोगों के बीच बांटे गए होंगे। किसके किसके बीच ये टुकड़े बांटे गए और फिर उसे बेचा गया या आरोपियों ने अपने अपने पास रख लिए, अब पुलिस इसकी पड़ताल करने में लगी हुई है। क्योंकि अबतक सोना बरामदगी की किसी रेल पुलिस पदाधिकारी की तरफ से कोई अधिकृत बयान सामने नही आया है।

थानाध्यक्ष के बाद अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं

इस कांड में गया रेल थानाध्यक्ष पुलिस निरीक्षक राजेश कुमार सिंह की गिरफ्तारी के अलावा किसी अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस कांड में गया रेल थाना के चार सिपाहियों के अलावा दो सिविलियन गया रेल थाना के वाहन का पूर्व चालक अमन शर्मा उर्फ सीताराम तथा परवेज की तलाश में एसआईटी कई ठिकानों पर छापेमारी कर रही है लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी है।

दो लोग इस कांड में अबतक सरकारी गवाह बन चुके हैं

इस कांड की उच्चस्तरीय जांच शुरू हो जाने के बाद जहां रेल थानाध्यक्ष श्री सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं इस कांड में पीड़ित कूरियर धनञ्जय शाश्वत और बिनोद बरनवाल का पुलिस कोर्ट में इकबालिया बयान दर्ज करा चुकी है। ये दोनों इस कांड में अब सरकारी गवाह बन गए हैं। इन दोनों के बयान इस कांड की जांच को एक नई दिशा दे सकती है।

थानाध्यक्ष के पद पर किसी पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति नहीं

रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह के निलंबन और गिरफ्तारी के बाद किसी दूसरे पुलिस पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति थानाध्यक्ष के पद पर नहीं की गई है। फिलहाल गया रेल थानाध्यक्ष का प्रभार अवर निरीक्षक निशा कुमारी को सौंपा गया है। चर्चा में है कि बहुत जल्द थानाध्यक्ष के पद पर नए पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की जा सकती है।

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