देवब्रत मंडल

गया रेल थाना के बहुचर्चित सोना लूटकांड मामले में अब नया मोड़ आ गया है। कांड के अनुसंधान में जुटे रेल पुलिस पदाधिकारी ने न्यायालय में आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रेल पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि 20 मई को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मामले से जुड़े कुछ साक्ष्य सीलबंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं। अधिकारी ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही आरोप पत्र दाखिल कर दोषियों को सजा दिलाने की दिशा में कार्रवाई तेज की जा रही है।
मोहित अग्रवाल 19 मार्च को मिली थी जमानत
बताते चलें कि इस मामले में न्यायिक हिरासत में रहे आरोपी मोहित अग्रवाल को 19 मार्च को गया व्यवहार न्यायालय से जमानत मिल गई थी। उसकी जमानत याचिका पर इससे पहले 21 फरवरी को भी सुनवाई हुई थी। मोहित अग्रवाल को इसी वर्ष जनवरी में छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किया गया था। सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक सिंधु भूषण ओझा ने जमानत का विरोध किया था।
मोहित के घर से 41.75 ग्राम सोना हुआ था बरामद
पूछताछ में मोहित अग्रवाल ने रेल पटना मुख्यालय के डीएसपी भास्कर रंजन को बताया था कि उसकी “गोल्ड हाउस” नामक दुकान गया जी के सराफा बाजार में संचालित है। गिरफ्तारी के बाद डीएसपी भास्कर रंजन ने मीडिया को जानकारी दी थी कि मोहित को उसके घर से गिरफ्तार किया गया, जहां कमरे में रखी आलमारी से 41.75 ग्राम सोना बरामद किया गया था।
11.28 लाख का सोना बेचा गया है
पुलिस पूछताछ में मोहित ने स्वीकार किया था कि शेष 98 ग्राम सोने से आभूषण तैयार कर ग्राहकों को बेच दिया गया। उसने बताया था कि आभूषण बिक्री से उसे करीब 11 लाख 28 हजार रुपये प्राप्त हुए थे। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उसे अप्राथमिकी अभियुक्त मानते हुए गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा था।
तत्कालीन रेल थानाध्यक्ष को भी मिल चुकी है जमानत
इस मामले में तत्कालीन रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह की गिरफ्तारी 31 दिसंबर 2025 को हुई थी। बाद में उन्हें 24 जनवरी 2026 को गया व्यवहार न्यायालय से जमानत मिल गई थी। वहीं, मामले में आरोपी बनाए गए गया रेल थाना के चार सिपाहियों की अग्रिम जमानत याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी है।
आरोपी परवेज आलम की जमानत याचिका खारिज
सोना लूटकांड के एक अन्य आरोपी परवेज आलम ने गिरफ्तारी के भय से फरवरी महीने में रेलवे न्यायिक दंडाधिकारी सुशांत सागर की अदालत में आत्मसमर्पण किया था। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में है। उसकी जमानत याचिका पर 26 मार्च को सुनवाई निर्धारित की गई थी, लेकिन अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
