देवब्रत मंडल

गया जंक्शन पर रेलयात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लगातार हो रही चोरी और झपटमारी की घटनाओं ने यह संकेत दे दिया है कि यहां सक्रिय चोर-उचक्कों का गिरोह मानो यात्रियों की सुरक्षित यात्रा में खलल डालने का ठेका ले चुका है।
हालात ऐसे हैं कि एक घटना की जांच पूरी भी नहीं हो पाती कि दूसरी, तीसरी और चौथी वारदात सामने आ जाती है। हाल ही में एक अप्रवासी भारतीय (NRI) महिला के साथ हुई चोरी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि एक और महिला यात्री का बैग काटकर मोबाइल चोरी कर लिया गया।
चलती ट्रेन और प्लेटफॉर्म:दोनों जगह खतरा
ताजा घटना में महिला यात्री पटना जाने के लिए ट्रेन में चढ़ने का प्रयास कर रही थी, तभी सक्रिय गिरोह ने उसके बैग को काटकर मोबाइल उड़ा लिया। यह कोई पहली घटना नहीं है। चलती ट्रेनों में झपट्टा मारकर मोबाइल छीनने की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं।
पत्रकार और आम यात्री भी निशाने पर
गया जंक्शन पर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि पत्रकार भी इससे अछूते नहीं रहे। किसी का पर्स चोरी हुआ, तो किसी का मोबाइल। यहां तक कि ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) ईटानगर में कार्यरत एक कर्मचारी की बाइक तक स्टेशन परिसर से चोरी हो चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा मामला
अप्रवासी महिला श्वेता शर्मा का मामला अब अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंच चुका है। पीड़िता सोशल मीडिया के जरिए लगातार न्याय की गुहार लगा रही है और मामला अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों तक चर्चा में है। पुष्पा सिंह के गले से सोने का चेन की चोरी, हिमांशु जैन आदि यात्री की शिकायतें फ़ाइल में ही दर्ज होकर केवल मानो रह गई है। संपर्क क्रांति एक्सप्रेस की घटना भी बढ़ते अपराध की सूची में है।
सुरक्षा के दावे बनाम जमीनी हकीकत
रेल पुलिस के डीएसपी की तैनाती
अंचल निरीक्षक की मौजूदगी
आरपीएफ के सहायक कमांडेंट की नियुक्ति
सीआईबी टीम की सक्रियता, रेल थानाध्यक्ष, आरपीएफ पोस्ट प्रभारी निरीक्षक की टीम। इसके बावजूद अपराधियों का बेखौफ होकर वारदात को अंजाम देना और मामलों का सफल उद्भेदन न हो पाना कई सवाल खड़े करता है।
यात्रियों में असुरक्षा की भावना
लगातार हो रही घटनाओं से यात्रियों में भय का माहौल है। लोग अब अपने सामान और सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, खासकर महिला यात्रियों के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
ठोस कार्रवाई व त्वरित जांच,तथा गिरफ्तारी जरूरी
गया जंक्शन पर बढ़ती आपराधिक घटनाएं यह दर्शाती हैं कि केवल सुरक्षा बलों की तैनाती पर्याप्त नहीं है, बल्कि ठोस कार्रवाई, त्वरित जांच और अपराधियों की गिरफ्तारी जरूरी है। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक यात्रियों की “सुखद और निरापद यात्रा” सिर्फ एक दावा बनकर रह जाएगी। सोना लूटकांड तो मानो पहेली बनकर रह ही गई है।
