MagadhLive ने उठाया सवाल: सिर्फ खबर नहीं, पीड़ितों को न्याय दिलाने की लड़ाई भी जरूरी, छह महीनों में रेल यात्रियों के साथ कई आपराधिक घटनाएं, लेकिन जवाबों में दिखी वही पुरानी सफाई
देवब्रत मंडल

गया जंक्शन और इसके आसपास रेल यात्रियों के साथ लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं ने एक बार फिर रेलवे प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। MagadhLive की टीम अपने सामाजिक दायित्वों के निर्वहन में एक कदम और आगे बढ़कर न सिर्फ खबरों को सामने ला रही है, बल्कि सामाजिक सरोकारों और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। आखिर केवल खबरें प्रसारित या प्रकाशित करना ही किसी मीडिया संस्थान का दायित्व नहीं है, बल्कि जनहित के मुद्दों पर जवाबदेही तय कराना भी उतना ही जरूरी है।
गया से टाटानगर जा रही महिला यात्री का पर्स कटा, गहने और नकदी उड़ा ले गए बदमाश
इसी कड़ी में गया जंक्शन से टाटानगर के लिए यात्रा शुरू करने वाली एक महिला यात्री के साथ हुई चोरी की घटना ने फिर यह साबित कर दिया है कि स्टेशन और ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। पीड़िता के अनुसार, 30 मई 2026 को वह गाड़ी संख्या 12802 डाउन के जनरल कोच में गया से टाटानगर तक यात्रा कर रही थीं। गया स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ने के दौरान बदमाशों ने ब्लेड से उनके पर्स का निचला हिस्सा काट दिया और उसमें रखे झुमका, लोकेट तथा करीब 2000 रुपये नकद निकाल लिए।
रेल मदद 139 पर शिकायत, टाटानगर पहुंचकर लिखित आवेदन भी दिया
घटना के बाद पीड़िता ने रेलवे की हेल्पलाइन रेल मदद 139 पर शिकायत दर्ज कराई। टाटानगर पहुंचने के बाद उन्होंने वहां लिखित शिकायत भी दी। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सामने आया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो के वायरल होने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आया तथा यात्रियों की सुरक्षा को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी।
DDU प्रशासन का जवाब: CCTV देखा, लेकिन कोई संदिग्ध नहीं मिला
इस मामले में MagadhLive के संवाददाता को डीडीयू प्रशासन की ओर से जो जवाब उपलब्ध कराया गया, उसमें कहा गया कि शिकायत की जांच के दौरान यह पाया गया कि महिला यात्री के साथ घटना गया स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ने के दौरान हुई। प्रशासन के मुताबिक, घटना की सूचना उसी दिन किसी माध्यम से प्राप्त नहीं हुई थी। बाद में ट्विटर शिकायत के माध्यम से सूचना मिलने पर संदिग्ध की पहचान के लिए CCTV फुटेज का अवलोकन किया गया, लेकिन किसी भी संदिग्ध की पहचान नहीं हो सकी।
शिकायत टाटानगर GRP में, गया GRP तक अबतक नहीं पहुंची जानकारी
डीडीयू प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया कि पीड़िता ने घटना के संबंध में GRP/टाटानगर में शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन वह शिकायत अब तक GRP/गया को नहीं भेजी गई है। साथ ही प्रशासन ने यह भी दोहराया कि गया रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा के लिए RPF और GRP की तैनाती रहती है।
सबसे बड़ा सवाल: जब सुरक्षा तैनात है तो फिर यात्रियों का सामान कैसे कट रहा है?
रेलवे प्रशासन का यही जवाब अब सवालों के घेरे में है। यदि गया रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा के लिए आरपीएफ और जीआरपी की नियमित तैनाती रहती है, CCTV कैमरे लगे हैं, निगरानी की व्यवस्था है, तो फिर ट्रेन में चढ़ते वक्त यात्रियों के पर्स ब्लेड से काट लिए जाने जैसी घटनाएं आखिर कैसे हो रही हैं? और यदि घटना के बाद भी किसी संदिग्ध की पहचान नहीं हो पा रही, तो यह सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता नहीं तो और क्या है?
पहले भी उठ चुके हैं सवाल, श्वेता शर्मा का मामला पहुंचा था अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक
यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी गया जंक्शन और उससे जुड़ी रेल यात्राओं में चोरी और आपराधिक घटनाओं के कई मामले सामने आ चुके हैं। इनमें एक प्रमुख मामला अप्रवासी भारतीय महिला यात्री श्वेता शर्मा से जुड़ा था, जिनके साथ 12307 अप में चोरी की घटना हुई थी। वह मामला इतना गंभीर हुआ कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया। MagadhLive ने जब इस मामले में पीड़िता श्वेता शर्मा से अब तक की कार्रवाई के बारे में पूछा, तो उनका सीधा जवाब था—“कुछ नहीं।” यानी अब तक न तो उनके चोरी गए सामान की बरामदगी हो सकी और न ही उन्हें न्याय मिलता दिख रहा है।
