देवब्रत मंडल

गया जी: गया रेल थाना के चर्चित सोना लूटकांड में नया मोड़ आया है। इस मामले में नामजद आरोपी मो. परवेज आलम को पटना हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिल गई है। पटना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनसुल की एकलपीठ ने 08 जुलाई को सुनवाई के बाद रेल थाना गया कांड संख्या 334/2025 में दायर जमानत याचिका स्वीकार कर ली। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार सिंह ने पक्ष रखा, जबकि राज्य की ओर से राजेंद्र सिंह ने पैरवी की।
इसके पहले सिपाहियों को लगा था झटका
गौरतलब है कि इसी लूटकांड में नामजद रेल थाना के चार सिपाहियों की अग्रिम जमानत याचिका पटना हाईकोर्ट ने कुछ समय पहले खारिज कर दी थी। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इनकार किया था। इसके बाद नामजद पुलिसकर्मियों पर गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई थी।
क्या है पूरा मामला
यह घटना 21 नवंबर 2025 की है। आरोप है कि हावड़ा-बीकानेर जोधपुर एक्सप्रेस में कोडरमा स्टेशन से ट्रेन खुलने के बाद गया रेल थाना क्षेत्र में गया रेल थाना के चार सिपाहियों और दो बाहरी लोग मो. परवेज आलम एवं गया रेल थाना के वाहन का पूर्व चालक सीताराम ने मिलकर सोना व्यवसायी मनोज कुमार सोनी के स्टाफ से 1 किलोग्राम सोना लूट लिया था। साथ में मारपीट करने का भी आरोप है।
अपर रेल पुलिस अधीक्षक कर रहे जांच, चार्जशीट दाखिल
बता दें इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। जिसका नेतृत्व पटना रेल के अपर रेल पुलिस अधीक्षक भास्कर रंजन कर रहे हैं। जांच में गया रेल थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर राजेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर निलंबित किया गया था। वे अब जमानत पर बाहर हैं। वहीं इस मामले में पुलिस ने अबतक की जांच में आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र भी गया रेलवे कोर्ट को समर्पित कर चुकी है।
निलंबित रेल थानाध्यक्ष के विरुद्ध जारी है विभागीय जांच

इधर, आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि निलंबित इंस्पेक्टर राजेश कुमार सिंह के खिलाफ विभागीय जांच की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि मुजफ्फरपुर रेल पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में विभागीय जांच चल रही है। जिसमें कुछ गवाहों को गवाही देने के लिए 09 जुलाई को मुजफ्फरपुर बुलाया गया था लेकिन कुछ गवाहों को विभागीय आदेश देरी से प्राप्त हुई। जिसकी वजह से उनकी गवाही नहीं हो सकी है।
मो. परवेज आलम ने किया था आत्मसमर्पण
इसी केस में गया जी के सराफा कारोबारी मोहित अग्रवाल उर्फ गोलू को भी गिरफ्तार किया गया था। उन पर लूट का सोना खरीद-बिक्री का आरोप है। पुलिस ने उनके पास से कुछ सोना बरामद भी किया था। वे भी अब जमानत पर हैं। वहीं आरोपी परवेज आलम ने गया रेलवे कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था और न्यायिक हिरासत में केंद्रीय कारा में बंद थे। परवेज के खिलाफ एक आरोप यह भी है लूट की घटना को अंजाम देने के बाद अपने आरओ प्लांट पर लूट के सोने के बार(बिस्किट) की कटाई के लिए ले गया था। ये टेक्निकल टीम की जांच में सामने आया है।

अब आगे क्या होना है
हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद परवेज आलम जेल से बाहर आ सकेंगे। सूत्रों ने बताया कि मो. परवेज आलम को जमानत मिल जाने की सूचना गया रेलवे कोर्ट को मौखिक रूप से मिली हैम लेकिन खबर लिखे जाने तक आदेश की प्रति हाई कोर्ट पटना से गया रेलवे मजिस्ट्रेट के न्यायालय में नहीं पहुंच सकी थी। इधर, सिपाहियों की अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद उनके सामने अब निचली अदालत में सरेंडर कर नियमित जमानत लेने का विकल्प है। एसआईटी की जांच और विभागीय कार्रवाई भी जारी है।
