देवब्रत मंडल

गया। रेल यात्रियों की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ट्रेनों पर लगातार हो रही पत्थरबाजी की घटनाओं ने आम यात्रियों के बीच भय का माहौल पैदा कर दिया है। हालात यह हैं कि यात्रा के दौरान जहां यात्री खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, वहीं कई बार ट्रेन के देर तक खड़े रहने से नाराज यात्री ही गुस्से में आकर हिंसक प्रतिक्रिया दे रहे हैं। ताजा मामलों में ट्रेन चालक दल भी यात्रियों के आक्रोश का निशाना बनते दिखे, हालांकि राहत की बात रही कि इस दौरान चालक दल सुरक्षित बच गया।
हाल के दिनों में प्रीमियम ट्रेनों से लेकर मेल, एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों तक पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आई हैं। कुछ मामलों में आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी भी की गई है, लेकिन कई घटनाओं में अब तक पुलिस के हाथ खाली हैं।

डीडीयू रेल मंडल में शनिवार रात दो अलग-अलग घटनाएं
शनिवार रात दो ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आईं। पहला मामला मानपुर स्टेशन का है, जहां ट्रेन संख्या 53403 रामपुर हाट-गया पैसेंजर को करीब डेढ़ घंटे तक रोके जाने से नाराज एक यात्री ने इंजन पर पत्थर फेंक दिया। इस घटना में इंजन का लुकिंग ग्लास क्षतिग्रस्त हो गया। जानकारी के अनुसार, राजधानी एक्सप्रेस और मालगाड़ियों को पास कराने के लिए पैसेंजर ट्रेन को लंबे समय तक रोका गया था, जिससे यात्रियों में आक्रोश फैल गया। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने इस मामले में अज्ञात यात्री के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जबकि मानपुर में आरपीएफ के अधिकारी और जवानों की तैनाती रहती है। बावजूद घटना को रोक नहीं सके।
पटना-सिंगरौली एक्सप्रेस में भी तोड़फोड़ दूसरी घटना
13350 पटना-सिंगरौली एक्सप्रेस से जुड़ी है। यह ट्रेन रात करीब 11:32 बजे गया-डीडीयू रेलखंड के गुरारू स्टेशन पहुंची, जहां ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ जवान ने ए-1 कोच की दो खिड़कियों के शीशे टूटे हुए पाए। सूचना मिलते ही संबंधित पोस्ट और मंडल को अलर्ट किया गया।
डेहरी-ऑन-सोन पहुंचने पर हुई जांच शुरू
ट्रेन के डेहरी-ऑन-सोन स्टेशन पहुंचने पर जांच की गई, लेकिन जिस बर्थ के पास शीशा टूटा था, वहां के यात्री को घटना की कोई जानकारी नहीं थी। यात्री ने बताया कि खिड़की पर पर्दा लगा था और वह सो रहा था, इसलिए उसे पत्थरबाजी का पता नहीं चला। कोच अटेंडेंट और टीटीई को भी घटना की जानकारी नहीं थी।
रेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल कर दिए
बढ़ती घटनाएं, बढ़ती चिंता लगातार हो रही इन घटनाओं ने रेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां बाहरी तत्व ट्रेनों को निशाना बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यात्रियों का गुस्सा भी हिंसक रूप लेता दिख रहा है। रेल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है कि ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जाए, ताकि यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
‘अशर्फी की लूट और कोयले पर छाप’
धनबाद-गया-डीडीयू रेलखंड पर आए दिन शराब, मादक पदार्थ, वन्य जीव प्राणियों, सोने की तस्करी हो रही है। आरपीएफ और जीआरपी के जो इन दिनों ‘कारखास’ बने हैं, वे इसकी सूचना दे देते हैं, जंक्शन पर ट्रेन आते ही या ट्रेन से उतर जाने पर पकड़ लिए जाते हैं लेकिन यात्रियों के साथ गया जंक्शन पर हो रही आपराधिक घटनाओं के तह तक जाने में कई दिन लग जाते हैं जो एक अहम सवाल खड़े करते दिखाई देता है। राजधानी एक्सप्रेस, जोधपुर एक्सप्रेस, बीकानेर एक्सप्रेस में लूट और चोरी की हाल की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के सटीक उदाहण हैं। लोग कहने लगे हैं कि ‘अशर्फी की लूट और कोयले पर छाप‘ वाली कहावत यहां चरितार्थ हो रही है।
