बागेश्वरी गुमटी आरओबी निर्माण में आया नया अपडेट, पीलर के लिए मिट्टी जांच की कवायद शुरू

Deobarat Mandal

देवब्रत मंडल

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आरओबी निर्माण हेतु भूमि पूजन करते विस अध्यक्ष(फ़ाइल फोटो)

गया जी शहर के उत्तरी भाग में गुजरने वाली ग्रैंड कॉर्ड रेल लाइन एक व्यस्त रेलमार्ग के साथ इसी रेल लाइन से होकर गुजरने वाली पथ बागेश्वरी-पॉवरगंज-स्टेशन रोड भी व्यस्ततम सड़क मार्गों में से एक है। यहां पर LC/71A(समपार फाटक बागेश्वरी गुमटी) है। रेलपथ से ट्रेन गुजरने वक्त यह फाटक सुरक्षा के दृष्टिकोण से बंद कर दिया जाता है। जिसके कारण उस सड़क मार्ग पर लोग काफी देर तक फंसे रह जाते हैं। जाम की भयावह स्थिति बन जाती है। आपातकालीन(इमरजेंसी) में आम आदमी हो या खास, सभी परेशानी में पड़ जाते हैं। इन्हीं मुख्य समस्याओं के निदान के लिए यहां आरओबी बन रहा है। जिसके लिए भूमि पूजन भी यहां आकर बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार 21 फरवरी को कर चुके हैं।

आरओबी बनने से पहले पिलर बनेंगे

इस आरओबी के बनने से पहले यहां पिलर बनाए जाने हैं। जिसके लिए पहले यहां की मिट्टी की जांच होनी है, जिससे तकनीकी भाषा में सॉइल टेस्ट कहा जाता है, वो जरूरी होना है। इसी सॉइल टेस्ट के लिए कवायद  रविवार से शुरू कर दी गई है। जिस स्थल पर पिलर बनने हैं, उसके आसपास ही मिट्टी की जांच किए जाने के लिए तकनीकी टीम यहां पहुंच चुकी है।

स्थल निरीक्षण में पर्याप्त उपयुक्त स्थान नहीं मिला

बिहार राज्य पुल निर्माण निगम से जुड़े एक अभियंता ने बताया कि सोमवार को स्थल निरीक्षण किया गया है। बागेश्वरी रोड एवं पॉवरगंज रोड में दो-दो जगहों पर मिट्टी की जांच किए जाने के लिए स्थलीय जांच की गई। जैसा कि बताया गया कि इस कार्य के लिए करीब 15-16 वर्गमीटर जमीन(खाली भूखंड) का होना जरूरी है लेकिन ऐसी जगह कहीं पर नहीं दिखाई दी। इसलिए यह कार्य शुरू नहीं किया जा सका।

सड़क के दोनों किनारों पर बैरिकेटिंग जरूरी

तकनीकी टीम में शामिल रहे लोगों में से एक ने बताया कि सॉइल टेस्ट करने के पहले सड़क के दोनों किनारों पर बैरिकेटिंग जरूरी है। जो संवेदक के द्वारा किया जाना है। वहीं इस कार्य को करने वक्त सड़क पर यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने की आवश्यकता होगी। ताकि निर्बाध रूप से और सेफ्टी पॉइंट ऑफ व्यू से कार्य किया जा सके। बताया गया कि मिट्टी जांच के लिए संयंत्र और तकनीकी टीम यहां आ गई है।

हितबद्ध रैयतों के पक्ष में एमएलसी ने उठाया है मुद्दा

इधर भूमि अधिग्रहण कानून के तहत अधिसूचना जारी कर दिए जाने के बाद प्रभावित हितबद्ध रैयतों से आपत्ति दर्ज कराने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है। जिसमें 30 दिनों से अधिक समय निकल चुका है। रैयतों के पक्ष में विपक्षी दलों के दो विधान परिषद सदस्यों ने सदन में प्रश्न करते हुए डीएम से इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही करने के लिए कहा गया है। हितबद्ध रैयतों का कहना है उनकी भूमि को सरकारी भूमि बताकर भूअर्जन हेतु अधिसूचना जारी कर दी गई है। जिससे यहां के लोग नाराज हैं।

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