गया कॉलेज: छात्रा की छलांग और शिक्षा व्यवस्था पर खड़े होते सवाल, त्रासदी झेलता जीवन

Deobarat Mandal

देवब्रत मंडल

image editor output image 760153960 17796140776134687100503973297651 गया कॉलेज: छात्रा की छलांग और शिक्षा व्यवस्था पर खड़े होते सवाल, त्रासदी झेलता जीवन
छात्रा नैना कुमारी


गया। एक परीक्षा केंद्र, एक मोबाइल फोन, कुछ आरोप और फिर कॉलेज भवन से छलांग। यह किसी फिल्म की पटकथा नहीं, बल्कि गया की छात्रा नैना कुमारी की वास्तविक त्रासदी है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की संवेदनहीनता और कॉलेज प्रबंधन के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जाता है कि जीबीएम कॉलेज, गया की छात्रा नैना कुमारी परीक्षा देने गया कॉलेज केंद्र पहुंची थी। उसके पास मोबाइल फोन था, जिसे उसने स्वयं स्वीकार करते हुए वीक्षक को सौंप दिया। नैना का कहना है कि उसने मोबाइल का इस्तेमाल नकल के लिए नहीं किया था। लेकिन इसके बावजूद उस पर नकल का आरोप लगाया गया और कथित तौर पर जांच के नाम पर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा।
आरोप है कि कॉलेज कर्मियों और कुछ शिक्षकों द्वारा छात्रा का वीडियो बनाया जाने लगा। एक छात्रा, जो पहले ही परीक्षा के दबाव में थी, इस व्यवहार से टूट गई और अंततः कॉलेज भवन से छलांग लगा दी। अब वह अस्पताल के बेड पर है, जहां शारीरिक पीड़ा के साथ मानसिक आघात भी झेल रही है।
यह घटना केवल एक छात्रा की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि उस शिक्षा व्यवस्था का आईना है जहां संवेदनशीलता की जगह कठोरता और संवाद की जगह सार्वजनिक अपमान ने ले ली है। सवाल यह है कि क्या एक छात्रा की गलती—यदि उसे गलती माना भी जाए—इतनी बड़ी थी कि उसे इस हद तक मानसिक दबाव में धकेल दिया जाए?
परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल प्रतिबंधित होना नियम का हिस्सा है, लेकिन नियम लागू करने का तरीका भी मानवीय होना चाहिए। यदि छात्रा ने स्वयं मोबाइल होने की बात स्वीकार कर ली थी और उसे जमा कर दिया था, तो फिर उसके साथ अपराधी जैसा व्यवहार क्यों किया गया? क्या किसी छात्र या छात्रा की गरिमा की रक्षा करना शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी नहीं है?
विडंबना यह भी है कि देश और राज्य में बड़े स्तर पर पेपर लीक, फर्जी डिग्री और शिक्षा में भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। ऐसे माहौल में एक साधारण छात्रा पर कठोर कार्रवाई और कथित सार्वजनिक प्रताड़ना शिक्षा तंत्र की प्राथमिकताओं पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
मगध विश्वविद्यालय का नाम पूर्व में फर्जी डिग्री और शैक्षणिक अनियमितताओं को लेकर चर्चाओं में रहा है। ऐसे में उससे जुड़े कॉलेजों में छात्रों के साथ संवेदनशील और न्यायपूर्ण व्यवहार की अपेक्षा और भी अधिक हो जाती है।
आज नैना अस्पताल में है। उसके शरीर के जख्म शायद समय के साथ भर जाएंगे, लेकिन जो मानसिक पीड़ा उसने झेली, वह लंबे समय तक उसका पीछा कर सकती है। यह घटना केवल जांच का विषय नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है—क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों को संभाल रही है या उन्हें तोड़ रही है?

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