वीवीआईपी दौरे के दिन भी नहीं सुधरी व्यवस्था: गया जंक्शन के अंदर-बाहर ऑटो-ई रिक्शा चालकों की मनमानी

Deobarat Mandal

देवब्रत मंडल

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गया। गया जंक्शन के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर यातायात व्यवस्था पूरी तरह से अव्यवस्थित बनी हुई है। एक ओर रेलवे परिसर में ऑटो और ई-रिक्शा चालकों का बेतरतीब कब्जा रहता है, तो दूसरी ओर स्टेशन रोड पर प्रवेश द्वार के ठीक सामने सड़कों पर भी इन वाहनों की मनमानी से यात्रियों और राहगीरों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है।
हैरानी की बात यह है कि मौके पर जिला पुलिस और यातायात पुलिस के जवान तैनात रहते हैं, जबकि रेलवे परिसर में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की भी ड्यूटी रहती है। इसके बावजूद वाहन चालकों में नियमों का पालन कराने का कोई प्रभावी डर दिखाई नहीं देता।
शनिवार को यह स्थिति तब भी देखने को मिली, जब गया और बोधगया में देश के उपराष्ट्रपति, बिहार के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, बिहार विधानसभा के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति समेत कई मंत्री और विधायक मौजूद थे। वीवीआईपी दौरे को लेकर प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर कई दुकानों को हटवा दिया, लेकिन स्टेशन के बाहर सड़क पर ऑटो और ई-रिक्शा चालकों की अव्यवस्था जस की तस बनी रही।

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यह समस्या किसी एक दिन की नहीं है। गया जंक्शन के बाहर लगभग हर दिन यही नजारा देखने को मिलता है। स्टेशन आने-जाने वाले रेल यात्रियों, बुजुर्गों, महिलाओं और पैदल राहगीरों को भीड़ और अव्यवस्थित तरीके से खड़े वाहनों के बीच होकर गुजरना पड़ता है।
स्टेशन रोड स्थित कई होटलों के सामने भी एक साथ कई वाहन सड़क किनारे खड़े रहते हैं। नियमानुसार यात्रियों को उतारने के बाद वाहनों को तुरंत आगे बढ़ जाना चाहिए, ताकि यातायात बाधित न हो, लेकिन इसका पालन शायद ही कभी होता है।
इसी तरह स्टेशन से एक नंबर गुमटी की ओर जाने वाले मार्ग पर भी अव्यवस्था बनी रहती है। यहां रेल परिसर से सटी सड़क के किनारे कई अवैध दुकानें भी लग जाती हैं, जिससे पैदल चलने वालों और रेल यात्रियों की परेशानी और बढ़ जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रेलवे और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से नियमित अभियान चलाकर पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करे और अवैध कब्जों के साथ-साथ सड़क पर बेतरतीब वाहन खड़े करने पर सख्ती बरते, तो इस लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान संभव है। फिलहाल व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी जिन विभागों पर है, उनकी उदासीनता के कारण यात्रियों को रोज असुविधा झेलनी पड़ रही है।

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