गया जी सीट पर महागठबंधन की नाव मझधार में, सिंबल आ चुका लेकिन कैंडिडेट…

Deobarat Mandal
image editor output image 1701654543 17587731054808166929113223740938 गया जी सीट पर महागठबंधन की नाव मझधार में, सिंबल आ चुका लेकिन कैंडिडेट...

देवब्रत मंडल

महागठबंधन में सीट को लेकर फंसे पेंच में गया जी शहर विधानसभा क्षेत्र की भी सीट फंसी हुई है। गुरुवार की देर रात तक कांग्रेस गया शहरी विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी तय नहीं कर सकी थी। देर रात तक टिकट की आस लगाए बैठे कई नेता बिहार प्रदेश प्रभारी कृष्णा अलावरु के इर्द गिर्द नजरें गड़ाए बैठे हुए थे। बिहार प्रदेश कांग्रेस कार्यालय, सदाकत आश्रम में ‘टिकटार्थियों’ एवं उनके समर्थक टकटकी लगाए रहे लेकिन बंद लिफाफे का राज नहीं खुल सका था। उम्मीद की जा रही है कि आज यानी 17 अक्टूबर को किसी भी वक्त गया शहरी और टिकारी विधानसभा सीट के लिए प्रत्याशी तय कर दिए जाएं।

संभावित उम्मीदवार देर रात तक करते रहे इंतजार

खबर आई है कि महागठबंधन इधर मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी को ऑफर दिया है कि राज्यसभा और दो विधानपरिषद की सीट दी जाएगी। दरअसल एनडीए भी मुकेश साहनी पर डोरे डाल रहा है। लेकिन इस सब के बीच गया शहरी विधानसभा सीट का मामला अटका हुआ है। संभावित उम्मीदवार हर प्रकार के जोर आजमाइश कर रहे हैं लेकिन देर रात तक किसी के हाथ कुछ नहीं लगा है।

देर रात बंद लिफाफे का नहीं खुल सका राज

देर रात कांग्रेस के कुछ नेताओं से magadhlive संपर्क साधते हुए अंतिम निर्णय जानने की इच्छा जताई। किंतु सभी ने कहा कि पार्टी का सिंबल कांग्रेस के बिहार प्रदेश प्रभारी श्री अलावरु जी के पास बंद लिफाफे में आ चुका है लेकिन कैंडिडेट्स फाइनल नहीं हो सका है। लोग इनके पार्टी कार्यालय में आगमन का इंतजार करते रहे। आधी रात तक स्थिति अस्पष्ट थी।

दलित, अतिपिछड़ा और महिला उम्मीदवार के नाम पर होती रही चर्चा

पार्टी सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस गया शहर विस सीट पर उम्मीदवारी तय करने से पहले यह देख रही है कि गया के विधायक डॉ प्रेम कुमार को कैसे मात दिया जा सकता है। महिला उम्मीदवार के नाम पर भी दो लोगों के नाम सामने हैं। वहीं अतिपिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के वोटरों की यहां बहुतायत को देखते हुए कांग्रेस इस पर भी विचार कर रही है। इस वर्ग के वोटरों को कौन कैंडिडेट ज्यादा प्रभावित कर सकता है, इस बात की भी चर्चा हो रही है। कांग्रेस के एक दलित नेता ने कहा कि गया जिले में कांग्रेस को तीन सीट मिले हैं लेकिन किसी दलित नेता को टिकट नहीं दिया जा रहा है, इससे कांग्रेस के समर्थक छोटे बड़े नेता और यह समाज भी नाराज है।

पूर्व प्रत्याशी पर भरोसा करने पर भी विचार

अंदरखाने से एक बात यह भी सामने आ रही है कांग्रेस अपने  पूर्व प्रत्याशी पर भरोसा कुछ ज्यादा कर रही है। इनके समर्थकों का भी यही मानना है कि 2020 के चुनाव में काफी कम अंतर से जीत हार हुई थी तो उन्हें ही टिकट देना उचित रहेगा क्योंकि नए उम्मीदवार पर उतना भरोसा नहीं। वहीं एक बात की चर्चा यह भी हो रही है कि लगातार दो बार पराजित हो चुके कैंडिडेट पर दांव लगाना कांग्रेस की नीति में नहीं है लेकिन पार्टी जीत को आगे रखकर पूर्व प्रत्याशी पर अधिक भरोसा कर रही है।

…और अंत में

कुल मिलाकर महागठबंधन की चुनावी नैया गया जी शहर विधानसभा चुनाव क्षेत्र में आकर मझधार में है। महागठबंधन एनडीए सरकार को फिर से सत्ता में आने से रोकने के लिए कुछ भी न्योछावर करने को तैयार दिखती है।

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