ये गया जंक्शन है साहेब! यहां आदेश नहीं किसी की ‘हुकूमत’ चलती है, मीडिया जब जगाती है तो एक्शन मोड में आते हैं साहेब

Deobarat Mandal

देवब्रत मंडल

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गया जंक्शन की तस्वीर

पूर्व मध्य रेल का डीडीयू रेल मंडल। डीडीयू मंडल का गया जंक्शन। गया जंक्शन पर यात्रियों की सुविधाओं से जुड़े रेल के जितने भी पर्यवेक्षक स्तर के पदाधिकारी हैं। सभी अपने ऊपर वाले अधिकारियों के आदेश पर काम करते हैं। चाहे वह ट्रेन परिचालन से हों या फिर सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े। सभी की पूर्व मध्य रेल मुख्यालय और डीडीयू मंडल के अधिकारियों और पदाधिकारियों के आदेशों के अनुपालन करने के लिए यहां पदस्थापना हुई है।

वरीय अधिकारियों को भी भारतीय रेल के अधिनियमों का ही अनुपालन कराना होता है। यानी कि सभी एक दूसरे से जुड़े हैं। कहें तो  व्यवस्था ऐसी है कि सभी एक चेन में हैं। यदि किसी भी तरह की रेल नियम और अधिनियमों का उल्लंघन या अनदेखी हो रही है या होती है माना जाता है सभी को अपनी जिम्मेदारियां लेनी पड़ती है।

हम बात कर रहे हैं गया जंक्शन की। ये गया जंक्शन है साहेब। यहां नियमों और अधिनियमों की बात करें तो हर तरफ कुछ न कुछ खामियां नजर आ जाती है। परंतु आदेश की बात करें तो ये समय और परिस्थितियों के अनुसार बदले भी जा सकते हैं लेकिन अधिनियम की अनदेखी कर नहीं सकते हैं।

गया जंक्शन पर यात्रियों की सुविधा के लिए ऑटो-ई रिक्शा स्टैंड है। जगह, क्षेत्रफल सब निर्धारित है लेकिन यहां इन सब चीजों से न तो वाणिज्य विभाग का “लेना देना” महत्व रखता है और न तो रेलवे सुरक्षा बल को ही मानो कुछ “लेना देना” रह गया है। बेतरतीब और जहां मन चाहे वहां ऑटो रिक्शा या ई रिक्शा लगा दें। कोई बोलने वाला मानो नहीं है।

ताजी तस्वीर 15 मई 2026 की शाम की सामने आई। प्लेटफॉर्म नंबर एक के सामने यात्रियों को आने जाने के लिए सड़क बनाई गई है। बीच में एक डिवाइडर भी है। यह स्थान नो पार्किंग जोन घोषित है। परंतु यहां एक लाइन से कई ई रिक्शा और ऑटो देखने को मिले। यात्रियों को इस अतिक्रमण के कारण पैदल चलने में परेशानी हो रही थी। जिसे देखने वाला कोई नजर नहीं आए।

हालांकि कुछ समय पहले मगध लाइव ने इसी अतिक्रमण को लेकर जब एक वीडियो शेयर किया तो अगले दिन आरपीएफ द्वारा 22 ई रिक्शा और ऑटो नो पार्किंग स्थल से जब्त किए गए। कार्रवाई हुई। रेल को इस गलती करने वाले लोगों से जुर्माने के रूप में राशि भी आई। परंतु कुछ ही दिनों बाद ये बात आई गई सी हो गई।

बड़ा सवाल है कि जब मीडिया इस अतिक्रमण को दिखाए या यात्रियों की परेशानियों से रेल प्रशासन को अवगत कराएगी तब जाकर आरपीएफ द्वारा कार्रवाई की जाएगी? क्या उनकी ड्यूटी नहीं है कि इस अतिक्रमण को स्थायी तौर पर हटवा दे। यदि ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है तो कहीं न कहीं या तो कुछ “अंदर” की बात है या फिर स्थानीय प्रशासन कमजोर है।

ऐसे अतिक्रमण स्टेशन परिसर में कई जगहों पर देखने को मिल जाएंगे। यहां तक आरपीएफ पोस्ट के पास प्लेटफॉर्म नंबर 1/सी के पास ऑटो या ई रिक्शा लगे हुए दिखाई देंगे। और तो और यहां के अलावा बाहरी हिस्से में टिकट बुकिंग कार्यालय के ठीक सामने कई वाहन लगे हुए देखने को मिल जाएंगे। दोनों जगहों से स्टैंड का शुल्क भी वसूला जा रहा है। ये अलग बात है कि डीडीयू या पूर्व मध्य रेल के अधिकारियों के गया आगमन पर दिखाई नहीं दें।

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