ECREU महाधिवेशन में बवाल, यूनियन में दो फाड़, नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज, भारी संख्या में पुलिस बुलानी पड़ी

Deobarat Mandal

देवब्रत मंडल

image editor output image331856687 17762221496243245485635061332882 ECREU महाधिवेशन में बवाल, यूनियन में दो फाड़, नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज, भारी संख्या में पुलिस बुलानी पड़ी

अप्रैल 2026: पूर्व मध्य रेलवे कर्मचारी यूनियन (ECREU) के छठे महाधिवेशन के दौरान पटना के विद्यापति भवन में 12 और 13 अप्रैल को जमकर हंगामा हुआ। चुनाव प्रक्रिया और नई कमेटी के गठन को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि यूनियन दो गुटों में बंट गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
महाधिवेशन में एक गुट ने आरोप लगाया कि बिना सब्जेक्ट कमेटी की बैठक और बिना वोटिंग कराए ही वर्तमान कमेटी को दोबारा मान्यता दे दी गई। इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी बताते हुए सैकड़ों रेलकर्मियों ने विरोध किया।


नेताओं के बयान भी आए सामने:


विरोधी गुट के नेताओं ने कहा, “यह महाधिवेशन पूरी तरह से प्रायोजित था। बिना वोटिंग के कमेटी घोषित कर देना लोकतंत्र की हत्या है। ECR के लगभग 80 हजार कर्मचारियों के जनादेश को कुचला गया है।” उन्होंने आगे आरोप लगाया,
“जब पुरानी कमेटी को ही रखना था, तो BGM के नाम पर कर्मचारियों से लाखों रुपये का चंदा क्यों लिया गया? कर्मचारियों को विशेष अवकाश (SPL) दिलवाकर रेलवे के राजस्व का भी नुकसान किया गया। इसका जवाब यूनियन नेतृत्व को देना होगा।”


वहीं, दूसरे गुट के नेताओं का कहना है


कि “महाधिवेशन पूरी तरह नियमों के तहत हुआ है। कुछ असंतुष्ट लोग अनावश्यक रूप से विवाद पैदा कर यूनियन की छवि खराब कर रहे हैं। संगठन की मजबूती के लिए निरंतरता जरूरी थी, इसलिए पुरानी कमेटी को ही आगे बढ़ाया गया।” सूत्रों के अनुसार, महाधिवेशन के दौरान नेतृत्व को लेकर भी अंदरूनी खींचतान सामने आई। खासकर महासचिव पद को लेकर वरिष्ठ नेताओं के बीच नोकझोंक की बात भी सामने आई है।


जवाबदेही की मांग तेज:


विरोधी गुट ने यूनियन के महासचिव, केंद्रीय अध्यक्ष और संबंधित संगठनों से पूरे मामले पर जवाब देने की मांग की है। उनका कहना है कि पारदर्शिता और लोकतंत्र की बहाली के बिना कर्मचारियों का भरोसा बहाल नहीं हो सकता।


निष्कर्ष के तौर पर यह चर्चा है कि


ECREU महाधिवेशन में उठा यह विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। यूनियन के भीतर बढ़ती खींचतान से साफ है कि आने वाले दिनों में यह मामला और गरमा सकता है, जिसका असर रेलवे कर्मचारियों की एकजुटता पर भी पड़ सकता है।

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