बागेश्वरी गुमटी आरओबी: बहुत जल्द ही पिलर के लिए किए जाएंगे गड्ढे, मशीन आने का केवल इंतजार

Deobarat Mandal

देवब्रत मंडल

image editor output image 1169899081 17833165878885362390094426750782 बागेश्वरी गुमटी आरओबी: बहुत जल्द ही पिलर के लिए किए जाएंगे गड्ढे, मशीन आने का केवल इंतजार
क्षतिग्रस्त बैरियर(जिसे हटा लिया गया)

मुख्य बातें:बागेश्वरी गुमटी आरओबी पर तैयारी तेज, बैरियर हटने के बाद मशीनों का इंतजार; प्रभावितों ने लगाया नारा—‘पहले मुआवजा, तब काम’
गया में बहुप्रतीक्षित बागेश्वरी गुमटी आरओबी परियोजना अब जमीन पर आकार लेती दिख रही है। निर्माण एजेंसी की सक्रियता बढ़ी है, बैरियर लगाए गए, बेस कैंप पर मशीनें पहुंच रही हैं और जल्द ही पिलर निर्माण के लिए सड़क के बीच खुदाई शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, दूसरी ओर भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर प्रभावित परिवारों की नाराजगी भी खुलकर सामने आ गई है।


गया। गया-मानपुर रेलखंड पर बागेश्वरी गुमटी के पास बनने वाले रेल ओवरब्रिज (आरओबी) को लेकर एक ओर निर्माण की तैयारी तेज होती दिख रही है, तो दूसरी ओर भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के मुद्दे पर प्रभावित लोगों का विरोध भी मुखर हो गया है। निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी में बागेश्वरी-पावरगंज-स्टेशन रोड स्थित दो स्थानों पर बैरियर लगाए गए थे। इनमें से एक बैरियर कुछ दिन पहले क्षतिग्रस्त हो गया, जिसे सुरक्षा के दृष्टिकोण से हटा दिया गया है। अब अगले कुछ दिनों में पिलर निर्माण के लिए सड़क के बीच गड्ढा करने वाली मशीनें आने की संभावना जताई जा रही है। इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि लंबे समय से प्रतीक्षित आरओबी निर्माण कार्य अब गति पकड़ सकता है।
इधर, भूमि अधिग्रहण कानून के तहत प्रभावित लोगों ने अपने-अपने घरों की दीवारों पर ‘पहले मुआवजा, तब काम’ लिखे बैनर लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया है। इससे साफ है कि स्थानीय लोग आरओबी निर्माण के विरोध में नहीं, बल्कि मुआवजे और आपत्तियों के समाधान के बाद ही काम शुरू किए जाने की मांग कर रहे हैं।

जाम से मुक्ति के लिए अहम परियोजना


गया शहर में जाम की समस्या से राहत दिलाने और वाहनों की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए गया-मानपुर रेलखंड पर बागेश्वरी गुमटी के पास आरओबी का निर्माण होना है। 21 फरवरी को बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने इस परियोजना का भूमि पूजन किया था। इसके बाद से निर्माण एजेंसी की गतिविधियां बढ़ी हैं और अब बेस कैंप पर मशीनें पहुंचने लगी हैं। मशीनों की आवाजाही से स्थानीय लोगों में यह भरोसा जगा है कि अब वर्षों से लंबित यह परियोजना वास्तविक रूप से आगे बढ़ेगी।

बैरियर लगा, फिर एक क्षतिग्रस्त होकर हटाया गया


आरओबी निर्माण की तैयारी के तहत बड़े वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने और कार्यस्थल को सुरक्षित बनाने के लिए बागेश्वरी-पावरगंज-स्टेशन रोड पर दो स्थानों पर बैरियर लगाए गए थे। लेकिन इनमें से एक बैरियर क्षतिग्रस्त हो गया। सुरक्षा को देखते हुए उसे हटा दिया गया है। अब निर्माण एजेंसी की अगली तैयारी पिलर निर्माण के लिए सड़क के बीच खुदाई शुरू कराने की है। बताया जा रहा है कि इसके लिए आवश्यक मशीनें कुछ दिनों में पहुंच सकती हैं।

भूमि अधिग्रहण अब भी सबसे बड़ा सवाल


बागेश्वरी गुमटी लेवल क्रॉसिंग-71ए पर आरओबी निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। प्रभावित भू-स्वामियों का कहना है कि वे एक सदी से अधिक समय से रैयती दस्तावेजों के आधार पर अंचल कार्यालय, नगर प्रखंड और नगर निगम में राजस्व जमा करते आ रहे हैं, लेकिन अब उनकी जमीन को सरकारी घोषित कर दिया गया है। यही वजह है कि प्रभावित परिवारों में नाराजगी है और वे मुआवजा दिए बिना निर्माण कार्य शुरू किए जाने का विरोध कर रहे हैं।
इस मामले में 7 फरवरी को धारा 11ए के तहत गजट प्रकाशित किया गया था, जिसमें हितबद्ध रैयतों को 60 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया गया था। इस बीच 25 फरवरी को बिहार विधान परिषद सदस्य प्रो. संजय कुमार सिंह ने सदन में अल्पसूचित प्रश्न के माध्यम से इस मुद्दे को उठाया था। जवाब में उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय सिन्हा ने कहा था कि रैयतधारी भू-स्वामियों की ओर से आपत्तिवाद प्राप्त होने पर जिलाधिकारी द्वारा संशोधित घोषणा जारी की जाएगी और उसके बाद ही मुआवजे का भुगतान होगा।
अब आपत्ति दर्ज कराने की समय-सीमा पूरी हो चुकी है और उम्मीद है कि प्रभावितों की ओर से दाखिल आपत्तियों के निबटारे के लिए कैंप लगाया जाएगा। माना जा रहा है कि आपत्तियों के समाधान और प्रभावित भू-स्वामियों की संतुष्टि के बाद ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया निर्णायक रूप से आगे बढ़ेगी।


‘पहले मुआवजा, तब काम’ से प्रभावितों ने दर्ज कराई आपत्ति


भूमि अधिग्रहण को लेकर असमंजस के बीच प्रभावित परिवारों ने अपने घरों की दीवारों पर ‘पहले मुआवजा, तब काम’ के बैनर लगा दिए हैं। यह बैनर इस परियोजना के इर्द-गिर्द खड़े उस असली सवाल को सामने लाते हैं, जिसमें विकास कार्य के साथ न्यायपूर्ण मुआवजे की मांग भी जुड़ी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे आरओबी निर्माण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन बिना मुआवजा और स्वामित्व विवाद के समाधान के किसी भी निर्माण की शुरुआत उन्हें स्वीकार नहीं होगी।

90.16 करोड़ की लागत, कई हिस्सों में होगा निर्माण


यह परियोजना बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, कार्य प्रमंडल गया द्वारा क्रियान्वित की जा रही है। करीब 9016.60 लाख रुपये की लागत से बनने वाला यह आरओबी गया स्टेशन को रामशिला और प्रेतशिला मार्ग से जोड़ेगा। धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी।
परियोजना के तहत 63.480 मीटर लंबा आरओबी, 424.8 मीटर वायाडक्ट, दोनों ओर सर्विस रोड, नाला निर्माण और पैदल यात्रियों के लिए लाइट फुट ओवरब्रिज का निर्माण किया जाना है। संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है कि कार्य को शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाए।

रोज का जाम, हर तबके की परेशानी


गया-हावड़ा रेलखंड पूर्व मध्य रेलवे का अत्यंत व्यस्त रेलमार्ग है। इस रूट पर राजधानी, वंदे भारत एक्सप्रेस सहित दर्जनों मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का परिचालन होता है। ट्रेनों की लगातार आवाजाही के कारण बागेश्वरी रेलवे फाटक अक्सर बंद रहता है, जिससे इलाके में रोजाना जाम की समस्या पैदा होती है।
इस जाम का असर स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों, श्रद्धालुओं, मरीजों, दुकानदारों और पर्यटकों तक पर पड़ता है। लोगों को समय पर स्टेशन, अस्पताल, दफ्तर और बाजार पहुंचने में दिक्कत होती है। ऐसे में स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि आरओबी निर्माण पूरा होने के बाद इस क्षेत्र को लंबे समय से चली आ रही जाम की समस्या से स्थायी राहत मिलेगी।

निर्माण की रफ्तार और मुआवजा समाधान—दोनों पर टिकी नजर


फिलहाल बागेश्वरी गुमटी आरओबी परियोजना दो समानांतर सवालों के बीच खड़ी है—एक ओर निर्माण कार्य को तेज करने की तैयारी और दूसरी ओर प्रभावित परिवारों को न्यायपूर्ण मुआवजा दिलाने की मांग। बैरियर लगाने, मशीनें पहुंचाने और पिलर निर्माण की तैयारी से यह संकेत मिल रहा है कि परियोजना अब कागज से निकलकर जमीन पर उतरने वाली है। लेकिन यह भी उतना ही स्पष्ट है कि यदि मुआवजा और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी आपत्तियों का समाधान समय पर नहीं हुआ, तो यह मुद्दा निर्माण की रफ्तार पर असर डाल सकता है।
ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन, निर्माण एजेंसी और प्रभावित परिवारों के बीच मुआवजा व अधिग्रहण को लेकर क्या सहमति बनती है, और बहुप्रतीक्षित बागेश्वरी आरओबी का निर्माण आखिर कितनी तेजी से आगे बढ़ता है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *