देवब्रत मंडल

गया जी। आदर भाव से बिहार सरकार ने यह नया नाम दिया। यहां गौतम को ज्ञान मिला। पितरों को यहां मिलती है मुक्ति। आदिशक्ति पालनपीठ के रूप में यहां मां मंगला विराजमान हैं। भगवान श्रीविष्णु के चरण यहां पड़े। ऐसे कई स्थान हैं जो वंदनीय हैं। यहां श्री राम, लक्ष्मण और माता सीता भी आए। दुनियां भर से भगवान बुद्ध का दर्शन करने के लिए बौद्ध धर्मावलंबियों का आना जाना लगा रहता है। कितनी पावन धरा है गया जी, जिसका आख्यान वेद पुराण में मिलते हैं। सूफ़ी संतों की भी पावन भूमि है गया जी।
सड़क मार्ग, रेलमार्ग और हवाई मार्ग से जुड़े होने के कारण यहां सालों भर सैलानियों का आना जाना लगा रहता है। देश-विदेश से सभी धर्मों के लोगों का गया जी आदरपूर्वक स्वागत करता है। संपूर्ण जिले में सुरक्षा के दृष्टिकोण से व्यापक रूप से इंतेजाम किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था यहां काफी सुदृढ़ है। इन सभी की कोशिशें जारी है कि कहीं भी किसी जनमानस के साथ कोई अप्रिय घटना घटित नहीं हो। काग चेस्टा, बको ध्यानं, स्वान निंद्रा के मूल अवधारणा के तहत सभी सजग प्रहरी के रूप में कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं।
लेकिन इतना सब कुछ होने के बावजूद अवैध मादक पदार्थों के तस्कर, प्रतिबंधित जीव जंतुओं के तस्कर गया जी में अपना पांव पसार रहे हैं। चाहे सड़क मार्ग हो, चाहे रेलमार्ग या फिर हवाई मार्ग। इन रास्तों से तस्करी करने से बाज नहीं आ रहे। इसके एक नहीं सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों व लाखों उदाहरण हैं। जितनी भी सुरक्षा एजेंसियां यहां कार्य कर रही है। इनके कार्यालयों के सरकारी दस्तावेजों पर गौर फरमाएंगे तो हकीकत सामने आ जायेगी कि तस्करों ने गया जी को अपने अपने हब के रूप में स्थापित कर दिया है।
ताजा उदाहरण रेलमार्ग से प्रतिबंधित मादक पदार्थ गांजा को ही ले लें। नेपाल से गांजा लेकर एक तस्कर गया जंक्शन पर लेकर आ गया। गया जी तक इसे लेकर आने वाले तस्कर को बीच रास्ते में किसी ने नहीं पकड़ सका। पकड़ा गया तो गया रेलवे स्टेशन पर। यह अच्छी बात है कि गया जंक्शन पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को इसकी भनक लग गई और तस्कर पकड़ा गया। इसके पहले भी वन्य जीव प्राणी, शराब, गांजा, आर्म्स, सोना, नोट, विदेशी सामान आदि पकड़े गए हैं।
जिला पुलिस बल, सीआईएसएफ, एसएसबी, सीआरपीएफ द्वारा हथियार, शराब, गांजा, अफीम, डोडा, सोना चांदी, नकली आर्म्स बनाने की फैक्ट्री का उदभेदन करते रहे हैं। नामी गिरामी नक्सलियों की गिरफ्तारी से लेकर आत्मसमर्पण कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अवैध बालू परिवहन और अवैध शराब निर्माण व इसकी बिक्री पर अंकुश लगाने के किस्से तो रोज सुनने और देखने को मिल रहे हैं।
बिहार में शराबबंदी कानून 2016 से लागू है। तब से लेकर आजतक इसके अवैध कारोबार में संलिप्त लोगों का एक बड़ा नेटवर्क है। जो पड़ोसी राज्य झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, नई दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश से हर दिन शराब की छोटी बड़ी खेप गया जी में लेकर आ रहे हैं। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था में जुटे कर्मियों के भी अपने अपने सूत्र हैं। जिनकी सूचना पर कार्रवाई हर दिन हो रही है लेकिन अबतक इस गिरोह के नेटवर्क को ध्वस्त करने में कोई भी एजेंसी पूर्णतः सफल नहीं हो पाई है। हाल की ही घटना सामने आई है कि गया जी के मेयर के सरकारी और निजी अंगरक्षक भारी मात्रा में शराब के साथ गया जी शहर में ही पकड़े गए थे।
अंत में, इस तरह की घटनाओं को एक कड़ी में जोड़ कर देखें तो यह कहना अतिश्योक्ति नहीं है कि गया जी तस्करों के लिए सुरक्षित हब बनता जा रहा है?
