अपराध से जुड़े मामलों के शीघ्र निष्पादन के लिये 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट का किया जायेगा गठन: मुख्यमंत्री

Deobarat Mandal

अब प्रत्येक माह के दूसरे मंगलवार को राज्य स्तर पर पटना में सहयोग शिविर का किया जायेगा आयोजन, नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से बिहार में कानून का राज और मजबूत होगा

देवब्रत मंडल

image editor output image 987252144 17831857143268323763686830310044 अपराध से जुड़े मामलों के शीघ्र निष्पादन के लिये 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट का किया जायेगा गठन: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज ‘नए आपराधिक कानूनों (भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम) के एकीकृत कार्यान्वयन पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र का दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) और बिहार न्यायिक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में बोधगया स्थित महाबोधि सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित इस सम्मेलन में राज्य में नए आपराधिक कानूनों को प्रभावी ढंग से और समान रूप से लागू करने तथा न्याय वितरण प्रणाली में आपसी समन्वय मजबूत करने पर गहन चर्चा की जायेगी।

मुख्यमंत्री ने नए आपराधिक कानूनों पर आयोजित दो दिवसीय राज्यस्तरीय सम्मेलन को बिहार के लिए ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि देश की लगभग 10 प्रतिशत आबादी और 14 करोड़ से अधिक लोगों को न्याय दिलाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बिहार की न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासन पर है। उन्होंने कहा कि बिहार की पहचान सदैव ‘न्याय के साथ विकास’ की रही है और नए आपराधिक कानूनों का प्रभावी एवं जनहितकारी क्रियान्वयन इसी भावना को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि अपराध से जुड़े मामलों के शीघ्र निष्पादन के लिये 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जायेगा। हमलोग सहयोग कार्यक्रम चला रहे हैं, उसमें आवेदनकर्ता द्वारा समस्या को लेकर आवेदन दिया जाता है और उसका 30 दिनों के अंदर निष्पादन किया जाता है। प्रत्येक महीने के पहले मंगलवार और तीसरे मंगलवार को सभी प्रखंडों में यह आयोजित किया जाता है। 30 दिनों में आवेदन का निष्पादन नहीं करने पर संबंधित अधिकारी को 31 वें दिन मुख्यमंत्री कार्यालय से निलंबन का आदेश जाता है। प्रत्येक माह के दूसरे मंगलवार को राज्य स्तर पर पटना में सहयोग शिविर का आयोजन किया जायेगा। इसमें वैसे लोग शामिल होंगे जिनके आवेदन का निष्पादन प्रखण्ड स्तर पर हुआ है लेकिन वे फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी समस्याओं का समाधान होगा और न्याय मिलेगा। न्यायपालिका और कार्यपालिका सहयोगी बनेंगे तो काम अच्छा होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय तभी सार्थक होगा जब आम जनता का न्याय व्यवस्था पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा। इसके लिए न्यायपालिका, पुलिस और कार्यपालिका के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। सरकार और न्यायपालिका के बीच नियमित अंतराल पर समन्वय बैठकें आयोजित हों, ताकि जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम को नागरिक केंद्रित दृष्टिकोण के साथ लागू करना समय की आवश्यकता है। नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए०आई०) के अधिकतम उपयोग की आवश्यकता है। अपराध नियंत्रण, निगरानी और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने में आधुनिक तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार थानों को आधुनिक संसाधनों, सी०सी०टी०वी०, डिजिटल उपकरणों तथा वैज्ञानिक जांच व्यवस्था से सुसज्जित कर रही है। फॉरेंसिक लैब, मोबाइल फोरेंसिक वैन और वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन की व्यवस्था को मजबूत किया गया है, जिससे मामलों का शीघ्र निष्पादन संभव हो सके। 112 आपातकालीन सेवा के माध्यम से पुलिस औसतन 10 मिनट में घटनास्थल पर पहुंच रही है, इसे घटाकर 7 से 8 मिनट करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। महिलाओं एवं छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्कूलों और कॉलेजों के आसपास विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्पीडी ट्रायल, फास्ट ट्रैक कोर्ट तथा समयबद्ध न्याय व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सरकार हर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएगी। कानून का राज स्थापित करने के लिए किया गया निवेश आने वाले कई दशकों तक राज्य को लाभ पहुंचाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार शिक्षा और ज्ञान की ऐतिहासिक भूमि रही है। इसी माह राज्य में 211 नए डिग्री कॉलेज तथा 534 मॉडल स्कूल स्थापित किए जाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन प्रारंभ हो चुका है तथा विक्रमशिला विश्वविद्यालय के पुनर्स्थापन की दिशा में भी सरकार तेजी से कार्य कर रही है। न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासन के सामूहिक प्रयासों, आधुनिक तकनीक के समुचित उपयोग तथा नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से बिहार में कानून का राज और अधिक मजबूत होगा तथा राज्य विकास, समृद्धि और सुशासन के नए आयाम स्थापित करेगा।

सम्मेलन को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन० कोटिश्वर सिंह, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची, पटना उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय, बिहार न्यायिक अकादमी के चेयरमैन जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद, मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत, बिहार के एडवोकेट जनरल श्री सत्यदर्शी संजय, बिपार्ड के महानिदेशक डॉ० बी० राजेन्दर एवं गृह सचिव श्री कुंदन कुमार ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम के दौरान बिपार्ड के महानिदेशक डॉ० बी० राजेन्दर ने मुख्यमंत्री को हरित पौधा, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर उनका स्वागत किया। सम्मेलन में शामिल डेलीगेट्स ने मुख्यमंत्री के साथ सामूहिक तस्वीर खिंचवाई।

सम्मलेन में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण, पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण, राज्य के विभिन्न जिलों के डिस्ट्रिक्ट जज, मुख्यमंत्री के सचिव श्री लोकेश कुमार सिंह, वरिष्ठ अधिवक्तागण, कानून विशेषज्ञ, मगध प्रमंडल की आयुक्त डॉ० सफीना ए०एन०, गयाजी के जिलाधिकारी श्री शशांक शुभंकर, वरीय पुलिस अधीक्षक गयाजी श्री सुशील कुमार सहित भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारीगण, बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (BIPARD) तथा बिहार न्यायिक अकादमी से जुड़े अधिकारीगण थे, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बिहार के विभिन्न हिस्सों से प्रमंडलीय आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस उपमहानिरीक्षक तथा अन्य वरीय पदाधिकारी जुड़े थे।

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