“मेयर साहब ने रोकने को कहा है..” के बयान के बाद निगम कर्मचारी स्तब्ध, कर्मचारियों से कथित भाषा का वीडियो वायरल
देवब्रत मंडल

गया नगर निगम में वित्तीय वर्ष 2026-27 की सैरात बंदोबस्ती प्रक्रिया के दौरान हुए विवाद ने अब प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। निगम परिसर में हुई पूरी घटना का कथित वीडियो सामने आने के बाद मामला और तूल पकड़ता जा रहा है। वीडियो में गया नगर निगम के एक उपनगर आयुक्त का कथित व्यवहार चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार नगर निगम में 8, 9 और 11 मई को राजस्व से जुड़ी सैरात बंदोबस्ती प्रक्रिया निर्धारित थी। इसी दौरान उपनगर आयुक्त निगम परिसर पहुंचे और कथित रूप से कहा कि “मेयर साहब ने इसे रोकने के लिए कहा है, अभी यह सैरात नहीं होगा।”
सैरात बंदोबस्त रोकने का कोई आदेश नहीं
प्रत्यक्षदर्शियों और निगम सूत्रों का दावा है कि सैरात प्रक्रिया को रोकने के लिए मौके पर किसी प्रकार का लिखित आदेश, आधिकारिक पत्र या प्रशासनिक निर्देश प्रस्तुत नहीं किया गया। अचानक प्रक्रिया रोकने की बात सामने आने से निगम कर्मियों और बोली प्रक्रिया में शामिल लोगों के बीच अफरा-तफरी और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई।
हालांकि विवाद और तनावपूर्ण माहौल के बीच बाद में किसी तरह सरात बंदोबस्ती की प्रक्रिया पूरी कराई गई, लेकिन इस दौरान निगम परिसर में काफी देर तक बहस और हंगामे का माहौल बना रहा।
वायरल वीडियो में भाषा के प्रयोग की पुष्टि नहीं
मामले तब और गंभीर माना जा रहा है जब सामने आए कथित वीडियो में उपनगर आयुक्त निगम कर्मचारियों से तीखी और भाषा का प्रयोग करते दिखाई और सुनाई दे रहे हैं। कर्मचारियों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि उन्होंने बातचीत के दौरान “तुम लोगों को मेयर साहब से बात करने में फ#ट रहा है…” जैसे आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। जिसकी पुष्टि मगध लाइव नहीं करता है
टिप्पणी के बाद कर्मचारियों में नाराजगी
इस कथित टिप्पणी को लेकर निगम कर्मचारियों में नाराजगी देखी जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी द्वारा अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ इस प्रकार की भाषा का प्रयोग प्रशासनिक मर्यादा और सेवा आचरण के विपरीत है।
आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस पूरे विवाद पर नगर आयुक्त की तरफ से उनकी प्रतिक्रिया लेने के लिए उनके सरकारी मोबाइल नंबर पर कॉल किया गया तो उधर से कोई प्रत्युत्तर नहीं आया। इसके बाद उनके व्हाट्सएप पर चैट कर उनकी प्रतिक्रिया मांगी गई, परंतु खबर प्रेषित किए जाने तक उनका जवाब नहीं आया। हो सकता है कि उनकी व्यस्तता रही होगी। वैसे पता चला है कि वे अवकाश पर हैं।
आधिकारिक बयान भी जारी नहीं किया गया
अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक लिखित बयान भी जारी नहीं किया गया है। मामले को लेकर नगर निगम के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चाओं का दौर जारी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है।
