देवब्रत मंडल

गया जंक्शन पर और गया से चलने वाली और गया जंक्शन से होकर गुजरने वाली विभिन्न एक्सप्रेस और सवारी गाड़ी में समोसा की बिक्री परवान पर है। यह धन्धा गैरकानूनी है। क्योंकि गया जंक्शन पर खान पान के स्टॉल पर रेलवे द्वारा प्राधिकृत एजेंसी को समोसा बेचने का अधिकार है। लेकिन इनका धंधा इन दिनों मंदा हो चला है।
समोसे की पूरी कहानी बड़ा ही रोचक है
Magadhlive के अंडर कवर रिपोर्टर ने गैरकानूनी तरीके से प्लेटफॉर्म पर और ट्रेनों में बिक रहे समोसे की कहानी को कैमरे में कैद किया है। समोसे बनते कहां हैं और कौन इसे बेचते हैं। इसके बारे में कई जानकारियां जुटाई गई है। हालांकि कैमरे के सामने आने से इस धंधे में शामिल लोग आसानी से नहीं आ सकते थे तो गुप्त तरीके से ही इसके तह में जाने की कोशिश की गई।

रेलवे स्टेशन रोड से सटे लक्ष्मण सहाय लेन में है किचन
गया रेलवे स्टेशन रोड से सटे एक सड़क लक्ष्मन सहाय लेन मोहल्ला की ओर जाती है। इस मोहल्ले में एक पुराना मकान मिलता है। जो गली से होकर जाता है। यहां बजाप्ता समोसा बनाने का काम होता है। कई लेबर यहां काम करते हैं। हलवाई (समोसा बनाने वाला) भी मजदूरी पर रखा गया है। इस मकान में गैस सिलेंडर और चूल्हे पर समोसा बनते दिखाई दिए। शायद फायर सेफ्टी रूल का अनुपालन भी नहीं किया जा रहा है।
समोसे बनने वाली जगह पर दिखी गंदगी
जब हमारे रिपोर्टर यहां पहुंचे तो यहां एक व्यक्ति मिला। जो सभी के काम पर निगरानी कर रहा था। इसके अलावा कोई समोसा छान रहा था तो कुछ लोग इसे तैयार कर रहे थे। घर काफी पुराना है। जहां समोसा बन रहे थे, वहां गंदगी दिखाई दे रही थी। एक कर्मचारी ने पूछा गया तो उसने बताया कि गंगा पार के रहने वाले यहां हम सभी से सिंघाड़ा(समोसा) बनवाने का काम करवाते हैं।

यहां बने समोसे प्लेटफॉर्म पर और ट्रेन में बिकते हैं
एक से पूछा गया कि ये समोसे किस होटल के लिए तैयार किए जाते हैं तो उसने कहा-यह सिंघाड़ा किसी होटल में नहीं, रेलवे स्टेशन पर बिकने के लिए जाता है। जहां से ट्रेनों में बेचने के लिए कई लोग हैं। जो प्लेटफॉर्म तथा ट्रेनों में बेचते हैं। जिन्हें एक निश्चित राशि देना होता है। किसे देते हैं ये बताने से परहेज कर गए। यहां से बने समोसे को ऐसे मार्ग से कैरेट में छिपाकर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर ले जाया जाता है, ताकि रेलवे के अधिकारियों की नजर नहीं पड़े। वैसे अधिकतर विक्रेता(वेंडर) आरपीएफ पोस्ट के सामने वाले मार्ग का या फिर किसी ऐसे मार्ग का ही प्रयोग किया करते हैं। जिससे उन पर वर्दी वाले बाबुओं की नजर नहीं आए।

कैमरे पर नजर पड़ते ही दौड़ कर गिरते पड़ते भागा
इसके बाद हमारे रिपोर्टर गया जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 06/07 पर पहुंचे। यहां एक व्यक्ति कैरेट में छिपाकर समोसा बेचते हुए मिला। जैसे ही कैमरे पर उसकी नजर पड़ती है, सिर पर पांव रख कर भाग निकला। भागते हुए वह रेलवे स्टेशन के दूसरे प्लेटफॉर्म की ओर निकल गया।

प्लेटफॉर्म पर स्टॉल संचालक का धंधा हुआ मंदा
इसके बाद रिपोर्टर प्लेटफॉर्म पर रेलवे द्वारा संचालित एक स्टॉल संचालक से मिलते हैं। जहां समोसा, पेटीज व अन्य खाद्य एवं पेय पदार्थ आदि बिक रहे थे। जब उनसे कैमरे के सामने पूछा जाने लगा तो स्टॉल का कर्मचारी ने कहा- कैमरा बंद कीजिएगा तो बात कर सकते हैं। इसके बाद उसने कहा कि बाहर से आ रहे सिंघाड़ा(समोसे) बेचने वाले के कारण हमारी बिक्री नहीं हो पाती है। धंधा मंदा पड़ गया है।
गंगा पार का रहने वाला इस धंधे का सरगना
जिस व्यक्ति के द्वारा यह समोसा बेचने और बिकवाने का काम किया जा रहा है। उसके बारे में बताया गया कि “गंगा पार” का रहनेवाला है। जब जगह का नाम जानना चाहा तो बताया गया कि हाजीपुर(वैशाली जिले) का रहनेवाला है। जिसे कुछ महीने पहले एक व्यक्ति ने गया जंक्शन पर इस अवैध धंधे में प्रश्रय दिलवाने का काम यहीं के एक ‘वर्दी वाले’ साहेब के सहायता से किया है।
नोट-पूरी रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित है, कोई आधिकारिक वर्जन नहीं लिया गया है
