देवब्रत मंडल

गया जी, 7 मई 2026
पूर्व मध्य रेल के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने बुधवार को प्रधान मुख्य परिचालन प्रबंधक श्रीमती इंदू रानी दुबे के साथ गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन की डाउन लाइन में BOBR रेक का फुटप्लेट निरीक्षण किया। इसके साथ ही इस चुनौतीपूर्ण रेलखंड पर खाली BOBR वैगन का परिचालन ट्रायल सफल रहा।
1906 में शुरू हुआ था ग्रैंड कॉर्ड, टनल की ऊंचाई बनी थी बाधा
ग्रैंड कॉर्ड लाइन की शुरुआत 1906-07 में लॉर्ड मिंटो ने की थी। धनबाद मंडल का गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन इसी का हिस्सा है। यह रेलखंड 1:80 के रूलिंग ग्रेडिएंट, तीन सुरंगों, छोटी पहाड़ियों और ऊंचे टीलों के कारण बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। आजादी से पहले बने इस सेक्शन में टनल की ऊंचाई सीमित होने के कारण BOBR वैगन का परिचालन संभव नहीं था।
IIT-ISM धनबाद के साथ मिलकर हटाई तकनीकी बाधा
पूर्व मध्य रेल ने IIT-ISM धनबाद के साथ मिलकर टनल रीडिजाइन और डाइमेंशन बढ़ाने का चुनौतीपूर्ण काम पूरा किया। इसके बाद ही डाउन लाइन में खाली BOBR रेक का परिचालन ट्रायल संभव हो सका।
NTPC प्लांट्स को होगा सीधा फायदा, लोडिंग बढ़ेगी
अभी तक बाढ़, बरौनी और सलाकाटी (नॉर्थईस्ट) NTPC प्लांट्स के लिए कोयला BOX-N रेक से भेजा जाता है। BOBR रेक में लोडिंग के बाद कोयला प्रधानखांटा-आसनसोल-झाझा के रास्ते भेजा जाता है और वापसी भी इसी लंबे रूट से होती है। इसमें ग्रैंड कॉर्ड लाइन की तुलना में ज्यादा समय लगता है।
अब गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन से खाली BOBR रेक की वापसी धनबाद मंडल को हो सकेगी। इससे वैगन टर्नअराउंड टाइम में काफी कमी आएगी। रेक की उपलब्धता बढ़ने से कोयले की लोडिंग भी बढ़ेगी और बाढ़, बरौनी व सलाकाटी NTPC प्लांट्स को समय पर कोयला आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
क्या है BOBR रेक
BOBR यानी बॉटम ओपनिंग बॉक्स रैपिड रेक कोयला ढुलाई के लिए खास वैगन है। इसमें नीचे से अनलोडिंग होती है, जिससे NTPC जैसे प्लांट्स में तेजी से कोयला खाली किया जा सकता है। इस आशय की जानकारी सरस्वती चन्द्र, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, पूर्व मध्य रेल ने दी है।
