देवब्रत मंडल

गया। शहर की बहुप्रतीक्षित बागेश्वरी रेलवे गुमटी आरओबी (रेल ओवरब्रिज) परियोजना अब तेजी से आगे बढ़ने लगी है। पुल निर्माण के लिए पिलर की नींव तैयार करने हेतु बागेश्वरी रोड पर गड्ढे खोदने का कार्य शुरू कर दिया गया है। वहीं रेलवे फाटक से पहले बैरिकेडिंग कर दी गई है, जिससे अब इस मार्ग से केवल दोपहिया वाहन और पैदल लोगों का ही आवागमन संभव हो सकेगा।
बुधवार को बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के वरीय परियोजना अभियंता आकाशदीप, कनीय अभियंता दिनेश कुमार, प्राण ज्योति तथा प्रोजेक्ट मैनेजर संजय कुमार वर्मा सहित अन्य अधिकारी कार्यस्थल पर मौजूद रहे और निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया।

रेल अधिकारियों ने किया संयुक्त निरीक्षण
निर्माण कार्य शुरू होने की सूचना मिलने पर गया जंक्शन के स्टेशन अधीक्षक बिनोद कुमार एवं स्टेशन प्रबंधक मिथलेश कुमार के संयुक्त नेतृत्व में परिचालन निरीक्षकों की टीम भी मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने पुल निर्माण निगम के अभियंता दिनेश कुमार के साथ परियोजना के विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की।
निरीक्षण के दौरान बताया गया कि फिलहाल रेलवे की भूमि पर पिलर निर्माण की अनुमति प्राप्त नहीं हुई है। रेलवे भूमि पर पिलर निर्माण शुरू होने के साथ ही यहां एक फुट ओवरब्रिज (एफओबी) का भी निर्माण किया जाएगा, जिससे बागेश्वरी, पावरगंज और स्टेशन रोड के बीच पैदल यात्रियों का आवागमन सुरक्षित एवं सुगम हो सकेगा।
लोको कॉलोनी मार्ग से अतिक्रमण हटाने की तैयारी
निरीक्षण के दौरान स्टेशन प्रबंधक ने 71/ए रेल समपार फाटक से सटे लोको कॉलोनी जाने वाले मार्ग पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण पाया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में संबंधित विभागों के साथ-साथ सदर एसडीएम को भी पत्र भेजा जाएगा, ताकि अतिक्रमण हटाकर मार्ग को अवरोधमुक्त बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि लोको कॉलोनी में रहने वाले रेलकर्मियों की तबीयत खराब होने जैसी आपात स्थिति में एम्बुलेंस बिना किसी बाधा के पहुंच सके, इसके लिए सड़क का खुला रहना आवश्यक है। निरीक्षण टीम ने लोको कॉलोनी का भी जायजा लिया और रेलकर्मियों की आवाजाही से जुड़ी समस्याओं का आकलन किया।
भूमि अधिग्रहण में देरी बनी चुनौती

दूसरी ओर निर्माण एजेंसी बसंत कंस्ट्रक्शन के अभियंताओं और कर्मियों को भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में देरी के कारण कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें पुल निर्माण कार्य से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन समय पर मुआवजा मिलना जरूरी है, ताकि वे विस्थापन से पहले अपने रहने और रोजगार की वैकल्पिक व्यवस्था कर सकें।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि भूमि अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया जल्द पूरी होने के बाद बहुप्रतीक्षित आरओबी का निर्माण और तेज गति से आगे बढ़ेगा, जिससे वर्षों पुरानी रेल फाटक जाम की समस्या का स्थायी समाधान मिल सकेगा।
