प्यास बुझाने वाला चापानल बना ‘जुगाड़ बेंच’, गर्मी में व्यवस्था पर सवाल

Deobarat Mandal

देवब्रत मंडल


बागेश्वरी मोहल्ले में खराब पड़ा चापानल बना बैठने की जगह, जल संकट के बीच प्रशासन की अनदेखी उजागर

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गया: भीषण गर्मी में जहां एक ओर लोगों को पीने के पानी के लिए जूझना पड़ रहा है, वहीं गया शहर के बागेश्वरी मोहल्ले में एक चापानल अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। कभी राहगीरों और स्थानीय लोगों की प्यास बुझाने वाला यह चापानल अब खराब होकर बेकार पड़ा है।

समाधान का अजब रास्ता निकाल लिया

स्थानीय लोगों ने भी इस समस्या का समाधान अपने तरीके से निकाल लिया है। चापानल के ऊपरी हिस्से पर एक लकड़ी की पटरी रखकर और उसे बोल्ट-नट से कसकर अब इसे बैठने की जगह बना दिया गया है। यानी जो कभी पानी देता था, आज ‘बेंच’ बनकर रह गया है।

व्यवस्था पर उठे सवाल

यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। जिला प्रशासन और नगर निगम द्वारा शहर में कई जगहों पर प्याऊ की व्यवस्था जरूर की गई है, लेकिन ऐसे बंद पड़े चापानलों की मरम्मत की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इन चापानलों को ठीक कर दिया जाए, तो लोगों को राहत मिल सकती है। लेकिन न तो प्रशासन ने इस दिशा में पहल की है और न ही जनप्रतिनिधियों ने बंद पड़े चापानलों की सूची बनाकर इसे प्राथमिकता दी है।

गर्मी में बढ़ी परेशानी

गर्मी के इस मौसम में पानी की जरूरत सबसे ज्यादा होती है। ऐसे में सार्वजनिक जल स्रोतों का बंद होना आम लोगों की परेशानी को और बढ़ा देता है।

बड़ा सवाल

बागेश्वरी मोहल्ले का यह ‘जुगाड़ बेंच’ सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का प्रतीक बन चुका है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस ओर कब ध्यान देता है और लोगों को उनका ‘पानी देने वाला चापानल’ वापस मिल पाता है या नहीं।

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