देवब्रत मंडल

गया रेल थाना के बहुचर्चित सोना लूट मामले में आरोपी परवेज आलम से पुलिस अब पूछताछ करेगी। इसके लिए रेल पुलिस ने रेलवे मजिस्ट्रेट के न्यायालय में रिमांड पर लेने के लिए अपील की थी। मंगलवार को जानकारी प्राप्त हुई है कि रेल पुलिस को परवेज आलम से पूछताछ के लिए रिमांड पर लेने का आदेश पारित कर दिया गया है। इस संबंध में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (रेल न्यायालय) के लोक अभियोजक विजय कुमार ने बताया कि परवेज आलम से पूछताछ के लिए रेल पुलिस को रिमांड पर लेने का न्यायालय से आदेश पारित कर दिया गया है। बताया गया कि रेल पुलिस ने पांच दिनों के लिए रिमांड पर लेने के लिए न्यायालय से अनुरोध किया था लेकिन केवल दो दिनों के लिए ही रिमांड पर रखने का आदेश पारित किया गया है। पिछले दो दिनों से पटना रेल मुख्यालय के डीएसपी भास्कर रंजन के नेतृत्व एक टीम इसी प्रयास में यहां मौजूद हैं। संभावना है कि बुधवार को पुलिस परवेज को रिमांड पर लेगी।
परवेज आलम इसी साल फरवरी में किया था आत्मसमर्पण
बताते चलें कि गिरफ्तारी के भय से परवेज आलम ने इसी साल फरवरी माह के अंतिम सप्ताह में (सोमवार) को अपर रेलवे न्यायिक दंडाधिकारी सुशांत सागर के न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। अब रेल पुलिस परवेज आलम से पूछताछ करेगी। इस पूछताछ में कई अहम जानकारी जुटाने का रेल पुलिस प्रयास करेगी।
चारो सिपाही व थाना का पूर्व वाहन चालक अबतक फरार
इस चर्चित सोना लूटकांड में अभी भी रेल थाना के चार सिपाही करण कुमार, अभिषेक चतुर्वेदी, रंजय कुमार व आनंद मोहन व गया थाना का पूर्व चालक सीताराम उर्फ अमन शर्मा फरार चल रहा है। सभी आरोपी सिपाही कुछ दिन पहले अग्रिम जमानत याचिका दायर कर न्यायालय से जमानत की अपील कर चुके हैं लेकिन जमानत नहीं मिली है। इन सभी के खिलाफ 12 जनवरी 2026 को गिरफ्तारी वारंट निर्गत हुआ था।
हावड़ा-जोधपुर एक्सप्रेस में 21 नवंबर को हुई थी लूट
बता दें कि 21 नवंबर 2025 को कानपुर के स्वर्ण व्यवसायी मनोज सोनी का कर्मी धनंजय शाश्वत हावड़ा-बीकानेर जोधपुर एक्सप्रेस से सोना लेकर चल रहा था। ट्रेन के गया जंक्शन के आने के दौरान वह लूट के शिकार हुआ था। जिसका भी पुलिस न्यायालय में इकबालिया बयान दर्ज करा चुकी है। घटना गया रेल थाना क्षेत्र में मानपुर जंक्शन के आसपास हुई थी।
चार सिपाही और दो सिविलियन पर लगे हैं आरोप
आरोप है कि धनंजय से सोना छीनने वाले गया रेल थाना के चार सिपाही व दो सिविलियन थे। ये सभी कोडरमा(क्षेत्राधिकार से बाहर) जाकर ट्रेन में सवार हुए थे और गया जंक्शन आने के पहले धनंजय के साथ मारपीट कर करीब एक किलोग्राम सोना लूट लिया गया था। उस वक्त सोने की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपए आंकी गई थी।
कांड में एसआईटी ने कई डिजिटल साक्ष्य जुटाए हैं
घटना की जानकारी रेल पुलिस के वरीय अधिकारियों तक पहुंचने पर 29 नवंबर को गया रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह के बयान पर चार अज्ञात पुलिसकर्मी व छिनतई का आरोप लगाने वाले धनंजय शाश्वत को संदिग्ध बताते हुए बीएनएस की धारा 309(4) के तहत कांड संख्या 334/25 दर्ज की गई थी। इस कांड में अनुसंधानकर्ता एवं तत्कालीन रेल थानाध्यक्ष को लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। तत्कालीन रेल थानाध्यक्ष को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें बाद में न्यायालय से जमानत मिल गई थी। एसआईटी ने इस कांड के पर्यवेक्षण में कई डिजिटल जुटाते हुए न्यायालय के समक्ष साक्ष्य के तौर पर पेश किया है।
