बहुचर्चित सोना लूटकांड मामले में एक आरोपी ने किया आत्मसमर्पण, भेजा गया जेल, अबतक केवल दो गिरफ्तार, बाकी फरार

Deobarat Mandal

न्यूज़ डेस्क

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File photo

गया रेल थाना के बहुचर्चित सोना लूट मामले में आरोपी परवेज आलम गिरफ्तारी के भय से सोमवार को रेलवे न्यायिक दंडाधिकारी सुशांत सागर के न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया है। विशेष लोक अभियोजक विजय कुमार ने बताया कि इस मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के आदेश पर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सोना लूटकांड में अभी भी रेल थाना के चार सिपाही करण कुमार, अभिषेक चतुर्वेदी, रंजय कुमार व आनंद मोहन व गया थाना का पूर्व चालक सीताराम उर्फ अमन शर्मा फरार चल रहा है। सभी आरोपी सिपाही कुछ दिन पहले अग्रिम जमानत याचिका दायर कर न्यायालय से जमानत की अपील कर चुके हैं लेकिन जमानत नहीं मिली है। इन सभी के खिलाफ 12 जनवरी को गिरफ्तारी वारंट निर्गत हुआ था।

हावड़ा-जोधपुर एक्सप्रेस में लूट की हुई थी घटना

बता दें कि 21 नवंबर 2025 को कानपुर के स्वर्ण व्यवसायी मनोज सोनी का कर्मी धनंजय शाश्वत हावड़ा-बीकानेर जोधपुर एक्सप्रेस से सोना लेकर आने के दौरान लूट के शिकार हुआ था। घटना गया रेल थाना क्षेत्र में मानपुर जंक्शन के आसपास हुई थी। धनंजय से सोना छीनने वाले गया रेल थाना के चार सिपाही व दो सिविलियन थे। ये सभी कोडरमा(क्षेत्राधिकार से बाहर) जाकर ट्रेन में सवार हुए थे और गया जंक्शन आने के पहले धनंजय के साथ मारपीट कर करीब डेढ़ करोड़ रुपए का सोना छीन लिया था।

कांड में एसआईटी ने कई डिजिटल साक्ष्य जुटाए हैं

घटना की जानकारी रेल पुलिस के वरीय अधिकारियों तक पहुंचने पर 29 नवंबर को गया रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह के बयान पर चार अज्ञात पुलिसकर्मी व छिनतई का आरोप लगाने वाले धनंजय शाश्वत को संदिग्ध बताते हुए बीएनएस की धारा 309(4) के तहत कांड संख्या 334/25 दर्ज की गई थी। इस कांड में अनुसंधान कर्ता  एवं तत्कालीन रेल थानाध्यक्ष को लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। एसआईटी ने इस कांड के पर्यवेक्षण में कई डिजिटल जुटाते हुए न्यायालय के समक्ष साक्ष्य के तौर पर पेश किया है।

पर्यवेक्षण में बीएनएस की धारा किया गया था परिवर्तित

मामला हाईप्रोफाइल होने पर तत्कालीन रेल पुलिस अधीक्षक पटना ने एसआईटी गठित कर मामले की जांच कराई। इसमें चार सिपाहियों करण कुमार, अभिषेक चतुर्वेदी, रंजय कुमार व आनंद मोहन एवं दो सिविलियन परवेज आलम व रेल थाना का पूर्व चालक सीताराम सहित रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह की भी संलिप्तता पाई गई। इसके बाद कांड संख्या 334/25 को पर्यवेक्षण में परिवर्तित धारा 309/308/351/61/281/197/107/3(5) बीएनएस एवं 7/13(2) प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 संशोधित अधिनियम 2018 के अंतर्गत सत्य पाया गया।

डीएसपी ने बताया आत्मसमर्पण की मिली है जानकारी

एसआईटी की जांच रिपोर्ट के बाद त्वरित कार्रवाई कर थानाध्यक्ष व चारों सिपाही को निलंबित कर दिया गया। वहीं थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। जो जमानत पर जेल से बाहर हैं, लेकिन चारों सिपाही व एक सिविलियन फरार चल रहे हैं। इस संबंध में पटना रेल पुलिस मुख्यालय के उपाधीक्षक भास्कर रंजन ने magadhlive को बताया कि परवेज आलम द्वारा आत्मसर्मपण किया गया है, इस बात की जानकारी मिली है। जिसे पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया जाएगा।

स्वर्ण व्यवसायी मोहित अग्रवाल अभी भी जेल में है

बता दें कि रेल डीएसपी भास्कर रंजन के नेतृत्व में एसआईटी की टीम गया सराफा मंडी के कारोबारी मोहित अग्रवाल उर्फ गोलू को उसके घर से गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जिसकी जमानत याचिका पर अंतिम रूप से कोई निर्णय(फैसला) नहीं हो सका है। अगली सुनवाई की तिथि 28 फरवरी को निर्धारित की गई है। मोहित ने पुलिस को अपने स्वीकारोक्ति बयान में लूट के सोने के क्रय किए जाने और बिक्री कर दिए जाने की बात कही है।

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