मगध रेंज के आईजी से भी लगाई गुहार, फिर भी नहीं लौटे रुपये; साइबर थाना का काट रहा चक्कर
देवब्रत मंडल

गया जी। एक गरीब मजदूर की जिंदगी भर की मेहनत की कमाई साइबर ठगों ने कुछ ही मिनटों में उड़ा दी। अब हालात ऐसे हैं कि जिस रकम से वह अपनी बेटी की शादी के सपने संजोए बैठा था, उसी रकम को वापस पाने के लिए पिछले दो महीने से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है।
मामला डेल्हा थाना क्षेत्र के निवासी मजदूर का
डेल्हा थाना क्षेत्र के छोटकी नवादा निवासी राजा कुमार ने अपनी बेटी की शादी के लिए मजदूरी कर-करके रुपये जमा किए थे। लेकिन 7 मार्च 2026 को वह साइबर अपराध का शिकार हो गए और उनके खाते से 99 हजार रकम निकल गई। इसके बाद उन्होंने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद न तो उनकी राशि वापस मिल सकी और न ही उन्हें कोई ठोस राहत मिली।
आईजी से लगाई थी उम्मीद, अब भी इंतजार
न्याय की आस लेकर राजा कुमार जून 2026 में खुद मगध रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) से मिले और अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने आवेदन देकर जल्द कार्रवाई और अपनी मेहनत की कमाई वापस दिलाने की गुहार लगाई। आवेदन पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी अंकित किए गए, लेकिन इसके बावजूद पीड़ित का कहना है कि आज तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है।
“हर सप्ताह साइबर थाना जाता हूं, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिलता है”
राजा कुमार का कहना है कि वह नियमित रूप से साइबर थाना जाते हैं। हर बार उन्हें यही कहा जाता है कि “हो जाएगा”, लेकिन महीनों बाद भी उनकी रकम वापस नहीं मिली। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अब बेटी की शादी की चिंता उन्हें दिन-रात सता रही है।
एक गरीब पिता की बेबसी
राजा कुमार कोई बड़े कारोबारी नहीं हैं। वह दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बेटी की शादी के लिए उन्होंने बड़ी मुश्किल से एक-एक रुपये जोड़कर यह रकम जमा की थी। साइबर ठगी ने न सिर्फ उनकी जमा-पूंजी छीन ली, बल्कि एक पिता के सपनों पर भी गहरा आघात पहुंचाया है।
प्रशासन से मानवीय पहल की उम्मीद
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच राजा कुमार का मामला उन गरीब परिवारों की पीड़ा को सामने लाता है, जिनके लिए कुछ हजार रुपये भी जीवनभर की कमाई होते हैं। ऐसे में पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र कार्रवाई करेंगे, ताकि बेटी की शादी के लिए जोड़ी गई मेहनत की कमाई उन्हें वापस मिल सके और एक गरीब पिता की चिंता कुछ कम हो सके।
