जगदेव प्रसाद की जीवनी पर बनी बायोपिक, 1932 से 1974 तक के संघर्ष को दिखाया गया
देवब्रत मंडल

गया, 9 मई 2026
‘बिहार लेनिन’ के नाम से चर्चित अमर शहीद जगदेव प्रसाद के जीवन पर आधारित बायोपिक फिल्म ‘द इंडियन लेनिन बाबू जगदेव’ 29 मई को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में बिहार और झारखंड के करीब दो सौ कलाकारों ने अलग-अलग किरदार निभाए हैं।
‘90 प्रतिशत शोषितों के लिए लड़ी आजीवन लड़ाई’: निर्देशक
फिल्म के निर्देशक प्रेम कुमार विद्यार्थी ने बताया कि जगदेव बाबू बिहार में दलित, पिछड़े-अतिपिछड़े, आदिवासी, अल्पसंख्यक समेत 90 प्रतिशत शोषितों के सर्वमान्य नेता थे। शोषित-वंचितों के हक-अधिकार के लिए लड़ते हुए वे कुर्था में शहीद हो गए थे।
जहानाबाद-गया में हुई शूटिंग, 1932 से 1974 तक की कहानी
फिल्म की शूटिंग 2 फरवरी 2023 से जगदेव प्रसाद के गांव कुरहारी समेत जहानाबाद-गया जिले के डुमरिया, इमामगंज, बांकेबाजार के कई गांवों में हुई है। कुछ हिस्सा झारखंड में भी शूट किया गया। फिल्म में 1932 से 1974 तक जगदेव प्रसाद के बचपन से लेकर उनके परिवार, गांव और आसपास घटी घटनाओं को प्रमुखता से दिखाया गया है।
छुआछूत, पंचकठिया प्रथा, वोट चोरी जैसे मुद्दे
फिल्म में उच्च-नीच, छुआछूत, ढोंग, आडंबर, पाखंड, अंधविश्वास, अमीरी-गरीबी, पंचकठिया प्रथा, वोट चोरी और ब्राह्मणवाद को दिखाया गया है। निर्देशक का कहना है कि यह फिल्म युवा, महिला, किसान, बेरोजगार और राजनीति से जुड़े लोगों के इमोशन्स को छूती है।
‘दो साल में छह बार सरकार गिराने-बनाने का रिकार्ड’
फिल्म में जगदेव प्रसाद के राजनीतिक दौर को भी दिखाया गया है। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने दो वर्ष में छह बार सरकार गिराने और बनाने का रिकार्ड कायम किया था। उनके नारे ‘वोट हमारा-राज तुम्हारा’ की चुनौती आज भी प्रासंगिक है।
‘जगदेव बाबू एक आंदोलन थे’
निर्देशक ने कहा कि जगदेव प्रसाद केवल राजनेता नहीं थे, वे स्वयं में एक सक्रिय आंदोलन और प्रखर विचारधारा थे। उन्होंने समाज को शोषक और शोषित दो वर्गों में बांटा और कहा कि जब तक नौकरशाही-राजनीति पर दस प्रतिशत शोषक वर्ग का एकाधिकार रहेगा, नब्बे प्रतिशत शोषितों की मुक्ति संभव नहीं।
दो करोड़ की लागत, स्थानीय कलाकारों को मौका
नेक्सजेन ह्यूमन फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म की लागत करीब दो करोड़ रुपये है। फिल्म निर्माण समिति ने स्थानीय कलाकारों को भी मौका दिया है। कई कलाकार ऐसे हैं जिन्हें पहली बार फिल्म में काम मिला है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में खासा उत्साह है।
