2022 का चोपन RPF पोस्ट का मामला, हाईकोर्ट ने कहा – आरोप गंभीर, मौलिक अधिकारों से जुड़ा मामला
मगध लाइव डेस्क | गया/प्रयागराज
6 जून 2026

रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF की हिरासत में आरोपियों के साथ कथित मारपीट और अमानवीय व्यवहार के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने रेलवे प्रशासन से जवाब तलब करते हुए एक जिम्मेदार अधिकारी को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामला पूर्व मध्य रेल के धनबाद और डीडीयू मंडल के गया से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला वर्ष 2022 में आरपीएफ पोस्ट चोपन, सोनभद्र में दर्ज केस क्राइम संख्या 3/2022 से जुड़ा है। यह केस रेलवे संपत्ति गैरकानूनी कब्जा अधिनियम, 1966 की धारा 3 और 4 के तहत दर्ज हुआ था। इस मामले के आरोपित शकील अहमद एवं अन्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि रिमांड अवधि के दौरान आरपीएफ कर्मियों ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की और मानवाधिकारों का उल्लंघन किया।
याचिकाकर्ता का पक्ष
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता उदय चंदानी ने कोर्ट को बताया कि 13 मई 2022 के रिमांड आदेश में अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि आरोपितों के साथ अमानवीय व्यवहार नहीं किया जाएगा और उनके मानवाधिकारों का हनन नहीं होगा। इसके बावजूद इन निर्देशों का उल्लंघन किया गया। याचिका में तस्वीरों सहित आवेदन देकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और व्यक्तियों के जीवन एवं मौलिक अधिकारों से जुड़े हैं। कोर्ट ने प्रतिवादी संख्या 2 से 5 की ओर से पेश अधिवक्ता को निर्देश दिया कि रेलवे के किसी जिम्मेदार अधिकारी का शपथपत्र दाखिल किया जाए, जिसमें आरोपों की सत्यता का उल्लेख हो।
कोर्ट ने फिलहाल प्रतिवादी संख्या 6 से 13 को नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं समझी। साथ ही कहा कि अगली सुनवाई के दौरान आवश्यकता पड़ने पर रेलवे का कोई जिम्मेदार अधिकारी न्यायालय में उपस्थित रहे।
अगली सुनवाई कब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले को पुनः सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। फिलहाल यह मामला रेलवे न्यायिक दंडाधिकारी, प्रयागराज के न्यायालय में विचाराधीन है और हाईकोर्ट इसकी मॉनिटरिंग कर रहा है।
मगध लाइव की पड़ताल
इस मामले की तहकीकात में “मगध लाइव” की टीम ने प्रयागराज उच्च न्यायालय के एक वरिष्ठ अधिवक्ता से संपर्क किया। अधिवक्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चूंकि मामला न्यायिक दंडाधिकारी, रेलवे की अदालत में विचाराधीन है और हाईकोर्ट खुद इसकी निगरानी कर रहा है, इसलिए यह बेहद संवेदनशील है।
क्यों है ये खबर अलग
यह मामला सीधे रेलवे सुरक्षा बल से जुड़ा है और हिरासत में कथित मानवाधिकार उल्लंघन का है। इसलिए यह अब तक की अन्य खबरों से अलग है। मामला पुराना जरूर है, लेकिन भूला नहीं गया है। मगध लाइव की टीम इस मामले पर लगातार नजर रख रही है। जैसे ही कोई नया अपडेट प्राप्त होता है, उसे पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करेगी।
