मगध लाइव ब्यूरो

गया, 15 अप्रैल 2026: गया की ऐतिहासिक धरोहर केंद्रीय कारा का नाम महान स्वतंत्रता सेनानी बैकुंठ शुक्ल के नाम पर रखने की वर्षों पुरानी मांग को लेकर अब जनांदोलन तेज होने जा रहा है। इसी कड़ी में 10 मई 2026 से केंद्रीय कारा के उत्तरी गेट पर शांतिपूर्ण अनशन कार्यक्रम आयोजित करने का ऐलान किया गया है।
यह अनशन शहीद बैकुंठ शुक्ल विचार मंच के बैनर तले किया जाएगा, जिसमें गया जिले के विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, छात्र और युवा वर्ग की व्यापक भागीदारी की बात कही जा रही है।
नेताओं ने सरकार पर साधा निशाना
विचार मंच से जुड़े कांग्रेस नेता विजय कुमार मिट्ठू समेत अन्य नेताओं ने आरोप लगाया कि बिहार सरकार वर्षों से इस ऐतिहासिक और भावनात्मक मांग को नजरअंदाज करती आ रही है। नेताओं ने कहा कि बैकुंठ शुक्ल ने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए और 14 मई 1934 को गया केंद्रीय कारा में उन्हें फांसी दी गई थी।
उन्होंने बताया कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के खिलाफ गवाही देने वाले फणीन्द्र नाथ घोष की हत्या के आरोप में ब्रिटिश हुकूमत ने बैकुंठ शुक्ल को फांसी दी थी।
अन्य जेलों के नामकरण का दिया उदाहरण
नेताओं ने कहा कि जब खुदीराम बोस के नाम पर मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारा और जुबा सहनी के नाम पर भागलपुर केंद्रीय कारा का नामकरण हो सकता है, तो गया केंद्रीय कारा का नाम अब तक शहीद बैकुंठ शुक्ल के नाम पर क्यों नहीं किया गया।
30 वर्षों से जारी है संघर्ष
बताया गया कि पिछले 30 वर्षों से हर साल 14 मई (शहादत दिवस) पर कार्यक्रम आयोजित कर सरकार को ज्ञापन सौंपा जाता रहा है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसके अलावा, गया के गांधी मैदान के दक्षिण-पूर्वी द्वार के जीर्णोद्धार और चाणक्यपुरी स्थित पार्क में बैकुंठ शुक्ल की प्रतिमा लगाने की मांग भी लगातार उठती रही है।
अनशन जारी रखने की चेतावनी
नेताओं ने स्पष्ट किया कि 10 मई से शुरू होने वाला यह अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार गया केंद्रीय कारा का नामकरण शहीद बैकुंठ शुक्ल के नाम पर नहीं कर देती। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक नामकरण नहीं, बल्कि इतिहास और शहादत को सम्मान देने की लड़ाई है।
— रिपोर्ट देवब्रत मंडल
