देवब्रत मंडल

डेढ़ करोड़ रुपए के सोना लूटकांड मामले में रेल पुलिस अपने विभाग के ही सिपाहियों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। एक थानेदार और एक एक स्वर्णकार की गिरफ्तारी तो हो गई। लेकिन रेल पुलिस को हमेशा साथ देने वाला parvez गिरफ्तार नहीं हो सका। उसने आत्मसमर्पण कर दिया। आरोप है कोडरमा साथ ले जाकर या भेजकर लूटकांड में कथित शामिल परवेज़ ने लूट के सोने को टुकड़े टुकड़े करने के लिए अपने आरओ प्लांट पर ले गया था। इसमें से दो तो जमानत पर है और एक की अभी हाल ही जमानत याचिका खारिज कर दी गई है।
अब चारो नामजद सिपाही और गया रेल थाना का पूर्व वाहन चालक अमन शर्मा उर्फ सीताराम की भी अग्रिम जमानत याचिका गया से खारिज हो चुकी है लेकिन गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
21 नवंबर 2025 को हावड़ा-बीकानेर जोधपुर एक्सप्रेस से धनञ्जय शाश्वत नामक एक यात्री से करीब एक किलो सोना लूट लिया गया था। रेल पुलिस बचाव में लग गई थी लेकिन एसआईटी और तकनीकी टीम ने परख लिया कि घटना गया रेल थाना क्षेत्र में ही हुई थी और कांड की धाराओं में परिवर्तन हुआ।
अब 01 मार्च को स्वेता शर्मा का हैंडबैग चोरी हो गई। पीड़िता की शिकायत है कि गया जंक्शन पर उनके साथ घटना हुई है। सवाल खड़े हो रहे हैं कि उस वक्त जब ट्रेन गया जंक्शन पर रुकी हुई थी तो A-1 कोच में टीटीई कौन थे। स्कोर्ट पार्टी थी या नहीं। प्लेटफॉर्म पर ट्रेन सुरक्षित पास कराने के लिए किसकी ड्यूटी लगाई गई थी। जब आरपीएफ या जीआरपी को सूचना मिली तो वे कितनी देर में उस कोच में आए? आए या नहीं आए या आगे के स्टेशन पर पीड़िता स्वेता शर्मा को किसने अटेंड किया। ऐसे कई सवाल है जो यात्री सुरक्षा से जुड़े हुए हैं। पीड़िता ने सीसीटीवी फूटेज सुरक्षित रखने की भी रेल प्रशासन से अपील की है।
अब इस भीषण चोरी के लिए फिर एक विशेष टीम गठित हुई। टीम हाथ पांव मार रही है और कोशिश में है कि घटनास्थल कम से कम धनबाद रेल मंडल अंतर्गत धकेल दिया जाए। ताकि गया आरपीएफ पोस्ट के अधिकारियों का बोझ हल्का हो जाए लेकिन घटनास्थल को तो गया रेल थाना क्षेत्र से भी बाहर करने में बड़ी मुश्किल होगी। क्योंकि आरपीएफ का क्षेत्राधिकार तो मानपुर जंक्शन तक ही सीमित है लेकिन रेल थाना क्षेत्र काफी लंबा चौड़ा है।
ध्यान देने योग्य बात है कि पीड़िता श्वेता शर्मा कोडरमा स्टेशन पर 12307 हावड़ा-जोधपुर एक्स के A-1 कोच में सीट संख्या 04 पर अपनी नाबालिग बच्ची के साथ सफर शुरू की थी।
सूत्रों की माने तो कोडरमा से खुलने के बाद यह ट्रेन बीच में कहीं नहीं रुकी। सीधे गया जंक्शन पर रुकी हुई थी तो महिला यात्री को इसका अहसास हुआ कि उनका हैंडबैग चोरी हो गया है।
एक बार फिर आरपीएफ और जीआरपी के अधिकारियों के लिए यह ताजी घटना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं। एक सोना लूटकांड ऊपर से यात्री के उसी रेलखंड पर चोरी।
