गया जंक्शन से देवब्रत मंडल

गया। एक ओर गया जंक्शन को विश्वस्तरीय स्टेशन के रूप में विकसित किए जाने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। करोड़ों रुपये की लागत से स्टेशन के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं के विस्तार का काम चल रहा है, लेकिन हल्की बारिश ने ही व्यवस्थाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को गया में बारिश हुई। प्लेटफॉर्म पर कई तस्वीरों को कैमरे में कैद किया। सच बयां करती यह तस्वीर यहां की कुव्यवस्था पर कुछ लिखने और सोचने पर मजबूर कर दिया।
सीन-1

हाल यह है कि बारिश शुरू होते ही गया जंक्शन के प्लेटफॉर्म पर केवल छत से बूंदें टपकती नहीं दिखीं, बल्कि कई जगहों पर पानी धारा की तरह बहता नजर आया। प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों को बारिश से बचने के लिए छत के नीचे खड़ा होना था, लेकिन वहीं पानी टपकने और बहने से उन्हें और अधिक परेशानी झेलनी पड़ी। इससे साफ संकेत मिलता है कि स्टेशन पर किए जा रहे निर्माण और रखरखाव कार्यों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर समीक्षा की जरूरत है।
यात्रियों ने कहा
यात्रियों का कहना है कि स्टेशन को आधुनिक और विश्वस्तरीय बनाने की बात तो की जा रही है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अब भी संतोषजनक नहीं है। बारिश के दौरान प्लेटफॉर्म पर पानी गिरना न केवल असुविधा का कारण है, बल्कि यह यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से भी चिंताजनक है। फिसलन की स्थिति में किसी भी समय दुर्घटना हो सकती है।
सीन-2

गया जंक्शन पर सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्टेशन परिसर में लगे वाटर बूथ की हालत ऐसी है कि वहां स्वच्छता के दावों की सच्चाई खुद-ब-खुद सामने आ जाती है। नियमित सफाई नहीं होने के कारण यात्रियों को पेयजल लेने में असहजता का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति केवल अव्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि यात्रियों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय भी है।
लोगों के मन की बात
स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि यदि गया जंक्शन को सचमुच विश्वस्तरीय स्टेशन बनाना है, तो केवल बड़े-बड़े दावे और निर्माण कार्य पर्याप्त नहीं होंगे। जरूरी है कि यात्रियों को रोजमर्रा में मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं—जैसे साफ प्लेटफॉर्म, सुरक्षित शेड, स्वच्छ पेयजल और बेहतर रखरखाव—पर प्राथमिकता के साथ ध्यान दिया जाए।
बड़ा सवाल

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब हल्की बारिश में ही प्लेटफॉर्म की यह स्थिति हो जा रही है, तो मानसून के दौरान क्या हाल होगा? करोड़ों की लागत से तैयार हो रही परियोजनाओं के बीच यदि यात्रियों को भीगते हुए ट्रेन का इंतजार करना पड़े और गंदे वाटर बूथ से पानी लेने की मजबूरी झेलनी पड़े, तो “विश्वस्तरीय स्टेशन” का दावा आखिर कितना सार्थक रह जाता है।
जरूरत है
अब जरूरत इस बात की है कि रेलवे प्रशासन और संबंधित अधिकारी गया जंक्शन की इन बुनियादी खामियों को गंभीरता से लें, मौके पर जांच कराएं और यात्रियों की सुविधा से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान सुनिश्चित करें। क्योंकि किसी भी स्टेशन की असली पहचान केवल उसकी इमारतों या बजट से नहीं, बल्कि वहां यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं और व्यवस्था की गुणवत्ता से तय होती है।
