गया नगर निगम: नाला सफाई में भुगतान फॉर्म पर सवाल, घोटाले की आशंका, बाल मजदूरों का पारिश्रमिक का क्या होगा?

Deobarat Mandal
image editor output image 567558513 17797763717334842735175540439431 गया नगर निगम: नाला सफाई में भुगतान फॉर्म पर सवाल, घोटाले की आशंका, बाल मजदूरों का पारिश्रमिक का क्या होगा?

देवब्रत मंडल

गया, 26 मई 2026


गया नगर निगम द्वारा प्रत्येक वार्ड में नाले-नालियों की सफाई का कार्य तेज गति से चल रहा है, लेकिन मजदूरी भुगतान के लिए इस्तेमाल हो रहे फॉर्मेट में गंभीर खामियां सामने आई हैं। मगध लाइव न्यूज को उपलब्ध फॉर्म को देखने पर यह स्पष्ट हो रहा है कि भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है, जिससे घोटाले की आशंका बलवती हो गई है।

image editor output image 1338961584 17797764849068332009349186591307 गया नगर निगम: नाला सफाई में भुगतान फॉर्म पर सवाल, घोटाले की आशंका, बाल मजदूरों का पारिश्रमिक का क्या होगा?

फॉर्म में गायब हैं जरूरी कॉलम


वार्ड पर्यवेक्षकों को उपलब्ध कराए गए “मैन डेज” फॉर्म में न तो मजदूरों की उम्र दर्ज करने का कॉलम है और न ही आधार कार्ड नंबर का। जबकि नियमों के अनुसार मजदूरों को डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में भुगतान किया जाना है। बिना उम्र और आधार की जानकारी के फर्जी नाम पर भुगतान और बाल मजदूरों की तैनाती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

बाल मजदूरों के पैसे का क्या होगा?


मगध लाइव ने पहले ही नालों की सफाई में बाल मजदूरों की तैनाती का मामला उठाया था, जिसके बाद निगम ने उन्हें काम से हटाया। लेकिन अब नया सवाल खड़ा हो गया है – जिन बाल मजदूरों ने जितने दिन या घंटे काम किया, उनके पारिश्रमिक का क्या होगा? यह मेहनताना उन्हें कौन और कैसे देगा? इस पर निगम प्रशासन अब तक चुप है।

कानूनी कार्रवाई पर भी चुप्पी


बाल मजदूरों को नालों की सफाई जैसे खतरनाक काम में लगाने वालों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी भी मीडिया को उपलब्ध नहीं कराई गई है। निगमायुक्त जब सफाई कार्यों का निरीक्षण करते हैं तो उसकी प्रेस विज्ञप्ति और सोशल मीडिया पोस्ट तुरंत जारी होती है, लेकिन बाल मजदूरी के इस मामले पर निगम की चुप्पी पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रही है।

15 दिन में काम पूरा करने की हड़बड़ी में गड़बड़ी?


नालों की सफाई 15 दिनों में पूरी करने का निर्देश जारी किया गया है। इस हड़बड़ी में कितनी गड़बड़ियां हो रही हैं या होने की आशंका है, इसकी निगरानी कौन करेगा? जमादारों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे मजदूरों का पूरा डेटा निगम के पास होना चाहिए, लेकिन फॉर्मेट में ही बुनियादी जानकारी न होने से डेटा की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

मगध लाइव के पास उपलब्ध फॉर्म की आधिकारिक पुष्टि भले न हो, लेकिन यह फॉर्म सभी वार्ड पर्यवेक्षकों के हाथों में देखा गया है। अब निगम प्रशासन को स्पष्ट करना होगा कि भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी कैसे बनाया जाएगा और बाल मजदूरों के श्रम का हिसाब कौन देगा।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *