पानी की समस्या, चापाकल मरम्मत इत्यादि की समस्या होने पर जिला नियंत्रण कक्ष के दूरभाष संख्या 0631 2222253, 06312222259 पर कॉल करें

Deobarat Mandal

देवब्रत मंडल

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गया, 20 मई 2026, अत्यधिक गर्मी एवं संभावित लू के प्रकोप/ हीट वेव से आम जनमानस को बचाव, सभी क्षेत्रों में सुचारू जलापूर्ति, जिले में संभावित बाढ़ एवं संभावित सुखाड़ की स्थिति होने पर पूर्व से की जाने वाली तैयारी के संबंध में सभी विभागों के पदाधिकारी के साथ जिला पदाधिकारी गया शशांक शुभंकर की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में बैठक आयोजित की गई। बैठक में विधायक अतरी, विधायक गुरुआ एवं जिले के अन्य विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रतिनिधि, विधान परिषद के प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित रहे।
कार्यपालक अभियंता phed ने बताया कि वर्ष 2025 में भूगर्भ जलस्तर 35.30 फिट था, इस वर्ष जलस्तर 36.47 फिट है। चापाकल मरामाती के संबंध में बताया गया कि जिले में 3445 चापाकल की मरामाती की जा चुकी है। वैसे टोल जहां पानी की अत्यंत समय साइन देखी गई है उन पंचायत की सूची के अनुसार 144 नए चापाकल लगाए गए हैं।
जिला पदाधिकारी ने बताया कि छुटे हुए टोलो में जलापूर्ति सुचारू रखने के लिए 543 नई स्कीम लिया गया है। इन स्कीम के माध्यम से बोरिंग कराते हुए स्टैंड पोस्ट लगाकर सीधे पानी पहुंचाने का काम किया जा रहा है ताकि गर्मी के मौसम में पानी की असुविधा नहीं हो सके, लोगों को निर्बाध पानी मिलता रहे।
जिला पदाधिकारी ने बताया कि जिला पंचायत राज पदाधिकारी के माध्यम से पंचायत में नल जल योजनाओं का भौतिक जांच करवाया गया कल 2480 योजना में 2195 योजना चालू पाई गई तथा 285 नल जल योजना बंद पाई गई। बंद सभी योजना को अगले तीन दिनों में चालू करवाने का सख्त निर्देश दिए हैं साथ ही सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि अपने प्रखंड के सभी क्षेत्रों में नल जल योजना का स्थिति का लगातार जांच करेंगे। जिला पदाधिकारी ने यह भी बताया कि 25 मई से 2 जून तक हीट वेव का पूर्वानुमान है, इसे ध्यान में रखते हुए किसी भी टोले में पानी की समस्या नहीं हो, आम जनता को पानी आपूर्ति में कोई दिक्कत नहीं हो, इसका पूरा ध्यान रखते हुए पानी आपूर्ति सुचारू रखें।
कार्यपालक अभियंता पीएचईडी शेरघाटी ने बताया कि शेरघाटी डिवीजन में 341 स्कीम लिए गए हैं जो पूर्व से छूटे हुए टोला एवं जल संकट वाले टोला थे, 395 स्थान पर पाइपलाइन बिछाने का काम पूर्ण कर लिया गया है, 1662 की संख्या में चापाकल मरामाती की जा चुकी है।
अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि भीषण गर्मी को देखते हुए जिस क्षेत्र से भी टैंकर की मांग की जा रही है तुरंत ही टैंकर मुहैया कराया जा रहा है वर्तमान समय में जिले में 68 स्थान पर टैंकर के माध्यम से पानी आपूर्ति की जा रही है जिसमें नगर निगम गया द्वारा 32 टैंकर के माध्यम से विभिन्न शहरी क्षेत्र में जलापूर्ति सुचारू रखी जा रही है इसके अलावा शेरघाटी बोधगया फतेहपुर डोभी किधर सराय में टैंकर से पानी आपूर्ति दी जा रही है उन्होंने बताया कि जिला नियंत्रण कक्ष के माध्यम से वामन शिकायतें पानी की समस्या से संबंधित प्राप्त हुए थे जिनका निपटारा किया जा चुका है।
जिला पदाधिकारी ने कंट्रोल रूम का नंबर जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि किसी भी क्षेत्र में पानी की समस्या चापाकल मरामाती इत्यादि की समस्या होने पर जिला नियंत्रण कक्ष के दूरभाष संख्या 0631 2222253, 06312222259 पर कॉल करके अपनी समस्या को बता सकते हैं, सभी शिकायतो को संधारित कर समाधान किया जा रहा है, साथ ही फॉलो अप भी लिया जा रहा है।
इसके पश्चात बाढ़ एवं सुखाड़ की स्थिति में कृषि विभाग ने बताया कि डीजल अनुदान, फसल क्षति, आकस्मिक फसल इत्यादि के लिए तैयारी कर ली गई है। पशुपालन पदाधिकारी ने बताया कि पशु चारा के लिए दर का निर्धारण कर ली गई है। पशु दवा की पूरी उपलब्धता है, 57 पशु अस्पताल जिले में मौजूद है, 43 प्रकार की पशु की दवाएं उपलब्ध है, राहत शिविर के लिए 72 स्थान को चिन्हित कर लिया गया है, पशुओं के लिए कैटल ट्रफ 27 स्थान में से 21 स्थान पर फंक्शनल है।
हीट वेव की समीक्षा में जिला पदाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि सभी सरकारी अस्पतालों में हीट वेव का बेड सुरक्षित रखा जाए। सभी सुरक्षित वार्ड में एयर कंडीशन एवं हीट वेव के sop के अनुरूप सभी तैयारी रखा जाए। सभी अस्पतालों में आइस पैक, डीप फ्रीजर इत्यादि की मुकम्मल व्यवस्था रहे साथ ही सभी एंबुलेंस में एयर कंडीशन एवं आइस पैक उपलब्ध रखें। हीट वेव के उपचार में लगने वाले दवाओं की कोई कमी नहीं रखें, ओआरएस सभी पर्याप्त स्थान पर पर्याप्त संख्या में मौजूद रखें। सभी अस्पतालों में डॉक्टर एवं स्टाफ पूरी तत्परता से मौजूद रहे और मरीजों को तुरंत इलाज करें।
जिला अग्निशमन पदाधिकारी ने बताया कि जिले में 29 अग्निशमन वाहन मौजूद है जो विभिन्न अनुमंडल एवं थाना स्तर पर सुरक्षित रखा गया है ताकि विभिन्न ग्रामीण क्षेत्र में कहीं भी आगजनी की समस्या आने पर तुरंत रिस्पांस दिया जा सके।

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