देवब्रत मंडल

गया शहर की यातायात समस्या के समाधान के लिए प्रस्तावित आरओबी (रेल ओवर ब्रिज) परियोजनाओं की आधारशिला पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा रखी जा चुकी है। बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार द्वारा भूमि पूजन किए हुए भी कई महीने बीत चुके हैं। इस बीच बिहार में नेतृत्व परिवर्तन भी हो गया, लेकिन धरातल पर काम की रफ्तार अब भी लोगों की उम्मीदों के अनुरूप दिखाई नहीं दे रही है।
जाम की समस्या से जूझ रहे शहरवासी

रोजाना जाम की समस्या से जूझ रहे शहरवासियों और यात्रियों को अब यह जानने की उत्सुकता है कि जिन परियोजनाओं का बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार किया गया था, उनका वास्तविक निर्माण कार्य कब शुरू होगा और कब पूरा होगा।
जनता अब सवाल कर रही
जनता पूछ रही है कि शिलान्यास और घोषणाओं से आगे बढ़कर आखिर वह दिन कब आएगा, जब इन आरओबी परियोजनाओं के रूप में विकास का वादा जमीन पर दिखाई देगा? अब समय आ गया है कि संबंधित विभाग स्पष्ट समय-सीमा के साथ जनता को परियोजना की वर्तमान स्थिति से अवगत कराए।
ये सारी बातें भी हो चुकी है

इस बीच रोड को ब्लॉक कर कार्य प्रारंभ किए जाने ने संबंधित सैद्धांतिक सहमति भी बन चुकी है। पुल के लिए कितने पिलर कहां-2 बनाए जाएंगे, इन बिंदुओं को मार्क भी कर लिया गया है। जानकारी प्राप्त हुई है कि बिजली के उपकरण एवं केबल को शिफ्ट करने के ऐजेंसी को अधिकृत किया गया है लेकिन यह भी शुरू नहीं हुआ है।
अब न्यायालय का रुख करने की तैयारी
सड़क के दोनों किनारों पर पेडों की कटाई छटाई के लिए वन विभाग से अनापत्ति भी प्राप्त कर लिए जाने की सूचना है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत प्रभावित लोगों से उनकी आपत्तियां भी ले ली गई है।लेकिन उनका निबटारा नहीं हो सका है। अधिग्रहित की जा रही भूधारी अब सरकारी कार्यालय से निकल कर न्यायालय की ओर रुख करने के लिए तैयारी कर चुके हैं।

विरोध के स्वर भी मुखर हुए
यहां जगह जगह पर विरोध सह मांग के पोस्टर बैनर भी लगा दिए गए हैं। प्रभावित लोग अपनी जमीन भी देने को तैयार हैं लेकिन अपनी हितों की रक्षा के शर्त पर। उनकी बातें विरोधी दलों के नेता सदन में रख चुके हैं लेकिन आगे क्या होगा या हो रहा है यहां के लोगों में से किसी को पता नहीं चल रहा है।
निर्माण करने वाली कंपनी भी तैयार

पुल निर्माण का कार्य करने वाली अधिकृत एजेंसी के इंजीनियर, सर्वेयर, प्रोजेक्ट मैनेजर आदि इस इंतजार में है कि उन्हें कार्यस्थल पर कार्य प्रारंभ करने के साइट क्लियर मिले ताकि वे कार्य शुरू कर सकें। इस कंपनी के बेस कैंप कार्यालय में निर्माण कार्य करने के लिए उपकरण व सामग्रियां भी आ चुके हैं लेकिन सभी साइट क्लियर मिल जाने के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
अधिकारियों से लोग कर रहे सवाल

ऐसा भी नहीं है कि पुल निर्माण निगम के अधिकारियों का साइट पर आना जाना बंद है। ये सभी नियमित रूप से आवश्यक जब समझते हैं तो निरीक्षण करने के लिए आना जाना कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों के द्वारा इन लोगों से तरह तरह के सवाल किए जा रहे हैं। कई लोग तो कहने लगे हैं कि मानसिक तनाव में जी रहे हैं, कब बनेगा यह आरओबी पता नहीं। कई लोग तो ये भी कह रहे हैं कि लगता है कि अपने जीवन काल में शायद पुल बना हुआ देखना नसीब में नहीं। कहते हैं- “अब निर्माण कार्य की शुरुआत और पूर्णता का इंतजार है।”
