बिहार और झरखण्ड के करीब दो सौ कलाकारों ने निभाया है अलग-अलग राॅल
देवब्रत मंडल

गया जी।
अमर शहीद जगदेव प्रसाद की जीवनी पर आधारीत बायोपिक फिल्म की भारत के सिनेमाघरों में रिलीज किया गया । इसकी जानकारी देते हुए फिल्म के निर्देशक प्रेम कुमार विद्यार्थी ने बताया कि बिहार, झारखण्ड, मुंबई समेत देश के पांच दर्जन सिनेमा घरों में रिलीज कि गई.
The indian lenin Babu Jagdeo हिंदी फ़िल्म का उद्घाटन कला एवं संस्कृति युवा विकास मंत्री डॉ प्रमोद कुमार ने फीता काटकर किया. इस मौके पर फ़िल्म के निर्देशक प्रेम कुमार विद्यार्थी, क्रिकेटर शोएब खान, गुरुआ विधायक उपेंद्र प्रसाद, जगदेव बाबू के सुपुत्र भाजपा नेता नागमणि समेत हजारों कि संख्या में लोग मौजूद थे।
जगदेव बाबू के बिहार में सर्वमान्य नेता के रूप में बड़ा नाम है, वे दलित, पिछड़े- अतिपिछड़े, आदिवासी, अल्पसंख्यक समेत 90 प्रतिशत शोषितों के लिए आजीवन लड़ाई लड़ी। शोषित और वंचितों के हक-अधिकार के लिए लड़ाई लड़ते – लड़ते हुए कुर्था में शहीद हो गये थे। जिनपर 2 फरवरी 2023 से उनके गांव कुरहारी, धराऊत समेत जहानाबाद-गया जिला के पोखरपुर, डुमरिया, इमामगंज गुरिया तथा बांकेबाजार के कई गांव में शूटिंग की गई थी। कुछ भाग को झारखंड में भी शूट किया गया। फ़िल्म में सामाजिक, राजनीतिक, गरीबी और गांव में 1932 से लेकर 1974 तक की घटित जगदेव प्रसाद जी कि बचपन से लेकर उनके स्वयं, आस पास, परिवार गांव के लोगों के साथ घटित घटनाओं को प्रमुखता से फिल्माया गया है। जिसमें अपनी संस्कृति सभ्यता और उच्च-नीच, छूआ-छूत, ढ़ोंग, आडंम्बर, पाखंड, अंधविश्वास, छल- कपट, अमीरी-गरीबी, पंचकठिया प्रथा, वोट चोरी और ब्रहा्रणवाद को दिखाया गया है। यह फिल्म युवा महिला, किसान, बेरोजगार, भारतीय राजनीति से जुड़े नेता, अभिनेता, सभी वर्ग समुदाय के लोगों की इमोसन्स को टच करता है जिसे हर लोगों में यह फिल्म को सिनेमाघरों में आने का उत्साह है जिसे आते हीं लोग सिनेमा देखने के लिए टूट पड़े। क्योंकि मार घाड़ एक्सन और डायलाॅग के साथ साथ सामाजिक, राजनीतिक और सच्ची घटना पर यह आधरित फिल्म है जिसमें बिहार की राजनीति जुड़ी है। जगदेव प्रसाद जी द्वारा अपनी राजनीति दौर में दो वर्ष में छः बार सरकार गिराने और बनाने का रिकार्ड है जिन्हें भारत की राजनीतिक गुरू और उनके बताये मार्ग पर चलकर बिहार एवं अन्य राज्यों में राजनीति के शीर्ष पर बैठै हैं।
नेक्सजेन हूमन फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म की लागत करीब दो करोड़ है। इस फिल्म में स्थानीय कलाकारों को भी फिल्म निमार्ण समिति ने जगह दी है। जिसको लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। कई कलाकार इसमें ऐसे हैं जिन्हें फिल्म में पहली बार जगह मिली है।
