देवब्रत मंडल

मॉनसून से पहले सफाई के नाम पर बाल श्रम कानून की खुलेआम धज्जियां, सेफ्टी किट तक नहीं
गया, 24 मई 2026
कहते हैं तस्वीर झूठ नहीं बोलती। Magadhlive के कैमरे में कैद तस्वीरें गया नगर निगम के उस संवेदनहीन चेहरे को उजागर कर रही हैं जहां अबोध बालकों से नाले-नालियों की सफाई का काम कराया जा रहा है। बाल श्रम कानून की रक्षा का ढोल पीटने वाली व्यवस्था के नुमाइंदे ही खुलेआम इस अपराध को अंजाम दे रहे हैं।
कैसे हो रहा है यह अपराध?

जानकारी के अनुसार, गया नगर निगम में मॉनसून से पहले नाले-नालियों की सफाई का काम तेजी से चल रहा है। इसके लिए निविदा प्रक्रिया हुई है जिसमें मानव बल की संख्या निर्धारित है। लेकिन जमीन पर नजारा कुछ और है।
वार्ड नं. 17 समेत गया के कई वार्डों में नालियों की सफाई में एक नहीं, कई बालक अपनी जान जोखिम में डालकर उतारे गए हैं। सफाई का काम जमादार की निगरानी में हो रहा है। मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी स्वास्थ्य पदाधिकारी की है। काम पूरा होने की रिपोर्ट के बाद भुगतान फाइल पर अंतिम हस्ताक्षर नगर आयुक्त करेंगे।
सवाल उठता है
इन बालकों को इस खतरनाक काम में किसने लगाया? प्रत्यक्ष रूप से ठेकेदार, लेकिन आंख मूंदकर भुगतान करने-कराने वाले जिम्मेदार अधिकारी भी उतने ही दोषी हैं।
बाल श्रम कानून और सुरक्षा नियमों की धज्जियां

यह सीधा-सीधा बाल श्रम कानून का उल्लंघन है। दूसरी और गंभीर बात यह कि इन बच्चों को कोई सेफ्टी किट भी नहीं दी गई है। नियम कहता है कि डेंजरस काम करने वाले मजदूरों को हैंड ग्लव्स, जूते, मास्क आदि अनिवार्य रूप से दिए जाएं। लेकिन यहां इसका भी अनुपालन नहीं हो रहा।
अब क्या होगा?

खबर प्रकाशित होने के बाद उम्मीद है कि नगर निगम प्रशासन हरकत में आएगा। आनन-फानन में कार्रवाई कर दामन पर लगे दाग को छिपाने की कोशिश होगी। लेकिन सवाल बरकरार है:
क्या बाल श्रम कानून गया नगर निगम में कोई मायने नहीं रखता? या सभी की आंखों पर नोटों का पर्दा चढ़ा दिया गया है?
Magadhlive ने सच को सामने लाने के लिए मजबूरन तस्वीरें प्रकाशित की हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन जवाबदेही तय करता है या फिर लीपापोती कर मामले को दबा देता है।
