टीम, मगध लाइव

गया जिले के गुरपा थाना क्षेत्र अंतर्गत कठौतिया केवाल पंचायत के रंगूनगर गांव में नल-जल योजना के लिए किए गए बोरिंग में गिरा तीन वर्षीय बालक पीयूष को शुक्रवार की देर रात लगभग 1:50 बजे सकुशल बाहर निकाल लिया गया। बच्चे के सुरक्षित बाहर आने के बाद परिजनों सहित पूरे गांव ने राहत की सांस ली। गया जिले की एसडीआरएफ की टीम और पटना से देर रात पहुंची एनडीआरएफ की की टीम के करीब पांच-छः घन्टे के संयुक्त प्रयास ने एक अबोध बालक की जान बचाने में कामयाब रही।
इधर, घटना के बाद से घटनास्थल पर हजारों लोगों की भीड़ जमा थी। हर हाथ पियूष की सलामती की दुआ कर रहा था। सबकी ऊपर वाले ने सुन ली और 30 फ़ीट गहरे बोरवेल में फंसा पीयूष सुरक्षित बाहर निकल आया। हालांकि एसडीआरएफ की टीम को इसका प्रशिक्षण प्राप्त नहीं था तो इनकी टीम अपने स्तर से बच्चे को सुरक्षित निकाल पाने की कोशिश करती रही।

कथित झोलाछाप डॉक्टर की भूमिका की लोग सराहना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना था कि फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ऑक्सीजन की कमी थी तो कथित झोलाछाप चिकित्सक के निजी अस्पताल में मौजूद ऑक्सीजन की सिलेंडर काम आया। जिसके सहारे 30 फ़ीट गहरे बोरवेल की गहराई में फंसे तीन साल के मासूम पीयूष की सांसों की डोर को टूटने नहीं दिया।
वहीं वजीरगंज डीएसपी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी तथा सामान्य प्रशासन विभाग की टीम लगातर जिले के डीएम और आपदा प्रबंधन विभाग के अपर कलेक्टर के संपर्क में रहते हुए पीयूष की जान बचाने के लिए घटना की सूचना मिलने के बाद से रात भर घटनास्थल पर ही मौजूद रहे।
बता दें कि घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और बचाव कार्य शुरू किया गया। मौके पर एसडीआरएफ, स्थानीय प्रशासन तथा अन्य राहत-बचाव दलों ने लगातार अभियान चलाया। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की।

इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में एसडीआरएफ और स्थानीय लोगों के साथ साथ प्रशासन की भूमिका सराहनीय रही। हालांकि, लोगों का कहना है कि बिहटा से एनडीआरएफ की टीम को घटनास्थल तक पहुंचने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगा, जिससे परिजनों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई थी।
पीयूष के सकुशल बाहर निकलने की खबर मिलते ही क्षेत्र में खुशी का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने राहत-बचाव दलों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए बच्चे के सुरक्षित जीवन की कामना की।
