गया के कुष्ठ अस्पताल की 12 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण, SDO ने प्रबंधन को बताया ‘मूक सहायक’

Deobarat Mandal

देवब्रत मंडल

मरीजों को खाना तक नहीं, शाम का नाश्ता बंद; 27 मरीजों के लिए सिर्फ 8 कमरे, हैंडपंप भी खराब

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गया, 18 जून 2026। टाइम्स ऑफ इंडिया की प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, गया के छोटकी नवादा गांधी मोड से कुछ दूर आगे रामशिला पहाड़ की तलहटी में स्थित गौतम बुद्ध कुष्ठ आश्रम सह अस्पताल एवं आश्रय स्थल की करीब 12 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण है। और भी जमीन पर अवैध कब्जे का खतरा मंडरा रहा है।

SDO का आरोप: अस्पताल प्रबंधन ‘नॉन-कोऑपरेटिव

गया सदर SDO अनिल कुमार रमन ने अस्पताल प्रबंधन पर “असहयोग” और अतिक्रमण में “मूक सहायक” की भूमिका निभाने का आरोप लगाया है। अस्पताल गया-पटना रोड के पश्चिम में पंचायती अखाड़ा इलाके में स्थित है।

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मुख्य द्वार पर उकेरी गई ऐतिहासिक दास्तां

मरीजों की हालत दयनीय, खाने तक के लाले

बिहार राज्य कुष्ठ कल्याण समिति के अध्यक्ष पूर्व वार्ड पार्षद डॉ. विनोद कुमार मंडल ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मरीजों की दुर्दशा के प्रति उदासीन हैं। इनका कहना है कि यह अस्पताल नहीं हुआ करता था, अंग्रेजी हुकूमत के दौरान यहां कुष्ठ रोगियों के आवासन के लिए आश्रय स्थल बनाया गया था। बाद में इनके इलाज के लिए यहां इंडोर और आउटडोर की सुविधाएं मुहैया कराया जाने लगा।

उन्होंने बताया:

  1. खाना बंद रहा: कुछ समय तक मरीजों को भोजन की आपूर्ति बंद रही। औरंगाबाद सांसद अभय कुशवाहा के हस्तक्षेप के बाद ही इसे बहाल किया गया।
  2. शाम का नाश्ता बंद: खाना शुरू होने के बाद भी शाम का नाश्ता अब तक बंद है।
  3. जर्जर कमरे, पानी नहीं: अस्पताल के कमरे जर्जर हैं। शौचालय की कमी है और पीने का पानी तक नहीं। पहले लगे हैंडपंप खराब हो चुके हैं।

प्रभारी ने मानीं खामियां: 16 की जगह 27 मरीज

अस्पताल प्रभारी डॉ. संजीव सुमन ने माना कि डॉ. मंडल की ज्यादातर चिंताएं सही हैं। उन्होंने कहा कि जमीन काफी होने के बावजूद आवास की कमी है। अभी 8 कमरों में 27 मरीज रह रहे हैं, जबकि इनमें सिर्फ 16 लोगों के रहने की व्यवस्था है।

भीख मांगने से रोकने का अधिकार नहीं

भिक्षावृत्ति पर आधिकारिक प्रतिबंध के बावजूद मरीजों के भीख मांगने पर डॉ. सुमन ने कहा कि वे सिर्फ समझा सकते हैं, शारीरिक रूप से रोकने का अधिकार उनके पास नहीं है।

उन्होंने बताया कि अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार लिखा, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। यहां तक कि वर्तमान केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने भी जिला प्रशासन के साथ पिछले दिनों हुई एक बैठक में इस कुष्ठ आश्रम की जमीन पर अतिक्रमण को लेकर सवाल उठा चुके हैं।

स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया(अब्दुल क़ादिर)

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