देवब्रत मंडल

जिस समाज में हम सभी रहते हैं उस समाज कई घटनाएं होती है। घटनाओं की चर्चा आम हो जाती है लेकिन खबर का हिस्सा नहीं बन पाती है। इस समाज में कभी अपनी इज्जत बचाने की बात सामने आ जाती है तो कभी आपकी लोकप्रियता पर कुप्रभाव को बचाने की बात आ जाती है, तो कभी कभी तो जगहंसाई के कारण भी घटना से पीड़ित व्यक्ति बात को आगे बढ़ाना नहीं चाहते हैं। कई बार ऐसा भी हुआ है कि गलती अपनी होती है और बाजार में बात फैल जाती है।सामने वाले पर दोषारोपण कर उन्हें चर्चा में ला दिया जाता है।
गया जी शहर में शुक्रवार को कुछ इसी तरह की बातें सामने आई। एक ग्राहक किसी मॉल से खाद्य पदार्थों की खरीदारी एक महीने पहले करते हैं। जब उसका उपयोग करते हैं तो उसमें कीड़े दिखाई पड़ते हैं। एक पैकेट खुल जाता है, जिसमें कीड़े पाए जाते हैं। फिर दूसरे पैकेट को खोल कर ये देखना चाहते हैं कि कहीं इसमें भी तो कीड़े नहीं लगे हैं। पाया जाता है कि दूसरे पैकेट में कीड़े रेंग रहे हैं।
जिसका वीडियो बनता है जो वायरल हो जाता है। मामला खाद्य संरक्षा से होते हुए स्वास्थ्य तक जाती है। संबंधित अधिकारी को इसकी सूचना दी जाती है। अधिकारी उस प्रतिष्ठान तक पहुंच जाते हैं और फिर वे आवश्यक कार्यवाही करते हैं। अधिकारी द्वारा तैयार दस्तावेज पीड़ित व्यक्ति को पास भविष्य में किसी तरह की कार्रवाई को लेकर सुरक्षित रखने के लिए भेज दिया जाता है। अब पीड़ित व्यक्ति उस रिपोर्ट को भी वायरल कर देते हैं।
अब बात आ जाती है खबरनवीस तक। खबरनवीस पीड़ित व्यक्ति से संपर्क कर उनका पक्ष रखने के लिए बातें करते हैं तो सामने वाले का कहना है कि जहां तक बात हो गई है उसे वहीं तक रहने दें। जो वायरल हुए हैं उसे डिलीट कर दीजिए क्योंकि हमने कीड़े लगे खाद्य पदार्थ को वापस कर उसके बदले में सेहत बनाने से सम्बंधित वस्तु उसी मॉल से ले आए हैं और हमें कहीं इसकी शिकायत दर्ज नहीं कराना है। कारण पूछे जाने पर कहते हैं कि हमारे पास केस लड़ने के लिए वक्त नहीं है।
और यह मामला केवल चर्चा में रह जाती है, शिकायत दर्ज नहीं कराए जाने की वजह से रिपोर्ट नहीं बन पाती है। अब चौथे स्तंभ की यहां जरूरत नहीं रह जाती है। इसलिए सारी बातें ऑफ द रिकॉर्ड रह जाती है।
