देवब्रत मंडल

कोडरमा-गया रेलखंड पर इस ट्रेन से लकड़ियों के अवैध परिवहन का धंधा चलता रहता है। साथ साथ शराब भी। 04 फरवरी को इस रेलखंड के पहाड़पुर स्टेशन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जो साफ बता रहा है कि यह ट्रेन जिसकी चर्चा ब्लॉगर से कहते सुना जा रहा उस ट्रेन से लकड़ियों के अवैध परिवहन होते हैं। पहाड़पुर स्टेशन धनबाद रेल मंडल अंतर्गत आता है लेकिन यह स्टेशन राजकीय रेल थाना गया अंतर्गत आता है। कोडरमा आरपीएफ पोस्ट का आउटपोस्ट पहाड़पुर स्टेशन पर कार्यरत है। जवान और पदाधिकारी की तैनाती भी है।
स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रहा अवैध कारोबार का मामला
04 फरवरी का वायरल हुआ वीडियो को जितनी बार भी देखेंगे तो आपको रेलवे सुरक्षा बल की संलिप्तता को इस अवैध कारोबार मामले में स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। रेल लाइन से लेकर प्लेटफॉर्म पर हर तरफ लकड़ी ही लकड़ी ही लकड़ी नजर आ रहे हैं जो कि ट्रेन द्वारा लाए ले गए हैं। इस धंधे में शामिल लोगों का एक बड़ा नेटवर्क है जो गुरपा वन क्षेत्र से लेकर गया तक सक्रिय है। इसे संरक्षण कौन दे रहा है ये अब बताने की जरूरत नहीं, क्योंकि वायरल वीडियो के बाद प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है।
कहीं उद्देश्यों से तो नहीं भटक रही रेल
रेलमंत्री और उनके अधीन कार्य करने वाले अधिकारी, पदाधिकारी और कर्मचारियों का एक ही लक्ष्य है और एक ही उद्देश्य- संरक्षा, सुरक्षा और सुविधा का खयाल रखना, लेकिन ये क्या है? ये तीनों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। क्या रेल व्यवस्था से जुड़े लोग अपने उद्देश्यों से तो नहीं भटक रहे हैं।
संगठित गिरोह सक्रिय, माफिया हावी
इस ट्रेन के दैनिक यात्रियों का कहना है कि हर दिन लकड़ियां गुरूपा वन क्षेत्र से काटकर लाई जाती है। जो मानपुर स्टेशन और शहीद ईश्वर चौधरी हाल्ट पर माफिया उतरवा लेते हैं। इसके बाद ठेला या अन्य वाहनों से बाजार तक पहुंच जाते हैं। इस धंधे में शामिल लोगों का एक बड़ा नेटवर्क है। अवैध शराब के भी परिवहन किए जाने की बात विश्वनीय सूत्र बताते हैं।
कुछ दिनों बाद फिर वही ढाक के तीन पात
रेलवे बोर्ड और मंत्रालय तक पहुंचती है बात। पर वही ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ होती नजर आती है। जब कोई वीडियो वायरल होते हैं और मामला ऊपर तक पहुंचता है तो कुछ दिनों के लिए सुरक्षा व्यवस्था में लगे आरपीएफ की सक्रियता दिखाई देती है लेकिन कुछ दिनों बाद ठंडे बस्ते में।
अवैध वेंडर, अवैध शराब और अवैध लकड़ी
यही बात अवैध शराब के परिवहन के साथ है। अवैध वेंडर की वही हालत है। अब तो धनबाद रेल मंडल में रेलवे खुद ट्रेन में यात्रियों की सुविधा के लिए खानपान की सामग्रियों से लेकर दैनिक जरूरत की वस्तुओं की बिक्री के लिए लाइसेंस दे रखा है। लाईसेंसी की संख्या एक ट्रेन में पांच तक सीमित है लेकिन अवैध वेंडरों की संख्या असीमित है। ये भी धंधा संगठित गिरोह के हाथों में है।
ट्रेन परिचालन असुरक्षित महसूस की गई
पहाड़पुर स्टेशन पर लकड़ियों के अवैध खेल का चित्रण करता वायरल वीडियो भी अधिकारियों तक पहुंच गई है और प्रशासन से इसे सुरक्षित ट्रेन परिचालन के लिए खतरा मानता है। साथ ही यात्रियों की जान के लिए भी खतरनाक मान रहा है। इस तरह की घटना रेल मंत्रालय के लिए एक जांच का विषय हो सकता है लेकिन लाखों लोगों(यात्रियों) के लिए तो जान आफत में डालने के समान ही मानी जा सकती है।
सीनियर कमांडेंट फोन रिसीव करना उचित नहीं समझे
इस वायरल हो रहे वीडियो पर जब धनबाद रेल मंडल के वरिष्ठ सुरक्षा आयुक्त से उनके सरकारी मोबाइल नंबर पर डायल कर उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए कॉल किया गया तो घन्टी बजती रही, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया, इस वजह से उनका पक्ष नहीं सामने आया कि आखिर इसके लिए जिम्मेवार कौन हैं या आगे की क्या कार्यवाही की गई है?
