नगर निगम:भ्रष्टाचार की एक कहानी, जो #निगरानी तक पहुंचा, एक ही परिवार के चार लोगों को दे दिया लाभ, 09 को होगी सुनवाई

Deobarat Mandal

न्यूज़ डेस्क

10000780551804883369930364144 नगर निगम:भ्रष्टाचार की एक कहानी, जो #निगरानी तक पहुंचा, एक ही परिवार के चार लोगों को दे दिया लाभ, 09 को होगी सुनवाई

गया नगर निगम में चल रहे भ्रष्टाचार की एक बानगी ऐसी है कि इसके बारे में आप जानकार केवल हैरान ही नहीं होंगे, बल्कि इसको लेकर आपका दिमाग भी चकरा जाएगा। नगर निगम के अंदरखाने में कैसे कैसे खेल होते हुए आ रहे हैं, इसका एक उदाहरण कुछ समय पहले ही सभी के सामने आया था। जिसमें एक महिला को निगम की कारगुजारियों ने जिंदा होते हुए भी मृत घोषित कर दिया था। बजाप्ता मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत हो गया था। इस खबर को magadhlive ने प्रमुखता से रखने की कोशिश की तब जाकर महिला को न्याय मिला और इस मामले में कांड भी दर्ज कराया गया था। अब एक और मामला सामने आया है। जिसकी भी कहानी निगम के अंदर हो रहे गड़बड़झाला का एक जीता जागता उदाहरण है।

मामला आवास योजना का, निगरानी तक पहुंची बात

मामला आवास योजना से जुड़ी हुई है। इस योजना से जुड़े निगम के संबधित कर्मचारी, पदाधिकारी ने ऐसी गलती(कथित जालसाजी) करने से पहले एक बार भी नहीं सोचा होगा कि यह भेद कभी भी खुल जायेगा। अब जब मामला निगरानी(विभागीय जांच) में पहुंचा है तो लाभुकों के साथ साथ उन सभी के हाथ पांव फूलने लगे हैं जिन्होंने इस घोटाले में जाने अनजाने साथ दिया था। होली के कारण कार्यालय में छुट्टियां है। जैसे ही होली खत्म हो जाएगा और कार्यालयों में कामकाज शुरू होगा तो संबंधित सभी को निगरानी कोषांग(विभागीय जांच) के पदाधिकारी के समक्ष हाजिर होंगे। इसके लिए संबंधित सभी को नोटिस तामिला करा दिया गया है। इसके लिए 09 मार्च की तिथि मुकर्रर की गई है।

नगर आयुक्त ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा

नगर आयुक्त अभिषेक पलासिया ने 03 फरवरी 2026 को एक पत्र निगरानी कोषांग के संयोजक सह अपर समाहर्ता (विभागीय जांच) को लिखा था। आवास सहायक को नोट करते हुए उन्होंने राकेश कुमार राजन नामक एक व्यक्ति द्वारा समर्पित परिवाद पत्र के आलोक में प्रतिवेदन उपलब्ध कराने की बात कही है। परिवाद पत्र के आलोक में निगम के एक कर्मचारी सौरभ कुमार ने प्रतिवेदन समर्पित किया है। प्रतिवेदन में चौकाने वाली बात लिखी गई है।

आइए देखें प्रतिवेदन में क्या बातें कही गई है

कार्यालय पत्रांक 67 दिनांक 16:01 2026 के आलोक में कहना है कि आवास योजनान्तर्गत निभा बनर्जी मोना बनर्जी, मनोज बनर्जी एवं मानवेन्द्र बनर्जी, वार्ड-34 को आवास का लाभ दिया गया है। जिसके खिलाफ परिवाद दायर किया गया है। जिनमें आरोप लगाया गया है कि ये सभी एक ही परिवार के हैं और I.H.S.D.P. योजना के Guideline के प्रतिकूल है। योजना का लाभ परिवार के मुखिया को दिया जाना था जबकि एक ही परिवार के चार लोगों को लाभ दिया गया है।

मामला सामने आया तो राशि काटकर भुगतान किया गया

इस सबंध में यह स्पष्ट करना है कि I.H.S.D.P योजना के लाभुकों का चयन से लेकर भुगतान करने तक की जिम्मेवारी S.B.E.N.G. Red Pvt. Ltd Company को नगर विकास एवं आवास विभाग के द्वारा दिया गया था। उपरोक्त सभी लाभुक में एक निभा बनर्जी के नाम से अलग होल्डिंग है। इनकी मृत्यु हो चुकी है। जब इस बात की जानकारी कार्यालय को हुई कि उपरोक्त सभी लाभुक एवं परिवार के हैं तो राशि वापस करने हेतु कार्यालय के द्वारा नोटिस किया गया। तत्पश्चात योजना में कार्य करने वाली एजेंसी S.B.E.N.G. Red Pvt. Ltd Company के भुगतान हेतु देय राशि काट कर एजेंसी को भुगतान किया गया है।

प्रतिवेदन के माध्यम से खुद को बचाने की कोशिश!

जो प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है, उसके अनुसार निगम विकास एवं विभाग को ही सीधे तौर पर इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया जान पड़ता है और संबंधित कर्मचारी व अधिकारी खुद को इसके लिए जिम्मेदार नहीं मान रहे हैं। सवाल है कि क्या नगर विकास एवं आवास विभाग की दीवारें और संबंधित एजेंसी ही केवल जिम्मेवार हैं इतनी बड़ी गलती के लिए? निगम के आवास सहायक की क्या जिम्मेदारी बनती थी? तत्कालीन सिटी मैनेजर का काम केवल चुपचाप फ़ाइल को देखना और भुगतान के अनुशंसा करना था? अब आवास सहायक भी जांच अधिकारी को जवाब देने के लिए नोटिस भेजा गया है।

मामले में प्रथम अपीलीय अधिकारी के अंतिम विनिश्चय का सार

मामला आज का नहीं है। मामला पुराना है। प्रथम अपीलीय अधिकारी ने 2023 में ही आदेश पारित करते हुए नगर आयुक्त को निर्देशित किया था कि प्रश्नगत मामले में यथाशीघ्र नियमानुसार उचित कार्रवाई करना सुनिश्चित करें। जिसमें दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने एवं रिकवरी के लिए सर्टिफिकेट केस करने की बात कही गई थी।

चर्चा में आ रही है ये बातें भी

बात यह भी सामने आई है कि जिस परती भूमि को दिखा कर आवास योजना का लाभ लिया गया है वह जमीन सरकारी है। उसी जमीन पर खड़े हो कर लाभुकों ने फोटो खिंचवाई जो संचिका में संलग्न बताया जा रहा है। जब योजना स्वीकृत हो गई तो प्राप्त राशि से सरकारी जमीन पर आवास न बनाकर पुस्तैनी पुराने मकान का जीर्णोद्धार करा लिया गया और कुछ कमरों का निर्माण भी करा लिए जाने की बात सामने आ रही। जिसकी पुष्टि magadhlive नहीं करता है।

…और अंत में

अब देखना होगा कि 09 मार्च को होने वाले विभागीय जांच में संबंधित पक्षों के द्वारा अपने अपने बचाव में क्या क्या तर्क और साक्ष्य पेश किया जाता है। जिसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई बढ़ेगी।

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